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रहमतों और बरकतों वाला है रमजान का मुबारक महीना:मौलाना हामिद

Sat, 24 Apr 2021 11:07 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Apr 2021 11:07 PM IST
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Ramadan gives the message of brotherhood and humanity
इंदारा। रमजान का मुबारक महीना रहमतों और बरकतों वाला है। यह महीना हमें बुराइयों से दूर रखता है। यह पाक महीना प्यार, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देता है। इस रमजान के पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है।
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इंदारा करीमाबाद निवासी मौलाना हामिद ने बताया कि रोजा सब्र का नाम है। हमें रमजान के पाक महीने में एक-दूसरे के साथ मुहब्बत का पैगाम देकर इंसानियत मजबूत करनी चाहिए। रोजा रखें, नमाज पढ़ें, इससे ईमान मजबूत होता है। गरीबों को खाना खिलाकर हम दुआएं हासिल करें। रमजान का यही मकसद और पैगाम है कि सब मुहब्बत और भाईचारे के साथ रहें। सिर्फ खाने-पीने का ही परहेज नहीं है, बल्कि गलत बोलने और सुनने पर भी पाबंदी है। ऐसे में रोजा रखकर हम फर्ज अदा करते हैं तो सवाब भी कमाते हैं। अल्लाह और उसके प्यारे नबी हजरत मुहम्मद साहब पर यकीन रखते हुए हमें रोजे रखने चाहिए।
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अदरी निवासी मौलाना अशफाक ने बताया कि रोजा रखने का असल मकसद महज भूख और प्यास बर्दाश्त करना नहीं है बल्कि रोजे की रूह दरअसल नफ्स पर काबू, अल्लाह के तरीके पर अकीदत और सही राह पर चलने के इरादे पर मुस्तैदी से अमल में बसती हैं। हर तरफ झूठ, मक्कारी, अश्लीलता और बदकारी का बोलबाला हो चुका है। ऐसे में इंसानियत की कौम अपनी नफ्स पर काबू पाने का पैगाम देने वाले रोजे का रुतबा और भी बढ़ जाता है। रोजे के दौरान झूठ बोलने, चुगली करने, किसी पर बुरी निगाह डालने एवं हर छोटी से छोटी बुराई से दूर रहना जरूरी है। आमतौर पर साल के ग्यारह महीने तक इंसान दुनियादारी के मसलों फंसा रहता है। लिहाजा अल्लाह ने रमजान का महीना सादगी के साथ इबादत के लिए तय किया है। उन्होंने बताया कि रमजान के मायने संपन्न लोगों को भूख-प्यास का अहसास कराकर पूरी कौम को अल्लाह के करीब लाकर नेक राह पर डालना है। रमजान का महीना सबसे बड़ी आसमानी किताब यानी कुरान शरीफ को दुनिया पर नाजिल किया था। रहमत और बरकत के नजरिये से रमजान के महीने को तीन हिस्सों (असरों) में बांटा गया है। इस महीने के पहले दस दिनों में अल्लाह अपने रोजेदार बंदों पर रहमतों की बारिश करते हैं। दूसरे असरे में अल्लाह रोजेदारों के गुनाह माफ करता है और तीसरा असरा दोजख की आग से निजात पाने की इबादत के लिए तय किया गया है।
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