{"_id":"6a1b334d9e8ae439350ac3e8","slug":"not-a-single-dilapidated-building-was-demolished-in-five-years-this-year-58-more-were-added-many-government-offices-were-not-even-counted-mau-news-c-295-1-svns1028-146280-2026-05-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: पांच साल में एक भी जर्जर भवन नहीं गिराए, इस साल 58 और बढ़ गए, कई सरकारी दफ्तरों को गिना ही नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: पांच साल में एक भी जर्जर भवन नहीं गिराए, इस साल 58 और बढ़ गए, कई सरकारी दफ्तरों को गिना ही नहीं
विज्ञापन
नगर के सहादतपुरा स्थित जर्जर अलीबिल्डिंग मार्केट।संवाद
नगर पालिका क्षेत्र के 45 वार्डों में 149 भवनों को नगर पालिका ने जर्जर भवन के रूप में चिह्नित किया है। 2025 में यह संख्या 91 थी। पिछले पांच साल में एक भी जर्जर भवन गिराए नहीं गए हैं। कार्रवाई केवल नोटिस देने तक सिमटी है।
दूसरी ओर, नगर में संचालित कई जर्जर सरकारी भवनों को नगर पालिका के जिम्मेदार सूची में शामिल करना भूल गए हैं। बीते कई वर्षों से पुराने भवनों को हर बार जर्जर भवनों की श्रेणी में शामिल किया जाता रहा है।
लगभग 60 प्रतिशत जर्जर भवन शहर की संकरी गलियों में स्थित हैं। इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। कई गलियां ऐसी हैं, जहां एक साथ दो बाइक तक नहीं निकल सकतीं। इन गलियों में दशकों पुराने जर्जर मकानों में आज भी लोग रह रहे हैं।
विज्ञापन
नगर पालिका के अनुसार, चिह्नित 149 भवन भीटी, कतुआपुरा, नियाजमुहम्मदपुरा, औरंगाबाद, मुंशीपुरा, रहजनिया, कासिमपुरा, देवपहलवा, सहादतपुरा, डोमनपुरा, निजामुद्दीनपुरा व अन्य क्षेत्रों में स्थित हैं। जबकि बीते वर्ष जर्जर भवनों की संख्या 91 थी।
वर्ष 2024 में 71, वर्ष 2023 में 70 और वर्ष 2022 में 66 भवन चिह्नित किए गए थे।
उधर, मुहम्मदाबाद गोहना, वलीदपुर, कोपागंज, अमिला, अदरी, घोसी, दोहरीघाट और चिरैयाकोट निकायों में इस वर्ष सर्वे कार्य नहीं किया गया। निकायों की लापरवाही बरसात के दौरान लोगों के जान-माल के लिए खतरा बन सकती है।
सरकारी भवन सर्वे से बाहर, बड़े जर्जर भवनों पर कार्रवाई नोटिस तक सीमित
नगर के बाल निकेतन तिराहा स्थित महिला जिला अस्पताल के सामने बने टीकाकरण कक्ष के अलावा एक अन्य कक्ष में एंबुलेंसकर्मी भी रहते हैं। दशकों पुराने इस भवन को आज तक जर्जर भवनों की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। वहीं नगर के आजमगढ़ मोड़ स्थित अली बिल्डिंग, जिसमें 300 से अधिक दुकानें संचालित हैं, को बीते कई वर्षों से जर्जर भवन के रूप में चिह्नित कर नोटिस भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा हरीकेशपुरा और बंधा रोड स्थित जर्जर भवनों को भी पिछले पांच वर्षों से केवल नोटिस दिए जा रहे हैं। ये ऐसे भवन हैं जो हर वर्ष नगर पालिका की जर्जर भवनों की सूची में शामिल होते हैं, लेकिन इनके संबंध में न तो मरम्मत कराई जाती है और न ही कोई ठोस कार्रवाई होती है। नगर पालिका क्षेत्र में जर्जर भवनों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। वर्ष 2019 में 49 मकानों को जर्जर घोषित किया गया था, जबकि वर्ष 2020 में यह संख्या बढ़कर 61 हो गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दबाव और मिलीभगत के कारण जर्जर भवनों को चिह्नित करने में भेदभाव किया जाता है। सर्वे पारदर्शिता से हो तो संख्या बढ़ सकती है।
वर्जन-- -
जर्जर भवनों को चिह्निन किया जा रहा है, करवाई के लिए नोटिस जारी किया जाता है। -दिनेश कुमार, ईओ मऊ नगर पालिका
विज्ञापन
दूसरी ओर, नगर में संचालित कई जर्जर सरकारी भवनों को नगर पालिका के जिम्मेदार सूची में शामिल करना भूल गए हैं। बीते कई वर्षों से पुराने भवनों को हर बार जर्जर भवनों की श्रेणी में शामिल किया जाता रहा है।
विज्ञापन
लगभग 60 प्रतिशत जर्जर भवन शहर की संकरी गलियों में स्थित हैं। इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। कई गलियां ऐसी हैं, जहां एक साथ दो बाइक तक नहीं निकल सकतीं। इन गलियों में दशकों पुराने जर्जर मकानों में आज भी लोग रह रहे हैं।
विज्ञापन
नगर पालिका के अनुसार, चिह्नित 149 भवन भीटी, कतुआपुरा, नियाजमुहम्मदपुरा, औरंगाबाद, मुंशीपुरा, रहजनिया, कासिमपुरा, देवपहलवा, सहादतपुरा, डोमनपुरा, निजामुद्दीनपुरा व अन्य क्षेत्रों में स्थित हैं। जबकि बीते वर्ष जर्जर भवनों की संख्या 91 थी।
वर्ष 2024 में 71, वर्ष 2023 में 70 और वर्ष 2022 में 66 भवन चिह्नित किए गए थे।
उधर, मुहम्मदाबाद गोहना, वलीदपुर, कोपागंज, अमिला, अदरी, घोसी, दोहरीघाट और चिरैयाकोट निकायों में इस वर्ष सर्वे कार्य नहीं किया गया। निकायों की लापरवाही बरसात के दौरान लोगों के जान-माल के लिए खतरा बन सकती है।
सरकारी भवन सर्वे से बाहर, बड़े जर्जर भवनों पर कार्रवाई नोटिस तक सीमित
नगर के बाल निकेतन तिराहा स्थित महिला जिला अस्पताल के सामने बने टीकाकरण कक्ष के अलावा एक अन्य कक्ष में एंबुलेंसकर्मी भी रहते हैं। दशकों पुराने इस भवन को आज तक जर्जर भवनों की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। वहीं नगर के आजमगढ़ मोड़ स्थित अली बिल्डिंग, जिसमें 300 से अधिक दुकानें संचालित हैं, को बीते कई वर्षों से जर्जर भवन के रूप में चिह्नित कर नोटिस भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा हरीकेशपुरा और बंधा रोड स्थित जर्जर भवनों को भी पिछले पांच वर्षों से केवल नोटिस दिए जा रहे हैं। ये ऐसे भवन हैं जो हर वर्ष नगर पालिका की जर्जर भवनों की सूची में शामिल होते हैं, लेकिन इनके संबंध में न तो मरम्मत कराई जाती है और न ही कोई ठोस कार्रवाई होती है। नगर पालिका क्षेत्र में जर्जर भवनों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। वर्ष 2019 में 49 मकानों को जर्जर घोषित किया गया था, जबकि वर्ष 2020 में यह संख्या बढ़कर 61 हो गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दबाव और मिलीभगत के कारण जर्जर भवनों को चिह्नित करने में भेदभाव किया जाता है। सर्वे पारदर्शिता से हो तो संख्या बढ़ सकती है।
वर्जन
जर्जर भवनों को चिह्निन किया जा रहा है, करवाई के लिए नोटिस जारी किया जाता है। -दिनेश कुमार, ईओ मऊ नगर पालिका

नगर के सहादतपुरा स्थित जर्जर अलीबिल्डिंग मार्केट।संवाद

नगर के सहादतपुरा स्थित जर्जर अलीबिल्डिंग मार्केट।संवाद