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औद्याेगिक क्षेत्रः सरकारी नीतियों ने किया बंटाधार
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 20 Aug 2015 11:44 PM IST
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उद्योगों की बेहतरी के लिए जिला मुुख्यालय से तीन किलोमीटर दक्षिण गोरखपुर वाराणसी नेशनल हाइवे के किनारे वर्ष 2004 में औद्योगिक क्षेत्र ताजोपुर का आवंटन किया गया। लेकिन इनकी स्थापना का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकल सका। सरकार की उद्योग विरोधी नीतियों और उपेक्षा के चलते आधे से ज्यादा उद्योग या तो बंद हो गए अथवा बंदी के कगार पर पहुंच गए हैं। देश के अन्य प्रदेशों की तुलना में यहां टैक्स ज्यादा हैं। व्यापारी नेताओं को दर्द है कि सरकार ने चुनाव के समय व्यापारियों से वादा किया था अन्य प्रदेशों के उद्योगों के लिए बनी टैक्स नीति का अध्ययन विशेषज्ञों से कराया जाएगा और उसी के अनुसार समान टैक्सों का निर्धारण किया जाएगा। लेकिन ऐसा हो नहीं सका। कुछ समस्याएं जनपद स्तर की है, इनसे भी उद्यमियों को दो चार होना पड़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में फ्लोर मिलें, कंक्रीट के दरवाजे और चौखट तथा जरी के उद्योग अधिक संख्या में लगे हैं।
औद्योगिक क्षेत्र ताजोपुर की स्थापना के समय यहां छोटे बड़े 302 उद्योगों के लिए भूखंड आवंटित किए। इनमें से 225 ही उद्योग स्थापित हो सके। लेकिन इनमें से सरकारी नीतियों, बाजार की मंदी, आर्थिक संकट की मार न झेल पाने के चलते 102 उद्योग बंद हो गए। केवल 123 उद्योग ही चलते रहे। लेकिन वर्तमान में इनमें से 50 उद्योग बीमार चल रहे हैं। इनमें कभी ताला बंद हो सकता है। सबसे अधिक मार फ्लोर मिलों को सहनी पड़ रही है। इस क्षेत्र में चलने वाली छह आटा मिलें बंद हो चुकी हैं। जरी के काम वाले अधिकतर उद्योग यहां चलते थे। लेकिन बाजार की मंदी ने इन्हें डूबो दिया। कई जरी उद्योग बंद हो गए , हालांकि इनमें से अब कुछ जरी उद्योगों में पुन: काम शुरू हो गया है। उनमें से भी 50 उद्योग विभिन्न कारणों से बीमार चल रहे हैं और बंदी के कगार पर हैं।
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औद्योगिक क्षेत्र ताजोपुर की स्थापना के समय यहां छोटे बड़े 302 उद्योगों के लिए भूखंड आवंटित किए। इनमें से 225 ही उद्योग स्थापित हो सके। लेकिन इनमें से सरकारी नीतियों, बाजार की मंदी, आर्थिक संकट की मार न झेल पाने के चलते 102 उद्योग बंद हो गए। केवल 123 उद्योग ही चलते रहे। लेकिन वर्तमान में इनमें से 50 उद्योग बीमार चल रहे हैं। इनमें कभी ताला बंद हो सकता है। सबसे अधिक मार फ्लोर मिलों को सहनी पड़ रही है। इस क्षेत्र में चलने वाली छह आटा मिलें बंद हो चुकी हैं। जरी के काम वाले अधिकतर उद्योग यहां चलते थे। लेकिन बाजार की मंदी ने इन्हें डूबो दिया। कई जरी उद्योग बंद हो गए , हालांकि इनमें से अब कुछ जरी उद्योगों में पुन: काम शुरू हो गया है। उनमें से भी 50 उद्योग विभिन्न कारणों से बीमार चल रहे हैं और बंदी के कगार पर हैं।
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