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Mau News: रेडियोलॉजिस्ट ने दिया इस्तीफा, फिर मेडिको लीगल के लिए आजमगढ़ का लगा रहे चक्कर
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जिला अस्पताल में बीते कई माह से रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती होने से जहां लोगों को उपचार सहित मेडिको लीगल करने में सुविधा मिल रही थी। अब रेडियोलॉजिस्ट के इस्तीफा देने के बाद से एक बार फिर लोगों को मेडिको लीगल के लिए आजमगढ़ का चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों का अल्ट्रासाउंड भी बाधित है। चिकित्सकों की मजबूरी है की अल्ट्रासाउंड निजी सेंटर पर ही करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में दो साल तक रेडियोलाजिस्ट का पद खाली होने के बाद बीते साल 27 मार्च शासन से डा. वीरेंद्र कुमार चौधरी को जिला अस्पताल में तैनात किया गया था। आदेश के करीब चार माह बाद उसी साल जुलाई में डाक्टर ने जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट का पद संभाला था। जिसके बाद से जिला अस्पताल में मरीजों का उपचार कराने में सुविधा के साथ मेडिको लीगल के केस में लोगों को दूसरे जिलों का चक्कर लगाने से भी निजात मिला था। करीब एक साल तक काम करने के बाद इसी साल जून माह में भी डॉ. वीरेंद्र कुमार चौधरी ने 45 दिन का अवकाश लिया था। जिसके बाद बीते छह अगस्त को जिला अस्पताल प्रशासन को इस्तीफे का पत्र लिखा। 31 अगस्त को यह पत्र जिला अस्पताल प्रशासन को मिला था। वही जिला अस्पताल प्रशासन ने पत्र को शासन का भेज दिया है। जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट के इस्तीफा देने के बाद अब एक बार उपचार कराने से लेकर मेडिको लीगल के केस में लोगों का दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
मऊ में लगेगी चोट तो आजमगढ़ लगाएगा रिपोर्ट
जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार मेडिको लीगल के रोजाना करीब 20 से 25 केस आते हैं। अब जिला अस्पताल के रेडियोलाजिस्ट के नहीं होने से अब मऊ से लगने वाली चोट की रिपोर्ट आजमगढ़ द्वारा लगाई जाएगी। ऐसे केस में मेडिको लीगल पुलिस की मौजूदगी में कराया जाता है। जिला में रेडियोलाजिस्ट नहीं होने से चाेटिल को ही पुलिस को निजी वाहन से आजगमढ़ ले जाना पड़ रहा है। ऐसे में चोटिल को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में तैनात रेडियोलाजिस्ट के इस्तीफा देने से उपचार के साथ मेडिको लीगल के केस में लाेगों को परेशानी हो रही हैं। अभी जिले से ऐसे केस को आजमगढ़ के भेजा जा रहा है।-डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में दो साल तक रेडियोलाजिस्ट का पद खाली होने के बाद बीते साल 27 मार्च शासन से डा. वीरेंद्र कुमार चौधरी को जिला अस्पताल में तैनात किया गया था। आदेश के करीब चार माह बाद उसी साल जुलाई में डाक्टर ने जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट का पद संभाला था। जिसके बाद से जिला अस्पताल में मरीजों का उपचार कराने में सुविधा के साथ मेडिको लीगल के केस में लोगों को दूसरे जिलों का चक्कर लगाने से भी निजात मिला था। करीब एक साल तक काम करने के बाद इसी साल जून माह में भी डॉ. वीरेंद्र कुमार चौधरी ने 45 दिन का अवकाश लिया था। जिसके बाद बीते छह अगस्त को जिला अस्पताल प्रशासन को इस्तीफे का पत्र लिखा। 31 अगस्त को यह पत्र जिला अस्पताल प्रशासन को मिला था। वही जिला अस्पताल प्रशासन ने पत्र को शासन का भेज दिया है। जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट के इस्तीफा देने के बाद अब एक बार उपचार कराने से लेकर मेडिको लीगल के केस में लोगों का दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
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मऊ में लगेगी चोट तो आजमगढ़ लगाएगा रिपोर्ट
जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार मेडिको लीगल के रोजाना करीब 20 से 25 केस आते हैं। अब जिला अस्पताल के रेडियोलाजिस्ट के नहीं होने से अब मऊ से लगने वाली चोट की रिपोर्ट आजमगढ़ द्वारा लगाई जाएगी। ऐसे केस में मेडिको लीगल पुलिस की मौजूदगी में कराया जाता है। जिला में रेडियोलाजिस्ट नहीं होने से चाेटिल को ही पुलिस को निजी वाहन से आजगमढ़ ले जाना पड़ रहा है। ऐसे में चोटिल को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल में तैनात रेडियोलाजिस्ट के इस्तीफा देने से उपचार के साथ मेडिको लीगल के केस में लाेगों को परेशानी हो रही हैं। अभी जिले से ऐसे केस को आजमगढ़ के भेजा जा रहा है।-डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस, जिला अस्पताल