मऊ। बाल निकेतन रेलवे क्रांसिंग पर ओवर ब्रिज निर्माण के लिए शासन से हरी झंडी मिलने पर सेतू निगम ने सर्वे की शुरु कर दिया। बीते सोमवार से शुरु हुए सर्वे में दूसरे दिन मंगलवार को नगर पालिका, लोनिवि के साथ रेलवे के कांस्ट्रेक्टशन विभाग के अधिकारी शामिल रहें। इस दौरान सेतू निगम के महाप्रबंधक के साथ परियोजना प्रबंधक बलिया, असिस्टेंट इंजीनियर और अवर अभियंता आजमगढ़ मौजूद रहें। नापी के बाद उपरगामी सेतू बनाने का सारा दारोमदार रेलवे पर टिका। अब रेलवे की रिक्वायमेंट के आधार पर ही जमीन का रिक्वायरमेंट होगा। इसके बाद सभी विभागों की संयुक्त रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। बताते चले अमर उजाला की तरफ से बाल निकेतन पर ओवर ब्रिज बनानेे लिए चलाए गए अभियान का परिणाम रहा कि समाज सेवी और किसान नेता देवप्रकाश राय ने कोर्ट में रिट दाखिल किया। इस दौरान कोर्ट के आदेश पर प्रदेश सरकार ने ओवर ब्रिज निर्माण के लिए अप्रैल 2020 में हरी झंडी दी। इसक्रम में ओवर ब्रिज निर्माण का दायित्व सेतु निगम को सौंपा गया। सोमवार को सेतु निगम के महाप्रबंधक सुनील श्रीवास्तव गोरखपुर से चलकर मऊ पहुंचे। इस दौरान आजमगढ़ से असिस्टेंट इंजीनियर बीएमएस कुमार अवर अभियंता पीके उपाध्याय के साथ और परियोजना प्रबंधक बलिया नंद किशोर तिवारी बलिया से चलकर मऊ पहुंचे। सोमवार को सेतू निगम ने सर्वे शुरु किया। इस दौरान लोक निर्माण विभाग के अधीशासी अभियंता जितेंद्र कुमार, रेलवे कांस्ट्रेक्शन प्रकोष्ठ के एके सिंह और नगर पालिका के जेई आदि मौजूद रहें। सोमवार के बाद मंगलवार को भी पूरे दिन रेलवे उपरगामी सेतू के लिए पूरे दिन नापी का कार्य चला। बात करने पर एई सेतुु निगम बीएमएस कुमार ने बताया कि आरओबी निर्माण के लिए रिपोर्ट तैयार करने में रेलवे की भूमिका आवश्यक है, रेलवे गाड़ियों को पास कराने के लिए जितना कम स्थान लेगा, ब्रिज बनाने के लिए उतना कम जमीन अधिग्रहित करनी होगी। रेलवे के एके सिंह ने विभाग के अधिकारियों से बात कर बताने को कहा है। जैसे ही रेलवे अपनी रिपोर्ट देगा, ओवर ब्रिज बनाने के लिए संयुक्त रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। अनुमति मिलने पर जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अभी तक की नापी में लोनिवि कार्यालय का कुछ हिस्सा के साथ बगल में मौजूद मंदिर के साथ अन्य दुकानें प्रभावित हो सकती है।