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वाहन प्रदूषण जांच की महज खानापूर्ति

Sun, 15 Jul 2018 12:20 AM IST
mau
mau Updated Sun, 15 Jul 2018 12:20 AM IST
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Only Khanapuri of vehicle pollution investigation
pollution check - फोटो : अमर उजाला
जिले में परिवहन विभाग के पास वाहनों के प्रदूषण की माप करने वाला यंत्र चार सालों से खराब पड़ा है। वाहनों की जांच करने के लिए जिम्मेदार अफसर आरआई का पद दो सालों से रिक्त पड़ा है। ऐसे में वाहनों के प्रदूषण जांच की जांच महज खानापूर्ति हो रही। इस काम के लिए परिवहन विभाग की ओर से नामित दो एजेंसियां कभी भी सड़कों पर वाहन प्रदूषण की जांच करते नहीं दिखतीं। सैकड़ों वाहन ऐसे     हैं जो धुआं उगलते सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
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जिले में पंजीकृत दो, तीन और चार पहिया वाहनों की संख्या तीन लाख 32 हजार 432 है। काफी संख्या में ऐसे वाहन भी हैं जो दिल्ली, बिहार, एमपी और अन्य प्रदेशों में पंजीकृत हैं। अधिकांश वाहन ऐसे भी हैं जिनकी वैधता तिथि समाप्त हो गई है और यह सड़कों पर दौड़ रहे। शहरों और कसबों में बहुत से वाहन दिख जाते हैं जो भारी मात्रा में धुंआ फेंकते हुए चल रहे होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले कई पब्लिक स्कूलों में ऐसे ही वाहन चलाए जातें हैं जिनकी वैधता तिथि समाप्त हो गई होती है। इनके निकलने वाले धुएं बच्चों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहे। संज्ञान में होने के बाद भी अफसर लापरवाह बने हैं। हद तो यह है कि इन एजेंसियों से वाहनों की जांच के नाम पर पैसा देकर प्रमाणपत्र हासिल किया जा रहा। 80 से 150 रुपये वसूलने की बजाया चार से पांच सौ रुपए वसूले जा रहे हैैं।
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वाहनों के प्रदूषण की माप करने के लिए प्रदेश स्तर से एजेंसियों को लाइसेंस दिए जाते हैं। ये एजेंसियां प्राय: नवंबर और दिसंबर महीनों में ही रोड पर कुछ दिनों तक वाहनों की जांच करते हुए दिख जाती हैं। इसके अलावा इन्हें कभी भी रोड पर वाहनों के प्रदूषण मापते नहीं देखा जाता है। आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद मूूूर्ति कहते हैं कि वाहन प्रदूषण मापक यंत्र का प्रयोग करते डेढ़ सालों से उन्होंने कभी नहीं देखा है। इनको लाइसेंस देकर विभाग केवल खानापूरी कर रहा। वरिष्ठ फिजीशियन डा.योगेंद्र यादव कहते हैं कि वाहनों से निकलने वाला धुंआ बच्चों से लेकर बड़ों तक के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालता है।
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