{"_id":"5a68cb5c4f1c1b7f268b636c","slug":"regarding-clearing-the-municipality","type":"story","status":"publish","title_hn":"तमसा की सफाई में पालिका का अड़ंगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तमसा की सफाई में पालिका का अड़ंगा
mau news
Updated Wed, 24 Jan 2018 11:37 PM IST
विज्ञापन
गंगा बैराज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ। आजादी के दशकों बाद भी तमसा नदी को प्रदूषण मुक्त नहीं किया सका है। तमसा मेें गिरने वाले गंदा नालों के पानी को फिल्टर करने के लिए जल निगम की तरफ से 10 करोड़ की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना है। लेकिन नगरपालिका प्रशासन ने जमीन उपलब्ध कराने में रुचि न दिखाए जाने से महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट खटाई में पड़ा है।
पवित्र तमसा जिले के पश्चिमी छोर आजमगढ़ जनपद के बार्डर से लेकर बलिया जनपद के बार्डर तक घुमाव लेते हुए फैली हुई है। तमसा नदी मर्यादा पुरुषोत्तम राम से जुड़े होने के कारण हिंदू जनमानस में आस्था का प्रतीक रही है। इसी वजह से प्रमुख स्नान और धार्मिक पर्वो पर नगर के हनुमान घाट, मड़इयाघाट, बमघाट, सत्तीघाट, ढेकुलियाघाट सहित विभिन्न घाटों पर लोग नदी में स्नान कर पूजन अर्चन करते हैं। लेकिन नदी तट के पास मकानों के बन जाने से नदी में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। हालत यह है कि कूड़ा निस्तारण की योजना न होने से प्रतिदिन लगभग आठ सौ टन कूड़ा नदी में गिराया जाता है। यही नहीं नगर के दर्जनों नालों का गंदा पानी नदी मेें ही गिरता है। इससे लोग अब नदी में स्नान करने से भी कतराने लगे हैं। गर्मी के समय तो नदी नाले में तब्दील हो जाती है। नदी को प्रदूषित होने से रोकने के लिए नदी में गिरने वाले नालों के गंदे पानी को फिल्टर करने के लिए शासन की पहल पर जल निगम की तरफ से लगभग 10 करोड़ की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लान लगाया जाना है। इसके लिए नगरपालिका प्रशासन को डेढ़ हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराना है। लेकिन नगरपालिका प्रशासन जमीन उपलब्ध कराने में रुचि ही नहीं दिखा रहा है। इसके चलते महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटकी पड़ी है। ऐसे में नदी प्रदूषित होने से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। पर्यावरणविदों की मानें तो नगरपालिका शासन का यही रवैया रहा तो जीवनदायिनी तमसा विलुप्त हो सकती है।
इनसेट
क्या कहते हैं अधिकारी
नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी आशीष ओझा का कहना है कि नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लान के लिए जल निगम की तरफ से डीपीआर बनाया जा रहा है। वहीं जल निगम के अधिशासी अभियंता एके शर्मा का कहना है कि नगरपालिका की तरफ से डेढ़ हेक्टेयर जमीन उपलब्ध न कराने के चलते प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
नदी को निर्मल रखना हम सबका दायित्व
मऊ। तमसा नदी दिन ब दिन प्रदूषित होती जा रही है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। इस संबंध में प्रधानाचार्य देवभाष्कर तिवारी, शिक्षक नेता अंजनी सिंह का कहना है कि नदी को निर्मल रखना हम सभी लोगों का दायित्व है। नदी के प्रदूषित होने से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। ऐसे में हर हाल में प्राथमिकता के आधार पर वाटर ट्रीटमेंट लगवाया जाए। इसी तरह व्यापारी नेता सुरेश कल्यानिया, जीपी बरनवाल का कहना है कि नदियों के स्वच्छ रहने से ही लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सकेगा। नगरपालिका प्रशासन जमीन अविलंब जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी कराए।
विज्ञापन
पवित्र तमसा जिले के पश्चिमी छोर आजमगढ़ जनपद के बार्डर से लेकर बलिया जनपद के बार्डर तक घुमाव लेते हुए फैली हुई है। तमसा नदी मर्यादा पुरुषोत्तम राम से जुड़े होने के कारण हिंदू जनमानस में आस्था का प्रतीक रही है। इसी वजह से प्रमुख स्नान और धार्मिक पर्वो पर नगर के हनुमान घाट, मड़इयाघाट, बमघाट, सत्तीघाट, ढेकुलियाघाट सहित विभिन्न घाटों पर लोग नदी में स्नान कर पूजन अर्चन करते हैं। लेकिन नदी तट के पास मकानों के बन जाने से नदी में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। हालत यह है कि कूड़ा निस्तारण की योजना न होने से प्रतिदिन लगभग आठ सौ टन कूड़ा नदी में गिराया जाता है। यही नहीं नगर के दर्जनों नालों का गंदा पानी नदी मेें ही गिरता है। इससे लोग अब नदी में स्नान करने से भी कतराने लगे हैं। गर्मी के समय तो नदी नाले में तब्दील हो जाती है। नदी को प्रदूषित होने से रोकने के लिए नदी में गिरने वाले नालों के गंदे पानी को फिल्टर करने के लिए शासन की पहल पर जल निगम की तरफ से लगभग 10 करोड़ की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लान लगाया जाना है। इसके लिए नगरपालिका प्रशासन को डेढ़ हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराना है। लेकिन नगरपालिका प्रशासन जमीन उपलब्ध कराने में रुचि ही नहीं दिखा रहा है। इसके चलते महत्वाकांक्षी योजना अधर में लटकी पड़ी है। ऐसे में नदी प्रदूषित होने से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। पर्यावरणविदों की मानें तो नगरपालिका शासन का यही रवैया रहा तो जीवनदायिनी तमसा विलुप्त हो सकती है।
विज्ञापन
इनसेट
क्या कहते हैं अधिकारी
नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी आशीष ओझा का कहना है कि नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लान के लिए जल निगम की तरफ से डीपीआर बनाया जा रहा है। वहीं जल निगम के अधिशासी अभियंता एके शर्मा का कहना है कि नगरपालिका की तरफ से डेढ़ हेक्टेयर जमीन उपलब्ध न कराने के चलते प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
नदी को निर्मल रखना हम सबका दायित्व
मऊ। तमसा नदी दिन ब दिन प्रदूषित होती जा रही है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। इस संबंध में प्रधानाचार्य देवभाष्कर तिवारी, शिक्षक नेता अंजनी सिंह का कहना है कि नदी को निर्मल रखना हम सभी लोगों का दायित्व है। नदी के प्रदूषित होने से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। ऐसे में हर हाल में प्राथमिकता के आधार पर वाटर ट्रीटमेंट लगवाया जाए। इसी तरह व्यापारी नेता सुरेश कल्यानिया, जीपी बरनवाल का कहना है कि नदियों के स्वच्छ रहने से ही लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सकेगा। नगरपालिका प्रशासन जमीन अविलंब जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी कराए।