मऊ। भोजपुरी के वरिष्ठ कवि डॉ. कमलेश राय ने पियर-पियर पात छड़े, नन्हकी-नन्हकी फुनगी अखुंआइल, रंग-बिरंग की फूल कली लखि रूप-अनूप अलि भरमाईल'' छंद पढ़कर बसंत ऋतु का स्वागत किया। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था जिज्ञासा के तत्वावधान में वसंत पंचमी पर भोजपुरी के वरिष्ठ कवि पं. दयाशंकर तिवारी की अध्यक्षता में सहादतपुरा में सोमवार देर शाम काव्य-संध्या का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि प्रो. सर्वेश पांडेय सहित सभी लोगों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। मुख्य अतिथि प्रो. सर्वेश पांडेय ने कहा कि प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य का संपूर्णता में प्रस्फुटन ही बसंत है। पियराए पत्तों का झड़ना और नए-नए ललछौहें पत्तों का आना बसंत के आगमन का संकेत तो है ही, जीवन के शाश्वत दर्शन का भी संकेतक है। जीवन दुःखों का समुच्चय है लेकिन दुःखमय जीवन के निषेध के साथ ही बसंत जीवन के प्रति सकारात्मक भाव प्रदान करता है। विशाल पांडेय ने मां सरस्वती की वंदना से काव्य-पाठ की शुरुआत की। कवि सुमित उपाध्याय ने ''आओ ऋतुराज,ओढ़ मैं आई चुनरी पियरी, आओ किरणों संग आज'' सुनाकर बसंत ऋतु के आगमन की सूचना दी। वरिष्ठ कवि मृत्युजंय तिवारी ने ''फागुन बयार बहे'' पढ़कर वहां उपस्थित लोगों को फगुआ के रंग में रंग दिया। बृजेश गिरि ने ''बरगद का भूत'' कविता सुनाकर गांव की याद दिला दी। लाल बहादुर सिंह ने आज की राजनीति पर चोट करती हुई कविता पढ़ी। अध्यक्षीय काव्य-पाठ करते हुए पं. दयाशंकर तिवारी ने ''आम की डारि पे कोईल, सुनाई सुधा बरसावत फागुन'' कविता सुनाई। गोष्ठी का संचालन डॉ. कमलेश राय ने किया। इस दौरान डॉ. रामनिवास राय, आनंद प्रताप सिंह, समीर, गौरव राय, सात्विक राय आदि उपस्थित रहे।