मऊ: किशोरी संग दुष्कर्म में सात वर्ष का सश्रम कारावास, गाजीपुर में आरोपी को 20 साल की कैद
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मऊ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक रामराज ने किशोरी को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में एक महिला सहित नामजद तीन को दोषी पाया। कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी को सात वर्ष का सश्रम कारावास के साथ 17 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई ।
किशोरी को बहला-फुसलाकर भगाने के मामले में दोषी महिला सहित दो को पांच-पांच वर्ष की सजा के साथ सात-सात हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माने की 50 फीसदी राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया। मामला दक्षिण टोला थाना क्षेत्र का है।
अभियोजन के अनुसार वादी मुकदमा की नाबालिग बेटी को 16 मई 2009 को भटकुआं पट्टी सिंघाराय खेदूपुरा निवासी मनोज पुत्र शिवचंद, विनोद पुत्र शिवधन और इंदू देवी पत्नी अमरजीत शादी कराने का झांसा देकर फुसला ले गए। आरोप था कि मनोज ने पीड़िता से दुुुष्कर्म किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से एडीजीसी फौजदारी राणा प्रताप सिंह ने आठ गवाह पेश किए।
एडीजे ने आरोपीगण विनोद, मनोज और इंदू देवी को दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष कारावास और दो-दो हजार रुपये जुर्माना और जुर्माना न देने पर एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई । वहीं तीनों को शादी के आशय से भगाने के मामले में पांच वर्ष की सजा के साथ ही पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया।
अर्थदंड न देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं दुष्कर्म के दोषी मनोज को सात वर्ष सश्रम कारावास की सजा के साथ ही दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
गाजीपुर में 50 हजार रुपये का अर्थदंड
गाजीपुर के विशेष अपर सत्र न्यायाधीश पाक्सो द्वितीय अजय श्रीवास्तव की अदालत ने गुरुवार को नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी को 20 साल की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
अभियोजन के अनुसार, मुहम्मदाबाद थाना के गौसपुर गांव के पलेन धोबी ने एक छह वर्षीय पीड़िता को 13 मार्च 2017 को शाम छह बजे बहला-फुसला कर हवाई पट्टी के बगल में अरहर के खेत में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। पीड़िता के रोने की आवाज सुनकर उसके चाचा मौके पर पहुंचे और उसे अस्पताल पहुंचाया।
इस दौरान रास्ते में मिले आरोपी को अन्य लोगों के सहयोग से पकड़ कर पुलिस के हवाले किया था। तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। जहां उसे जेल भेजा गया।
विवेचना उपरांत आरोपी के विरुद्ध नयायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया गया। दौरान विचारण सहायक शासकीय अधिवक्ता अवधेश कुमार सिंह ने आठ गवाहों को पेश किया। सभी गवाहों ने घटना का समर्थन किया। अभियोजन एवं बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने दोषी को सजा सुनाई।