मऊ। मनरेगा से मिलने वाले बजट के भरोसे ग्राम पंचायतों में बीते वित्तीय वर्ष में कई पक्के काम हुए, लेकिन भुगतान नहीं हो पाया। इस वित्तीय वर्ष में मिले बजट से सिर्फ मजदूरी ही दी जा सकी है। निर्माण सामग्री का लगभग 35 करोड़ रुपये बकाया है। बिल्डरों ने गिट्टी, बालू, सिमेंट और सरिया देने से मना कर दिया है, जिससे प्रधान दूसरे नए काम नहीं करा पा रहे हैं। वहीं विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस साल पूरे बकाये की सिर्फ 40 फीसदी धनराशि ही मिलेगी। ऐसे में अगले साल ग्राम पंचायत चुनाव होने हैं अब जो नया प्रधान बनेगा ये राशि उसके खाते में आएगी।
मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) से आमतौर पर सड़क निर्माण, तालाब खोदाई सहित कई पक्के काम शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में मनरेगा के तहत 70 अन्नपूर्णा भवन, हाट बाजार, खेल मैदान, नाली, खड़ंजा, आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण और स्कूलों की चहारदीवारी बनवाई गई। अब तक 300 अमृत सरोवर बनाए गए हैं। शासन स्तर से पक्के कार्यों में खर्च बजट का एक साल का दूसरे साल और दूसरे साल का तीसरे में भुगतान होता है। जिसके चलते नए काम शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इससे न केवल मजदूरों को नुकसान हो रहा है, बल्कि बीते आठ माह से जनपद की 645 ग्राम पंचायतों में विकास रुक गया है। जिले में मनरेगा के 1.86 लाख कार्डधारक सक्रिय हैं। 26 नवंबर से 25 हजार मजदूरों का 15 करोड़ रुपये भुगतान रुका था। इस वित्तीय वर्ष में बजट मिलते ही इनके साथ और मजदूरों का जून तक का भुगतान हो चुका है।