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Mau News: रेडियोलॉजिस्ट नहीं, 15 दिनों में 855 लोगों ने आजमगढ़ में मेडिकोलीगल कराया
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रेरेडियोलाजिस्ट के इस्तीफा देने के बाद जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में बंद कक्ष।संवाद
मऊ। जिला अस्पताल में 15 दिनों से रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से हर दिन 25 से 30 लोगों को मेडिकोलीगल कराने के लिए आजमगढ़ भेजा जा रहा है। 15 दिनों में 855 लोगों ने आजमगढ़ में मेडिकोलीगल कराया। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से सामान्य मरीजों का अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो पा रहा है। हर दिन 70 से 80 मरीजों को निजी पैथोलॉजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में जहां अल्ट्रासाउंड निशुल्क होती है, वहीं निजी केंद्रों पर 600 से 700 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। पंजीकृत पैथोलॉजी केंद्र तो ठीक हैं, अपंजीकृत निजी केंद्रों से रिपोर्ट भी विश्वसनीय नहीं मिलती है।
बीते कई महीने बाद रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती हुई थी। लेकिन उसने भी पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए गत एक सितंबर को इस्तीफा दे दिया। इसके कारण एक बार फिर लोगों को मेडिको लीगल के लिए आजमगढ़ का चक्कर लगाना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि बीते 15 दिन में 855 लोगों को मेडिकोलीगल के आजमगढ़ भेजा गया।
बताते चलें कि जिला अस्पताल में एक साल तक रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली था। 27 मार्च 2023 से डॉ. वीरेंद्र कुमार चौधरी को जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट तैनात किया गया था। आदेश के करीब चार माह बाद उसी साल 12 जुलाई में डॉक्टर ने जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद संभाला था। इसके बाद से जिला अस्पताल में मरीजों का उपचार कराने में सुविधा के साथ मेडिको लीगल के केस में लोगों को दूसरे जिलों के चक्कर लगाने से भी छुट्टी मिली थी। एक सितंबर से रेडियोलॉजिस्ट ने परिवारिक वजह से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद यहां जांच सेवाएं एक बार फिर से बाधित हो गई। 15 दिन से अल्ट्रासाउंड की जांच एकदम से ठप है। वहीं सबसे ज्यादा परेशानी मेडिकोलीगल के मरीजों को हो रही है। गौरतलब है कि जिला अस्पताल में ही जिले के 12 थाना क्षेत्रों से मारपीट और सड़क हादसे या दूसरे अपराध से जुड़े मामलों के मरीजों का मेडिकोलीगल रेडियोलॉजिस्ट ही करता है। लेकिन अब जब रेडियोलॉजिस्ट ने नौकरी छोड़ दी है तो यह जांच अब 45 किमी दूर आजमगढ़ जिला अस्पताल में हो रहा है। इससे रोजाना 80 मरीजों का अल्ट्रासाउंड तो 25-30 मरीजों का मेडिकोलीगल जांच प्रभावित हो रहा है। इस बाबत सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि शासन को इस संबंध में पत्र लिखकर रेडियोलॉजिस्ट की मांग से अवगत कराया जा चुका है। साथ ही वर्तमान में जांच प्रभावित न हो उसके लिए मेडिकोलीगल के मरीजों को आजमगढ़ भेजा जा रहा है।
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एक साल के बाद 27 मार्च 2023 को हुई थी नियुक्ति रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एनके सिंह ने अप्रैल 2022 में इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जुलाई 2023 तक जिला अस्पताल बिना रेडियोलॉजिस्ट के चलता रहा। मेडिकोलीगल के मरीजों को आजमगढ़ में जांच कराने जाना पड़ रहा था। 27 मार्च 2023 को डॉ. वीरेंद्र कुमार चौधरी ने जॉइन किया था। लेकिन यह भी 45 दिन बाद चार्ज संभाले थे।
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बीते कई महीने बाद रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती हुई थी। लेकिन उसने भी पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए गत एक सितंबर को इस्तीफा दे दिया। इसके कारण एक बार फिर लोगों को मेडिको लीगल के लिए आजमगढ़ का चक्कर लगाना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि बीते 15 दिन में 855 लोगों को मेडिकोलीगल के आजमगढ़ भेजा गया।
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बताते चलें कि जिला अस्पताल में एक साल तक रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली था। 27 मार्च 2023 से डॉ. वीरेंद्र कुमार चौधरी को जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट तैनात किया गया था। आदेश के करीब चार माह बाद उसी साल 12 जुलाई में डॉक्टर ने जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद संभाला था। इसके बाद से जिला अस्पताल में मरीजों का उपचार कराने में सुविधा के साथ मेडिको लीगल के केस में लोगों को दूसरे जिलों के चक्कर लगाने से भी छुट्टी मिली थी। एक सितंबर से रेडियोलॉजिस्ट ने परिवारिक वजह से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद यहां जांच सेवाएं एक बार फिर से बाधित हो गई। 15 दिन से अल्ट्रासाउंड की जांच एकदम से ठप है। वहीं सबसे ज्यादा परेशानी मेडिकोलीगल के मरीजों को हो रही है। गौरतलब है कि जिला अस्पताल में ही जिले के 12 थाना क्षेत्रों से मारपीट और सड़क हादसे या दूसरे अपराध से जुड़े मामलों के मरीजों का मेडिकोलीगल रेडियोलॉजिस्ट ही करता है। लेकिन अब जब रेडियोलॉजिस्ट ने नौकरी छोड़ दी है तो यह जांच अब 45 किमी दूर आजमगढ़ जिला अस्पताल में हो रहा है। इससे रोजाना 80 मरीजों का अल्ट्रासाउंड तो 25-30 मरीजों का मेडिकोलीगल जांच प्रभावित हो रहा है। इस बाबत सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि शासन को इस संबंध में पत्र लिखकर रेडियोलॉजिस्ट की मांग से अवगत कराया जा चुका है। साथ ही वर्तमान में जांच प्रभावित न हो उसके लिए मेडिकोलीगल के मरीजों को आजमगढ़ भेजा जा रहा है।
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एक साल के बाद 27 मार्च 2023 को हुई थी नियुक्ति रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एनके सिंह ने अप्रैल 2022 में इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जुलाई 2023 तक जिला अस्पताल बिना रेडियोलॉजिस्ट के चलता रहा। मेडिकोलीगल के मरीजों को आजमगढ़ में जांच कराने जाना पड़ रहा था। 27 मार्च 2023 को डॉ. वीरेंद्र कुमार चौधरी ने जॉइन किया था। लेकिन यह भी 45 दिन बाद चार्ज संभाले थे।