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एक ही जमीन पर कई-बार लगाए जा रहे पौधे

Thu, 08 Jul 2021 10:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jul 2021 10:33 PM IST
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Plants being planted multiple times on the same land
ग्राम पंचायतों में नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों की ओर से पौधरोपण का कार्य कराया जा रहा है। इस क्रम में पिछले साल जिस जमीन पर पौधे लगाए गए थे, इस साल फिर उसी भूमि पर पौधरोपण कराकर खानापूरी की जा रही है। पौधों को लगाने के लिए मनरेगा के तहत मजदूरी का भुगतान ले लिया जा रहा है। वास्तव में धरातल पर सही तरीके से पौधों का रोपण नहीं हो रहा है। एक ही जमीन पर बार बार पौधों का रोपण दिखाकर मजदूरी भुगतान लेकर खेल किया जा रहा है।
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रतनपुरा ब्लाक के गढ़वा ग्राम पंचायत के गाटा संख्या 428 पोखरा का भीटा है इसमें जलनिगम की पानी टंकी है, पंचायत भवन है। इस गाटा का क्षेत्रफल दो एकड़ है। ब्लाक के अभिलेखों के अनुसार पंचायत भवन और स्कूल परिसर में गत 2019- 20 में भी पोधरोपण किया गया था। चार जुलाई 2019 को पोखरे के भीटे पर 1000 पौधे रोपित किए गए थे। वर्ष 2019-20 में मनरेगा के तहत मस्टररोल संख्या 4434 से लेकर 4437 तक के आठ बिलों के सापेक्ष क्रमश: 20384 , 2548, 22932, 2548, 20384, 2548, 2548 और 12740 रुपये सहित कुल 86624 रुपये का भुगतान 26 अक्टूबर 2019 को किया गया था। गांव के शंकर कमलेश, हरेराम और श्याम नारायन का कहना था कि पिछले साल तो पोखरे के भीटे पर पौधे लगाए गए थे। इस बार चार जुलाई 2021 को जनपद के नोडल अफसर के मुुख्य आतिथ्य में पौधरोपण कार्यक्रम हुआ। नोडल अफसर ने स्वयं पौधे लगाए और उनकी उपस्थिति में कई अधिकारी भी पौधे लगाए। इस बाबत प्रभारी डीसी मनरेगा /जिला विकास अधिकारी विजय शंकर राय का कहना है कि भीटे पर पर्याप्त जगह उपलब्ध थी। उस जमीन पर पौधे लगाए गए। उन्होंने कहा कि इस बारे में अधिक जानकारी ब्लाक के एपीओ बताएंगे। उधर रतनपुरा ब्लाक के एपीओ परवेज आलम का कहना है कि पिछले साल उस जमीन पर एक हजार पौधे लगाए गए थे लेकिन अधिकांश पौधे सूख गए इसीलिए इस भमि पर चार जुलाई को पौधे लगाए गए। इस साल पर इस भूमि पर 1300 पौधे लगाए जाने का लक्ष्य है। गांव के लोगों का कहना है कि एक बार जहां पौधरोपण कर दिया गया तो अगली बार किसी अन्य नई जगह पर पौधे लगाए जाने चाहिए जिससे पर्यावरण संवर्धन हो। कई ग्राम पंचायतों में इसी तरह आरोप में खाना पूरी कर धन की बंदरबांट की जा रही है। ये बात कुछ बानगी है। अन्य गांवों में भी ऐसा किया जा रहा है।
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