{"_id":"69b5b74fdf12fc270903406b","slug":"of-the-150-hotels-and-restaurants-in-the-district-40-are-on-the-verge-of-closure-with-three-days-worth-of-stock-remaining-and-street-vendors-are-shrinking-mau-news-c-295-1-mau1025-142264-2026-03-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: जिले में 150 होटल और रेस्टोरेंट, 40 फीसदी बंद होने के कगार पर, तीन दिन का बचा स्टॉक, सिमटने लगी ठेले की दुकान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: जिले में 150 होटल और रेस्टोरेंट, 40 फीसदी बंद होने के कगार पर, तीन दिन का बचा स्टॉक, सिमटने लगी ठेले की दुकान
विज्ञापन
गैस सिलिंडर की किल्ल्त के बीच नगर के निजामुद्दीनपुरा में रिक्शा ट्राली से गोइठा लेकर जाते लोग।स
व्यावसायिक गैस सिलिंडर की आपूर्ति थमने से जनपद में खानपान से जुड़े 40 फीसदी होटल रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के पास अभी मात्र तीन दिन का व्यावसायिक सिलिंडर बचा हुआ है, आने वाले तीन दिनों में सिलिंडर नहीं मिलने पर बंद हो जाएगें।
हालांकि कुछ होटल और रेस्टोरेंट संचालक के पास गैस पाइप लाइन से आती है, उनको अभी आपूर्ति हो रही है। पहले की तुलना में यूनिट में कटौती कर दी गई है। पहले जहां 15 यूनिट गैस मिलती थी, वहां अब महज दस यूनिट कर दिया गया है।
वही परिवार के भरण पोषण के लिए ठेले पर खानपान की दुकान चलाने वाले सिलिंडर के विकल्प में कोई कोयला की चूल्हा जला रहा है तो कोई कंडी की तलाश में जुट गया है।
विज्ञापन
नगर के फातिमा तिराहे के पास पटरी दुकानदार बृजेश राजभर ने बताया कि उसकी डोसा की दुकान है, सिलिंडर नहीं मिलने से पांच किलो का सिलिंडर 180 रुपये प्रतिकिलो भराकर काम चल रहा है। अब उसकी भी किल्लत हो गई है।
रविवार से दुकान बंद हो जाएगी। छोला भटूरा की दुकान चलाने वाले हरिनिवास ने बताया कि अभी तक छोटे सिलिंडर से काम चल रहा था। अब नहीं मिल रहा है। दोनों ने बताया कि कोयले का चूल्हा बनाकर दुकान चलाया जाएगा।
अनुमान के अनुसार शहर की करीब एक लाख की आबादी पर इसका सीधा असर पड़ेगा। वहीं होटल और रेस्टोरेंट मैरेज हाल एशोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजा आनंद ज्योति ने बताया कि अमेरिका-इस्रायल और ईरान के बीच जारी जंग से सिलिंडर की आपूर्ति बाधित हो गई है।
व्यावसायिक की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने के बाद से हालत और भी बदतर हो गए है। बताया कि जनपद में करीब 150 होटल और रेस्टोरेंट का संचालन हो रहा है। अधिकतर के पास कर्मशियल सिलिंडर है, जिनके पास कुछ दिनों का स्टाक था, वही खुले है।
अब मात्र तीन दिन का स्टाक बचा हुआ है। संचालक दूसरे विकल्प से होटल और रेस्टोरेंट चल रहे हैं। हमेशा गुलजार रहने वाला चौक शांत नजर आया। खानपान की रेहड़ी-पटरी वाली दुकानें भी बंद नजर आईं।
नगर के सहादतपुरा स्थित रेस्टोरेंट संचालक अकबर ने बताया कि व्यावसायिक गैस सिलिंडर नहीं मिलने से बहुत परेशानी हो रही है। बताया कि पहले के आर्डर को मैनेज करने के लिए किसी तरह बंदोस्त कर आर्डर की सप्लाई किया। बताया कि इंडक्शन के सहारे अभी रेस्टोरेंट का संचालन हो रहा है। आने वाले दिनों में बिजली का संकट होने पर कोयले का चूल्हा बनाया जाएगा।
घरेलू सिलिंडर के लिए मारामारी
बाजार में कुछ-कुछ दुकानदार घरेलू गैस सिलिंडर से काम चलाते नजर आए। दूसरी ओर, भविष्य की चिंता में घरेलू गैस सिलिंडर के लिए मारामारी बढ़ गई है। एजेंसियों के बुकिंग नंबर अब काम नहीं कर रहे है। गोदाम पर लोगों की भीड़ पहुंच रही है, जिससे उनको एक सिलिंडर मिल जाए। शनिवार को भी जनपद को अनेक एजेंसी पर लोग लाइन लगाकर खड़े थे।
दुकानदार परेशान, कोयले के चूल्हे पर बना रहे मिठाई
मझवारा क्षेत्र में रसोई गैस की आपूर्ति बाधित होने से मिष्ठान दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मझवारा के मिष्ठान दुकानदार घूरा मद्धेशिया ने बताया कि गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में कोयले का चूल्हा बनाकर मिठाई, समोसा और अन्य खाद्य सामग्री तैयार करनी पड़ रही है। बताया कि गैस न मिलने से दुकान चलाना मुश्किल हो गया है। बताया कि कोयले के चूल्हे पर काम करना काफी मेहनत भरा होता है और धुआं भी अधिक निकलता है, जिससे काम करने में दिक्कत होती है। संवाद
विज्ञापन
हालांकि कुछ होटल और रेस्टोरेंट संचालक के पास गैस पाइप लाइन से आती है, उनको अभी आपूर्ति हो रही है। पहले की तुलना में यूनिट में कटौती कर दी गई है। पहले जहां 15 यूनिट गैस मिलती थी, वहां अब महज दस यूनिट कर दिया गया है।
विज्ञापन
वही परिवार के भरण पोषण के लिए ठेले पर खानपान की दुकान चलाने वाले सिलिंडर के विकल्प में कोई कोयला की चूल्हा जला रहा है तो कोई कंडी की तलाश में जुट गया है।
विज्ञापन
नगर के फातिमा तिराहे के पास पटरी दुकानदार बृजेश राजभर ने बताया कि उसकी डोसा की दुकान है, सिलिंडर नहीं मिलने से पांच किलो का सिलिंडर 180 रुपये प्रतिकिलो भराकर काम चल रहा है। अब उसकी भी किल्लत हो गई है।
रविवार से दुकान बंद हो जाएगी। छोला भटूरा की दुकान चलाने वाले हरिनिवास ने बताया कि अभी तक छोटे सिलिंडर से काम चल रहा था। अब नहीं मिल रहा है। दोनों ने बताया कि कोयले का चूल्हा बनाकर दुकान चलाया जाएगा।
अनुमान के अनुसार शहर की करीब एक लाख की आबादी पर इसका सीधा असर पड़ेगा। वहीं होटल और रेस्टोरेंट मैरेज हाल एशोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजा आनंद ज्योति ने बताया कि अमेरिका-इस्रायल और ईरान के बीच जारी जंग से सिलिंडर की आपूर्ति बाधित हो गई है।
व्यावसायिक की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने के बाद से हालत और भी बदतर हो गए है। बताया कि जनपद में करीब 150 होटल और रेस्टोरेंट का संचालन हो रहा है। अधिकतर के पास कर्मशियल सिलिंडर है, जिनके पास कुछ दिनों का स्टाक था, वही खुले है।
अब मात्र तीन दिन का स्टाक बचा हुआ है। संचालक दूसरे विकल्प से होटल और रेस्टोरेंट चल रहे हैं। हमेशा गुलजार रहने वाला चौक शांत नजर आया। खानपान की रेहड़ी-पटरी वाली दुकानें भी बंद नजर आईं।
नगर के सहादतपुरा स्थित रेस्टोरेंट संचालक अकबर ने बताया कि व्यावसायिक गैस सिलिंडर नहीं मिलने से बहुत परेशानी हो रही है। बताया कि पहले के आर्डर को मैनेज करने के लिए किसी तरह बंदोस्त कर आर्डर की सप्लाई किया। बताया कि इंडक्शन के सहारे अभी रेस्टोरेंट का संचालन हो रहा है। आने वाले दिनों में बिजली का संकट होने पर कोयले का चूल्हा बनाया जाएगा।
घरेलू सिलिंडर के लिए मारामारी
बाजार में कुछ-कुछ दुकानदार घरेलू गैस सिलिंडर से काम चलाते नजर आए। दूसरी ओर, भविष्य की चिंता में घरेलू गैस सिलिंडर के लिए मारामारी बढ़ गई है। एजेंसियों के बुकिंग नंबर अब काम नहीं कर रहे है। गोदाम पर लोगों की भीड़ पहुंच रही है, जिससे उनको एक सिलिंडर मिल जाए। शनिवार को भी जनपद को अनेक एजेंसी पर लोग लाइन लगाकर खड़े थे।
दुकानदार परेशान, कोयले के चूल्हे पर बना रहे मिठाई
मझवारा क्षेत्र में रसोई गैस की आपूर्ति बाधित होने से मिष्ठान दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मझवारा के मिष्ठान दुकानदार घूरा मद्धेशिया ने बताया कि गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में कोयले का चूल्हा बनाकर मिठाई, समोसा और अन्य खाद्य सामग्री तैयार करनी पड़ रही है। बताया कि गैस न मिलने से दुकान चलाना मुश्किल हो गया है। बताया कि कोयले के चूल्हे पर काम करना काफी मेहनत भरा होता है और धुआं भी अधिक निकलता है, जिससे काम करने में दिक्कत होती है। संवाद