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घाघरा के तटवर्ती गांवों में खतरा
ब्यूरो, अमर उजाला,
Updated Tue, 12 Jul 2016 11:34 PM IST
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जलस्तर बढ़ने के बाद दोहरीघाट क्षेत्र में फैला नदी का पाट हिला रहा है गांव वालों का कलेजा।
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घाघरा में बाढ़ आने पर प्रतिवर्ष दोहरीघाट तथा मधुबन क्षेत्र मेें व्यापक पैमाने पर नुकसान होता है। बाढ़ से हजारों हेक्टेयर फसल जलमग्न होकर नष्ट हो जाती है। कटान रोकने के नाम पर अब तक करोड़ों रुपया खर्च कर किया जा चुका है, लेकिन अभी तक बाढ़ समस्या का स्थाई समाधान हो सका है। सिंचाई विभाग के आला अधिकारियों ने 2268.56 लाख की लागत से धनौली रामपुर से मुक्तिधाम तक पीचिंग का प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कटान नहीं होने का दावा किया है।
घाघरा प्रतिवर्ष नई बाजार, नौली, चिऊटीडांड़, लामी, तारनपुर, सिपाह, खरकौेेेली, गोड़ौली, चकभगवानदास सहित विभिन्न गांवों में कहर बरपाती है। इससे हजारों एकड़ फसल जलमग्न कर नष्ट हो जाती है। लेकिन किसानों को मुआवजा के नाम पर एक पाई की धनराशि मयस्सर नहीं होती। अब तक तटवर्ती गांवों की 2700 एकड़ से अधिक की भूमि को नदी ने लील लिया है। सिंचाई विभाग की ओर से कटान रोकने के नाम पर करोड़ों रुपया खर्च कर दिया गया।
इसके बावजूद बाढ़ तथा कटान समस्या का समाधान नहीं किया जा है। नदी में उफान से तटवर्ती इलाके के लोगों की चिंता सताने लगी है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मानें तो 2268.56 लाख की लागत से धनौली रामपुर से मुक्तिधाम तक पीचिंग का प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कटान नहीं होने का दावा किया है। नईबाजार व नवली को कटान रोकने के लिए पहले से ही नौ ठोकर बनाए जा चुके हैं। मुक्तिधाम तथा भारत माता मंदिर को बचाने के लिए 500 घन मीटर बोल्डर रिजर्व रखा गया है।
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घाघरा प्रतिवर्ष नई बाजार, नौली, चिऊटीडांड़, लामी, तारनपुर, सिपाह, खरकौेेेली, गोड़ौली, चकभगवानदास सहित विभिन्न गांवों में कहर बरपाती है। इससे हजारों एकड़ फसल जलमग्न कर नष्ट हो जाती है। लेकिन किसानों को मुआवजा के नाम पर एक पाई की धनराशि मयस्सर नहीं होती। अब तक तटवर्ती गांवों की 2700 एकड़ से अधिक की भूमि को नदी ने लील लिया है। सिंचाई विभाग की ओर से कटान रोकने के नाम पर करोड़ों रुपया खर्च कर दिया गया।
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इसके बावजूद बाढ़ तथा कटान समस्या का समाधान नहीं किया जा है। नदी में उफान से तटवर्ती इलाके के लोगों की चिंता सताने लगी है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मानें तो 2268.56 लाख की लागत से धनौली रामपुर से मुक्तिधाम तक पीचिंग का प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद कटान नहीं होने का दावा किया है। नईबाजार व नवली को कटान रोकने के लिए पहले से ही नौ ठोकर बनाए जा चुके हैं। मुक्तिधाम तथा भारत माता मंदिर को बचाने के लिए 500 घन मीटर बोल्डर रिजर्व रखा गया है।
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