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नाम का स्पोर्ट्स स्टेडियम, खेल सुविधाओं का है अभाव
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मऊ। विधानसभा का कार्यकाल बीत गया, लेकिन नगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में आधुनिक खेल सुविधाएं बहाल नहीं हो सकीं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में बने दो मिनी स्टेडियम भी बदहाल पड़े हैं। खिलाड़ियों की मांग के अनुरूप खेल सुविधाएं न होने से खिलाड़ी राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहे। इसके बावजूद जिले की प्रतिभाओं ने सीमित संसाधनों के बाद भी अपना बेहतर देकर जिले को गौरवांवित किया है।
खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए शासन की तरफ से जिला मुख्यालय स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम की स्थापना की गई। लेकिन स्थापना होने के दशकों बाद भी खिलाड़ियों के अपेक्षा के अनुरुप स्टेडियम में आधुनिक सुविधाएं बहाल नहीं हो सकी है। स्टेडियम में एथलेटिक्स के लिए सिंथेटिक ट्रैक तथा हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान तक नहीं है। यही नहीं जिम्नेजियम हाल न होने से जिम्नास्टिक खिलाड़ियों की प्रतिभा में निखार नहीं आ रहा है। यही हाल कबड्डी, वालीबॉल, क्रिकेट सहित विभिन्न खेलों का है।
सीमित संसाधनों के बाद भी जिले के खिलाड़ियों ने अपनी कड़ी मेहनत से राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जगह बनाने में सफलता हासिल किया है। अभी हाल ही में कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के खुखुंदवा निवासी तथा किसान परिवार की बेटी अर्चना भारद्वाज ने महिला हॉकी के सीनियर टीम में चयन हुआ है। अर्चना बंगलुरु में एक माह का प्रशिक्षण ले रही है। यही हाल रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के फत्तेपुर तथा सरसेना स्थित मिनी स्टेडियम का हाल है।
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खिलाड़ियों को है कोच की दरकार
मऊ। नगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में कई खेलों के कोच के पद रिक्त चल रहे हैं। देश में सबसे लोकप्रिय बना क्रिकेट खेल का कोच भी स्टेडियम में नहीं है। इसके अलावा जिम्नास्टिक, एथलेटिक्स, वालीबाल में भी नहीं है। इसके चलते खेलों के प्रतिभावान खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है।
स्टेडियम में बहाल हो आधुनिक खेल सुविधाएं
मऊ। नगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में हाकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान नहीं है। अन्य खेलों में कोच न होने से खिलाड़ी प्रतियोगिता में पिछड़ जा रहे हैं। इस संबंध में भुजौटी के हॉकी खिलाड़ी रोहित कुमार का कहना था कि यहां घास के मैदान पर अभ्यास करने के चलते राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। भुजौटी के ही खिलाड़ी विवेक यादव का कहना था कि यहां आधुनिक संसाधनों का अभाव है। एस्टोटर्फ न होने से प्रदर्शन प्रभावित होता है। खिलाड़ी पंकज यादव का कहना था कि ग्राउंड की सफाई व्यवस्था बेहतर न होने से प्रैक्टिस में असुविधा होती है। खिलाड़ी रक्षिता राज का कहना है कि हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान, जिम्नेजियम हाल न होने से राष्ट्रीय स्तर की तैयारी नहीं हो पाती है। स्टेडियम में संसाधनों का अभाव है। कोच का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। शिकायत के बाद भी सुविधा को बहाल नहीं किया जा सका है।
इस मामले में उपजिला क्रिड़ा अधिकारी मुकेश सब्बरवाल ने बताया कि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास जारी है। स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ, जिम्नेजियम हाल सहित अन्य खेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेेजा गया है।
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खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए शासन की तरफ से जिला मुख्यालय स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम की स्थापना की गई। लेकिन स्थापना होने के दशकों बाद भी खिलाड़ियों के अपेक्षा के अनुरुप स्टेडियम में आधुनिक सुविधाएं बहाल नहीं हो सकी है। स्टेडियम में एथलेटिक्स के लिए सिंथेटिक ट्रैक तथा हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान तक नहीं है। यही नहीं जिम्नेजियम हाल न होने से जिम्नास्टिक खिलाड़ियों की प्रतिभा में निखार नहीं आ रहा है। यही हाल कबड्डी, वालीबॉल, क्रिकेट सहित विभिन्न खेलों का है।
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सीमित संसाधनों के बाद भी जिले के खिलाड़ियों ने अपनी कड़ी मेहनत से राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जगह बनाने में सफलता हासिल किया है। अभी हाल ही में कोपागंज ब्लाक क्षेत्र के खुखुंदवा निवासी तथा किसान परिवार की बेटी अर्चना भारद्वाज ने महिला हॉकी के सीनियर टीम में चयन हुआ है। अर्चना बंगलुरु में एक माह का प्रशिक्षण ले रही है। यही हाल रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के फत्तेपुर तथा सरसेना स्थित मिनी स्टेडियम का हाल है।
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खिलाड़ियों को है कोच की दरकार
मऊ। नगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में कई खेलों के कोच के पद रिक्त चल रहे हैं। देश में सबसे लोकप्रिय बना क्रिकेट खेल का कोच भी स्टेडियम में नहीं है। इसके अलावा जिम्नास्टिक, एथलेटिक्स, वालीबाल में भी नहीं है। इसके चलते खेलों के प्रतिभावान खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है।
स्टेडियम में बहाल हो आधुनिक खेल सुविधाएं
मऊ। नगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्पोर्ट्स स्टेडियम में हाकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान नहीं है। अन्य खेलों में कोच न होने से खिलाड़ी प्रतियोगिता में पिछड़ जा रहे हैं। इस संबंध में भुजौटी के हॉकी खिलाड़ी रोहित कुमार का कहना था कि यहां घास के मैदान पर अभ्यास करने के चलते राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। भुजौटी के ही खिलाड़ी विवेक यादव का कहना था कि यहां आधुनिक संसाधनों का अभाव है। एस्टोटर्फ न होने से प्रदर्शन प्रभावित होता है। खिलाड़ी पंकज यादव का कहना था कि ग्राउंड की सफाई व्यवस्था बेहतर न होने से प्रैक्टिस में असुविधा होती है। खिलाड़ी रक्षिता राज का कहना है कि हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान, जिम्नेजियम हाल न होने से राष्ट्रीय स्तर की तैयारी नहीं हो पाती है। स्टेडियम में संसाधनों का अभाव है। कोच का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। शिकायत के बाद भी सुविधा को बहाल नहीं किया जा सका है।
इस मामले में उपजिला क्रिड़ा अधिकारी मुकेश सब्बरवाल ने बताया कि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास जारी है। स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ, जिम्नेजियम हाल सहित अन्य खेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेेजा गया है।