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Mau News: शराब बंदी के लिए किया प्रदर्शन
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कलेक्ट्रेट पर ग्रामीण मजदूर यूनियन के बैनर तले अपनी मांगों को लेकर बैठे मजदूर। स्रोत- स्वयं
ग्रामीण मजदूर यूनियन के बैनर तले बृहस्पतिवार को मजदूरों ने धरना प्रदर्शन किया। साथ ही अपने 14 सूत्रीय मुख्यमंत्री को संबोधित मांगों को लेकर ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। धरना प्रदर्शन को इंकलाबी मजदूर केंद्र की स्थानीय इकाई ने भी समर्थन दिया।
बृहस्पतिवार की सुबह से ही जिले भर के ग्रामीण मजदूरों ने कचहरी मोड़ से जुलूस की शक्ल में जिलाधिकारी कार्यालय स्थित धरना स्थल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने धरना प्रदर्शन किया। धरने को संबोधित करते हुए मुन्ना प्रसाद ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में मजदूरों को नियमित काम नहीं मिल रहा है। जब काम मिलता भी है, तो पूरी मजदूरी देने में आनाकानी की जाती है। महिला मजदूरों को पुरुषों की तुलना में कम दिहाड़ी दी जा रही है। सिकंदर ने कहा कि खाने-पीने की चीजों के साथ-साथ पढ़ाई और दवाई का खर्च भस्मासुर की तरह बढ़ रहा है। गांव-गांव खुली शराब की दुकानों से नशाखोरी और सामाजिक अपराध बढ़ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ग्रामीण मजदूरों की न्यूनतम दिहाड़ी प्रतिदिन 800 तय की जाए। महिलाओं को पुरुषों के बराबर मजदूरी दी जाए।
प्राइवेट स्कूलों की फीस और अस्पतालों के इलाज के खर्च की सीमा तय करने के लिए सख्त कानून बने। ग्रामीण क्षेत्रों की सभी शराब दुकानें तुरंत बंद की जाएं सहित अन्य मांगें शामिल रहीं। प्रदर्शन के दौरान चौथी प्रसाद, लागू प्रसाद, राम जन्म, बबलू कुमार, विजय कुमार, दूधनाथ और मुनिम शामिल रहे।
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बृहस्पतिवार की सुबह से ही जिले भर के ग्रामीण मजदूरों ने कचहरी मोड़ से जुलूस की शक्ल में जिलाधिकारी कार्यालय स्थित धरना स्थल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने धरना प्रदर्शन किया। धरने को संबोधित करते हुए मुन्ना प्रसाद ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में मजदूरों को नियमित काम नहीं मिल रहा है। जब काम मिलता भी है, तो पूरी मजदूरी देने में आनाकानी की जाती है। महिला मजदूरों को पुरुषों की तुलना में कम दिहाड़ी दी जा रही है। सिकंदर ने कहा कि खाने-पीने की चीजों के साथ-साथ पढ़ाई और दवाई का खर्च भस्मासुर की तरह बढ़ रहा है। गांव-गांव खुली शराब की दुकानों से नशाखोरी और सामाजिक अपराध बढ़ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ग्रामीण मजदूरों की न्यूनतम दिहाड़ी प्रतिदिन 800 तय की जाए। महिलाओं को पुरुषों के बराबर मजदूरी दी जाए।
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प्राइवेट स्कूलों की फीस और अस्पतालों के इलाज के खर्च की सीमा तय करने के लिए सख्त कानून बने। ग्रामीण क्षेत्रों की सभी शराब दुकानें तुरंत बंद की जाएं सहित अन्य मांगें शामिल रहीं। प्रदर्शन के दौरान चौथी प्रसाद, लागू प्रसाद, राम जन्म, बबलू कुमार, विजय कुमार, दूधनाथ और मुनिम शामिल रहे।
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