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छह मीटर बोल्डर की पिचिंग नदी में विलीन
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दोहरीघाट। घाघरा नदी का जलस्तर में घटाव के बाद भी नदी के कहर बरपाने से तटवर्ती इलाके के लोगों की चिंता बढ़ती ही जा रही है। तेज चल रही पुरवा हवा के चलते घाघरा का भारी दबाब बीबीपुर बेलौली बंधे पर बढ़ गया है। बंधा से नदी का पानी टकराने से बंधा की मिट्टी कटकर गिरने से लोगों में दहशत का माहौल है। वहीं गौरीशंकर श्मशान पर जहां छह मीटर बोल्डर की पिचिंग नदी के धारा में कटकर विलीन हो जाने हाहाकार मचा गया।
नदी का खतरा बिंदु 69.90 मीटर रहा। बृहस्पतिवार को गौरीशंकर श्मशान पर जहां छह मीटर बोल्डर की पिचिंग नदी के धारा में कटकर विलीन हो जाने से हाहाकार मचा गया। सिंचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने के लिए बोल्डर की पिचिंग करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन नदी के पानी का लेबल ऊपर होने के चलते पिचिग नदी की धारा में विलीन हो जा रही है। अधिकारियों ने रिंग बंधों पर दौरा तेज कर दिया है। बंधा टूटने की आशंका से तटवर्ती गांव के लोगों की नींद ही उड़ गई है।
पूर्व ब्लाक प्रमुख सागर यादव ने बताया कि समय रहते सिंचाई विभाग की तरफ से ध्यान नहीं दिया गया तो गौरीडीह, जमीराचौराडीह,बीबीपुर बेलौली कोरौली, पाऊस सहित विभिन्न गांव नदी के जद में आ सकते हैं। नदी की लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों पर टकरा रही है। मुक्तिधाम स्थित श्मशान घाट पर कटान जारी होने से लोग जागकर रात बिता रहे हैं। पानी के दबाव से नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारतमाता मंदिर, दुर्गा मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, डीह बाबा का मंदिर, लोकनिर्माण का डाक बंगला, शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर आदि का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। वहीं, हजारों एकड़ पानी में डूबी फसल नष्ट हो रही है। रामघाट, हनुमान गढ़ी तक पानी आने से मंदिर की सभी सीढियां, चबूतरा बाढ़ के पानी में डूब गई है।
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नदी का खतरा बिंदु 69.90 मीटर रहा। बृहस्पतिवार को गौरीशंकर श्मशान पर जहां छह मीटर बोल्डर की पिचिंग नदी के धारा में कटकर विलीन हो जाने से हाहाकार मचा गया। सिंचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने के लिए बोल्डर की पिचिंग करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन नदी के पानी का लेबल ऊपर होने के चलते पिचिग नदी की धारा में विलीन हो जा रही है। अधिकारियों ने रिंग बंधों पर दौरा तेज कर दिया है। बंधा टूटने की आशंका से तटवर्ती गांव के लोगों की नींद ही उड़ गई है।
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पूर्व ब्लाक प्रमुख सागर यादव ने बताया कि समय रहते सिंचाई विभाग की तरफ से ध्यान नहीं दिया गया तो गौरीडीह, जमीराचौराडीह,बीबीपुर बेलौली कोरौली, पाऊस सहित विभिन्न गांव नदी के जद में आ सकते हैं। नदी की लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों पर टकरा रही है। मुक्तिधाम स्थित श्मशान घाट पर कटान जारी होने से लोग जागकर रात बिता रहे हैं। पानी के दबाव से नगर की ऐतिहासिक धरोहरों मुक्तिधाम, भारतमाता मंदिर, दुर्गा मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, डीह बाबा का मंदिर, लोकनिर्माण का डाक बंगला, शाही मस्जिद, हनुमान मंदिर आदि का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। वहीं, हजारों एकड़ पानी में डूबी फसल नष्ट हो रही है। रामघाट, हनुमान गढ़ी तक पानी आने से मंदिर की सभी सीढियां, चबूतरा बाढ़ के पानी में डूब गई है।
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