मऊ। जिले से संचालित रोडवेज की बसों की कमी का खामियाजा यात्रियों को झेलना पड़ रहा है। जिले में कई रूटों पर बसों का संचालन नहीं हो रहा है। इसके साथ ही अन्य जिलों को जाने वाले कई रूटों पर बसों की कमी के कारण भी यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं मऊ डिपो की काफी बसें मरम्मत के अभाव में डिपो के वर्कशाप में खड़ी हैं।
मऊ डिपो की 53 बसों में महज 28-30 बसों का ही संचालन सुनिश्चित हो पा रहा है। काफी बसें मरम्मत के अभाव में वर्कशाप में खड़ी है। मऊ डिपो की बसें बलिया, आजमगढ़, जौनपुर, वाराणसी, प्रयागराज तथा कानपुर आदि के लिए होता है। लेकिन सभी रूटों पर पर्याप्त बसों का न होना यात्रियों के लिए फजीहत का सबब बना हुआ है। बलिया के लिये दो बसें, प्रयागराज के लिए चार बसें, कानपुर के लिए तीन, दोहरीघाट के लिए दो, तथा लखनऊ के लिए 12 बसों का ही संचालन हो रहा है। जबकि जिले में चिरैयाकोट के लिए महज एक बस का ही संचालन हो रहा है। जबकि रानीपुर-खुरहट, रतनपुरा से भीमपुरा आदि रूटों पर एक भी बसें संचालित नहीं हो रही हैं। वहीं कई रूटों पर दूसरे डिपो की बसों का सहारा लेकर यात्रियों को यात्रा करना पड़ रहा है। विभाग चालकों और परिचालकों की कमी का रोना रो रहा है। नगर के ताजोपुर स्थित वर्कशाप में पार्ट्स के अभाव में कई बसें खड़ी हैं। इस संबंध में एआरएम रमेश चंद्र का कहना है कि महज 13 नियमित चालक तथा 21 नियमित परिचालक हैं। अभी 33 परिचालक तथा 32 चालकों की कमी है। चालकों की कमी के कारण सभी बसों का संचालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है।