{"_id":"6ab96aee1bdfdb0da005a1fc","slug":"prof-rampyares-works-should-be-published-as-a-collected-edition-mau-news-c-295-1-mau1001-152665-2026-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: प्रो. रामप्यारे की रचनाएं ग्रंथावली के रूप में प्रकाशित हों","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: प्रो. रामप्यारे की रचनाएं ग्रंथावली के रूप में प्रकाशित हों
विज्ञापन
डॉ.विनोद तिवारी को स्मृति चिह्न, अंगवस्त्रम और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर प्रो. रामप्यारे तिवारी स
मऊ। पुरानी तहसील स्थित एक निजी आवास पर शनिवार देर शाम साहित्यकार एवं शिक्षाविद् प्रो. रामप्यारे तिवारी की पुण्यतिथि पर स्मृति एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान डीसीएसके पीजी कॉलेज के संस्कृत विभाग के पूर्व आचार्य विनोद तिवारी को ‘प्रो. रामप्यारे तिवारी स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उन्हें स्मृति चिह्न, अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद् रामजी उपाध्याय ने की। मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि प्रो. रामप्यारे तिवारी साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान थे। अध्यापन के साथ उन्होंने काव्य, एकांकी, नाटक और आलोचना के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। उन्होंने करीब 40 शोधार्थियों को पीएचडी भी कराई।
डीसीएसके पीजी कॉलेज के प्राचार्य शर्वेश पांडेय ने कहा कि प्रो. रामप्यारे तिवारी का रचना संसार बेहद विस्तृत है। उनकी सभी रचनाओं को संकलित कर ग्रंथावली के रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए, ताकि उनके साहित्यिक योगदान को संरक्षित किया जा सके।
विज्ञापन
इससे पहले जयनारायण द्विवेदी ने अपने संबोधन में प्रो. तिवारी को सरल और सहज व्यक्तित्व का धनी बताया। सम्मानित विनोद तिवारी ने कहा कि प्रो. रामप्यारे तिवारी के साहित्य में बुद्धि और हृदय का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
काव्य-सत्र में रचनाओं ने बांधा समा
कार्यक्रम के काव्य-सत्र में भोजपुरी के वरिष्ठ कवि कमलेश राय ने किसानों के संघर्ष पर आधारित गजल प्रस्तुत की। बृजेश गिरि, सुमित उपाध्याय और जितेंद्र मिश्र ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं। अनुप्रिया राय मधु ने ‘जड़-चेतन निढाल जब पड़ते, तब-तब राम याद आते हैं’ कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना बटोरी। कार्यक्रम का संचालन कमलेश राय ने किया। इस अवसर पर साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
विज्ञापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद् रामजी उपाध्याय ने की। मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि प्रो. रामप्यारे तिवारी साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान थे। अध्यापन के साथ उन्होंने काव्य, एकांकी, नाटक और आलोचना के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। उन्होंने करीब 40 शोधार्थियों को पीएचडी भी कराई।
विज्ञापन
डीसीएसके पीजी कॉलेज के प्राचार्य शर्वेश पांडेय ने कहा कि प्रो. रामप्यारे तिवारी का रचना संसार बेहद विस्तृत है। उनकी सभी रचनाओं को संकलित कर ग्रंथावली के रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए, ताकि उनके साहित्यिक योगदान को संरक्षित किया जा सके।
विज्ञापन
इससे पहले जयनारायण द्विवेदी ने अपने संबोधन में प्रो. तिवारी को सरल और सहज व्यक्तित्व का धनी बताया। सम्मानित विनोद तिवारी ने कहा कि प्रो. रामप्यारे तिवारी के साहित्य में बुद्धि और हृदय का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
काव्य-सत्र में रचनाओं ने बांधा समा
कार्यक्रम के काव्य-सत्र में भोजपुरी के वरिष्ठ कवि कमलेश राय ने किसानों के संघर्ष पर आधारित गजल प्रस्तुत की। बृजेश गिरि, सुमित उपाध्याय और जितेंद्र मिश्र ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं। अनुप्रिया राय मधु ने ‘जड़-चेतन निढाल जब पड़ते, तब-तब राम याद आते हैं’ कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना बटोरी। कार्यक्रम का संचालन कमलेश राय ने किया। इस अवसर पर साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।