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पुनर्वास केंद्र में सिर्फ एक बच्चा भर्ती

Fri, 11 Jun 2021 10:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jun 2021 10:30 PM IST
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Only one child admitted to the rehabilitation center
कोरोना की दूसरी लहर में पोषण मुक्त अभियान भी प्रभावित हुआ है। जिले में दो हजार से अधिक अति कुपोषित बच्चे हैं। इन बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के 18 आरबीएसके टीमों तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के दो हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की है। इन्हें कोरोना से बचाव कार्य की जिम्मेदारी दिए जाने के कारण यह कार्य प्रभावित हो रहा है। पांच माह में कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए बने दस बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में सिर्फ नौ बच्चों का उपचार हुआ है। इस माह में सिर्फ एक बच्चे का उपचार चल रहा है।
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बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में पंजीकृत आंकड़ों की मानें तो जिले के चार तहसीलों में 4553 बच्चे अतिकुपोषित हैं। कुपोषण दूर करने के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गई है। इस केंद्र में दस बच्चों को भर्ती करने की सुविधा है। बालरोग विशेषज्ञ की तैनाती तथा 24 घंटे मानीटरिंग के लिए दस से ज्यादा स्टाफ की तैनाती है। इस माह में जब कोरोना संक्रमण का ग्राफ बेहद कम हो चुका है, यह वार्ड पूूूरा खाली है। बाल विकास पुष्टाहार से जुड़े इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग को जोड़ा गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अलावा स्वास्थ्य विभाग की आरबीएसके टीम जिसमें डॉक्टर भी शामिल होते हैं। उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने अपने क्षेत्र में भ्रमण कर अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र भेजें। केंद्र के आंकड़े पर गौर करें तो बीते जनवरी माह से अब तक केवल दस बच्चे ही भर्ती हुए हैं। जिले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या हजारों में है। वर्तमान में एक डेढ़ वर्ष का बच्चा अपनी मां के साथ भर्ती है। मई में एक भी नहीं, अप्रैल में दो, मार्च में पांच, फरवरी में एक भी नहीं और जनवरी में चार बच्चे केंद्र में भर्ती हुए थे। इसमें 50 फीसदी कुपोषित बच्चों के परिजन खुद जागरूक होकर केंद्र में लेकर पहुंचे थे।
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इनसेट
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में आरबीएसके टीमों को आरआरटी टीमों में लगाया गया है। जल्द ही टीमें अपने कार्य क्षेत्र में पहले की तरह कार्य करते हुए कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराएंगी।-डॉ. सतीशचंद्र सिंह, सीएमओ
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कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने का कार्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का है लेकिन उन्हें भर्ती कराने की जिम्मेदारी की आरबीएसके के जिम्मे है।-दुर्गेश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग
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