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घरों और मस्जिदों में एतिकाफ पर बैठे लोग
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मऊ। माहे रमजान का सबसे अहम अशरा बृहस्पतिवार को मगरिब के बाद से शुरु हो गया। इसके साथ ही ऐतकाफ की इबादत भी शुरु हो गई। घरों में लोग मगरिब की नमाज के बाद ऐतिकाफ में बैठे। जबकि कुछ लोग ही मस्जिद में एतिकाफ की नीयत से गए। उधर, रात भर पढ़ी जाने वाली नफिल नमाजों और तिलावतों का दौर भी शुरु हो गया। इस अशरे में इबादत का सवाब एक हजार महीने की इबादत के बराबर मिलता है।
रमजान माह को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नुम से आजादी का अशरा है। इस आखिरी अशरे में ही हजरत मुहम्मद पर कुरान नाजिल की गई थी। इस अशरे में पड़ने वाली पांच रातें शब ए कद्र कही जाती है। रमजान की 21, 23, 25, 27 और 29 तारीख को पड़ने वाली यह रातें खासी अहम होती हैं। मौलाना अनवार अली कहते हैं कि इन्हीं रातों में जागकर अल्लाह की इबादत की जाती है। नमाज, तिलावत, नफिल नमाजों के अलावा शबीना भी एक खास इबादत है। शब ए कद्र की रात में कोई एक रात ऐसी होती है जिसमें रहमतों की बरसात होती है।
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रमजान माह को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नुम से आजादी का अशरा है। इस आखिरी अशरे में ही हजरत मुहम्मद पर कुरान नाजिल की गई थी। इस अशरे में पड़ने वाली पांच रातें शब ए कद्र कही जाती है। रमजान की 21, 23, 25, 27 और 29 तारीख को पड़ने वाली यह रातें खासी अहम होती हैं। मौलाना अनवार अली कहते हैं कि इन्हीं रातों में जागकर अल्लाह की इबादत की जाती है। नमाज, तिलावत, नफिल नमाजों के अलावा शबीना भी एक खास इबादत है। शब ए कद्र की रात में कोई एक रात ऐसी होती है जिसमें रहमतों की बरसात होती है।
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