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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   Ramvilas Pandey went to jail three times in freedom struggle

स्वाधीनता संग्राम में तीन बार जेल गए थे रामविलास पांडेय

Wed, 09 Aug 2017 12:17 AM IST
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mau news Updated Wed, 09 Aug 2017 12:17 AM IST
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मऊ। भारत की आजादी की लड़ाई में पूर्वांचल के वीर सपूतों में रामविलास पांडेय का नाम भी बड़े अदब के साथ लिया जाता है। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में वे तीन बार जेल गए। आजादी मिलने के बाद भी देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर यह आखिरी सांस तक लड़ते रहे। अपने आखिरी भाषण दिल्ली के कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में इन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की और वहां से आने के कुछ ही दिनों बाद इनकी आठ नंवबर 2011 को मृत्यु हो गई।  
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व मंत्री रामविलास पांडेय घोसी तहसील के इटौरा बुजुर्ग गांव के रहने वाले थे। इनका जन्म एक जुलाई 1918 को हुआ था। बचपन से ही इनके मन में आजादी को लेकर टीस थी और पढ़ाई पूरी करने के बाद यह स्वाधीनता संग्राम की लड़ाई में कूच गए। पहली बार इन्हें 1938 में अंग्रेजों के खिलाफ भाषण देने एवं नारा लगाने पर गिरफ्तार किया गया था। 17 मई 1940 को दुबारा इन्हें जेल हुई और एक अंग्रेज अधिकारी को गाली देने के मामले में इन पर 25 रुपये का अंग्रेजी सरकार ने जुर्माना लगाया। 1942 के ऐतिहासिक मधुबन अगस्त क्रांति के कांड में इन्हें 12 वर्ष की कड़ी सजा सुनाई गई। वे मधुबन थाने पर कब्जा कर अंग्रेजी हुकुमत से मुक्त कराने के लिए अपने साथियों के साथ गए थे। कलेक्टर निबलेट को पकड़ने के लिए क्रांतिकारियों के साथ इनके साथी इतने उत्साहित हुए कि थाने के गेट को तोड़कर उस पर चढ़ाई कर दिए, इस दौरान कलेक्टर निबलेट थाने में ही बैठा और उसने गोली चलवा दी। इसमें कई जवान शहीद हो गए और दर्जनों लोग घायल हो गए। इस संघर्ष में रामविलास पांडेय बाल-बाल बच गए। इनके बगल से गोली गुजरी और इनके साथी भक्ति सिंह को लगी। वह भक्ति सिंह को अपने एक साथी के साथ वहां से लेकर इलाज कराने के लिए घर आ गए लेकिन तब तक वह शहीद हो गए थे। 1946 में यह जेल से छुटे और 1948 में यह डिस्ट्रिक्ट बोर्ड एवं जिला परिषद का सदस्य 18 वर्ष तक रहे। 1962 में यह विधान परिषद के सदस्य चुने गए। 1969 से 1974 तक विधानसभा के सदस्य रहे। इस दौरान सरकार में यह मंत्री भी रहे। 
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