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असुरक्षित वाहनों से नौनिहाला जा रहे स्कूल, हादसों के बाद भी लापरवाही
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मऊ। जनपद में स्कूली वाहनों से स्कूल जा रहे बच्चे कितने सुरक्षित हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में स्कूलों में चल रहे 50 फीसदी वाहन अनफिट हैं। स्कूली वाहन संचालक वाहनों की फिटनेस कराने को लेकर कोई तेजी नहीं दिखा रहे हैं। वहीं परिवहन विभाग कार्रवाई करने के बजाए किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
सात साल पहले चार दिसंबर को रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के महासो में स्कूली बस की ट्रेन से भीषण टक्कर हो गई थी। इस रेल हादसे ने जिले के लोगों को भीतर तक झकझोर दिया था। वहीं बीते सोमवार को गोकुलपुरा के पास बोलेरो को ओवरटेक करने के चक्कर में स्कूली बस पलट गई। स्कूली वाहनों के साथ हो रहे हादसों के बाद भी परिवहन विभाग के अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद नहीं टूट रही है।
आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले में कुल 542 निजी स्कूल संचालित हैं। जिनमें कुल 367 स्कूली बस पंजीकृत हैं। इनमें से 184 स्कूली बसें फिटनेस टेस्ट में फेल हैं। जनपद में 50 फीसदी अनफिट वाहन से जान जोखिम में डालकर बच्चे स्कूल ले जाए जा रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर के बाद से स्कूल पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जा रहा है। लेकिन विभाग की तरफ से लापरवाही करने वाले स्कूली वाहन संचालकों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण फरवरी 2020 से 31 अक्टूबर 2021 तक वाहनों के फिटनेस आदि को लेकर छूट दी गई थी। लेकिन छूट की सीमा समाप्त होने के डेढ़ माह बाद भी अभी तक वाहनों का फिटनेस नहीं कराया गया है।
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छोटे वाहनों से भी स्कूल लाए जा रहे बच्चे
मऊ। स्कूली बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए शासन की तरफ से मानक तय किए गए हैं, मानक के विपरीत बच्चों को स्कूल तक ले जाने के लिए छोटे सवारी वाहनों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। एआरटीओ रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि छोटे सवारी वाहनों से स्कूली बच्चों को ले जाना गैर कानूनी है। स्कूल बस संचालकों को इस संबंध में नोटिस जारी किया गया है। लापरवाही पाए जाने पर स्कूल वाहन संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
25 फीसदी स्कूली बसों में ही लगा जीपीएस
मऊ। छह वर्ष पूर्व महासों में हुए रेल हादसे के बाद भी परिवहन विभाग के अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद नहीं टूट रही है। शासन की तरफ से स्कूली बसों में जीपीएस लगाने का आदेश वर्षों पहले जारी किया जा चुका है। लेकिन अभी तक लगभग 25 फीसदी 85 स्कूली बसों में ही जीपीएस लगाया जा सका है। स्कूलों को भारी भरकम फीस देने के बाद भी अभिभावकों को अपने बच्चों की लोकेशन नहीं मिल पा रही है।
एआरटीओ प्रशासन रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि स्कूली वाहन संचालकों को वाहनों में जीपीएस लगवाने तथा वाहनों का फिटनेस कराने को लेकर नवंबर माह में नोटिस जारी की गई है। बिना फिटनेस के वाहनों का संचालन पाए जाने पर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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सात साल पहले चार दिसंबर को रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के महासो में स्कूली बस की ट्रेन से भीषण टक्कर हो गई थी। इस रेल हादसे ने जिले के लोगों को भीतर तक झकझोर दिया था। वहीं बीते सोमवार को गोकुलपुरा के पास बोलेरो को ओवरटेक करने के चक्कर में स्कूली बस पलट गई। स्कूली वाहनों के साथ हो रहे हादसों के बाद भी परिवहन विभाग के अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद नहीं टूट रही है।
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आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले में कुल 542 निजी स्कूल संचालित हैं। जिनमें कुल 367 स्कूली बस पंजीकृत हैं। इनमें से 184 स्कूली बसें फिटनेस टेस्ट में फेल हैं। जनपद में 50 फीसदी अनफिट वाहन से जान जोखिम में डालकर बच्चे स्कूल ले जाए जा रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर के बाद से स्कूल पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जा रहा है। लेकिन विभाग की तरफ से लापरवाही करने वाले स्कूली वाहन संचालकों पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण फरवरी 2020 से 31 अक्टूबर 2021 तक वाहनों के फिटनेस आदि को लेकर छूट दी गई थी। लेकिन छूट की सीमा समाप्त होने के डेढ़ माह बाद भी अभी तक वाहनों का फिटनेस नहीं कराया गया है।
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छोटे वाहनों से भी स्कूल लाए जा रहे बच्चे
मऊ। स्कूली बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए शासन की तरफ से मानक तय किए गए हैं, मानक के विपरीत बच्चों को स्कूल तक ले जाने के लिए छोटे सवारी वाहनों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। एआरटीओ रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि छोटे सवारी वाहनों से स्कूली बच्चों को ले जाना गैर कानूनी है। स्कूल बस संचालकों को इस संबंध में नोटिस जारी किया गया है। लापरवाही पाए जाने पर स्कूल वाहन संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
25 फीसदी स्कूली बसों में ही लगा जीपीएस
मऊ। छह वर्ष पूर्व महासों में हुए रेल हादसे के बाद भी परिवहन विभाग के अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद नहीं टूट रही है। शासन की तरफ से स्कूली बसों में जीपीएस लगाने का आदेश वर्षों पहले जारी किया जा चुका है। लेकिन अभी तक लगभग 25 फीसदी 85 स्कूली बसों में ही जीपीएस लगाया जा सका है। स्कूलों को भारी भरकम फीस देने के बाद भी अभिभावकों को अपने बच्चों की लोकेशन नहीं मिल पा रही है।
एआरटीओ प्रशासन रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि स्कूली वाहन संचालकों को वाहनों में जीपीएस लगवाने तथा वाहनों का फिटनेस कराने को लेकर नवंबर माह में नोटिस जारी की गई है। बिना फिटनेस के वाहनों का संचालन पाए जाने पर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।