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मां-बेटी भेजी गईं जेल
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Tue, 15 Dec 2015 12:03 AM IST
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मनबढ़ों द्वारा कब्जाई गई अपनी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग को लेकर पिछले 26 दिनों से आंदोलन कर रही युवती और उसकी बुजुर्ग मां को प्रशासनिक अधिकारियों ने बेरहमी से उठाकर जेल भेज दिया।
उसके पोस्टर बैनर को फाड़कर फेंक िदया। मां-बेटी लगातार 17 दिनों तक कलेक्ट्रेट गेट पर शांति पूर्वक धरना देती रहीं, लेकिन प्रशासन की उपेक्षा से विवश होकर ये दोनों छह दिसंबर से आमरण अनशन पर बैठ गईं।
लगातार आठ दिनों तक आमरण अनशन पर बैठे रहने के बावजूद प्रशासन को उनकी समस्याओं को सुलझाना कठिन लगा जबकि अपना हक पाने के लिए उनके शांतिपूर्ण आंदोलन में प्रशासन को खतरा नजर आने लगा। प्रशासन इस कार्रवाई को सही भी ठहरा रहा है।
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घोसी तहसील क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली कुमारी रंभा यादव के दबंग पट्टीदारों ने उसके पूर्वजों की पुश्तैनी जमीन का हड़प लिया। रंभा एसडीएम से लेकर जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर अपनी जमीन से अतिक्रमण हटाने की गुहार लगाती रही, उधर उसके पट्टीदार उसकी जमीन पर कब्जा करके उस पर मकान निर्माण करा लिए।
उसी भूमि की रक्षा की खातिर रंभा तहसील से कलेक्ट्रेट पहुंची । प्रार्थनापत्रों पर कोई कार्रवाई न होती देेख उसने विधवा मां के साथ कलेक्ट्रेट पर धरना देने का निर्णय लिया। 18 नवंबर से रंभा अपनी वृद्धा मां के साथ धरना शुरू किया।
बकौल रंभा किसी भी अधिकारी ने उसकी समस्या सुलझाने में रुचि नहीं ली, उल्टे उसे धरना समाप्त करने का दबाव बनाया गया। जब धरने पर प्रशासन ने उसकी उपेक्षा जारी रखी तो वह छह दिसंबर से आमरण अनशन के लिए विवश हुई।
दोपहर बाद महिला थानाध्यक्ष रामस्वरूप वर्मा महिला सिपाहियों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके साथ आई महिला सिपाहियों ने उसके पोस्टर बैनर फाड़ डाले और उनके विस्तर आदि फेंक दिया और मां-बेटी को घसीटते हुए पुलिस जीप में लाद लिया। थाने ले जाकर उनके विरुद्घ मुकदमा दर्ज पुलिस ने दोनों का चालान कर दिया । जहां से दोनों को जेल भेज गया गया।
कलेक्ट्रेट पर पुलिस द्वारा जबरन उठाये जाने के दौरान रंभा ने रोते हुए बताया कि चूंकि उसके पट्टीदार दबंग हैं और सत्ता पक्ष से जुड़े हैं , इसलिए प्र्रशासनिक अधिकारी दबंगों के प्रभाव में हैं और उनकी ही सह पर मेरा उत्पीड़न किया जा रहा है।
उसने दृढ़ संकल्प दोहराया कि चाहे प्रशासन उसके साथ जितनी भी मनमानी कर ले लेकिन अपने हक के लिए अंतिम सांस तक लड़ती रहेगी।
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उसके पोस्टर बैनर को फाड़कर फेंक िदया। मां-बेटी लगातार 17 दिनों तक कलेक्ट्रेट गेट पर शांति पूर्वक धरना देती रहीं, लेकिन प्रशासन की उपेक्षा से विवश होकर ये दोनों छह दिसंबर से आमरण अनशन पर बैठ गईं।
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लगातार आठ दिनों तक आमरण अनशन पर बैठे रहने के बावजूद प्रशासन को उनकी समस्याओं को सुलझाना कठिन लगा जबकि अपना हक पाने के लिए उनके शांतिपूर्ण आंदोलन में प्रशासन को खतरा नजर आने लगा। प्रशासन इस कार्रवाई को सही भी ठहरा रहा है।
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घोसी तहसील क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली कुमारी रंभा यादव के दबंग पट्टीदारों ने उसके पूर्वजों की पुश्तैनी जमीन का हड़प लिया। रंभा एसडीएम से लेकर जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर अपनी जमीन से अतिक्रमण हटाने की गुहार लगाती रही, उधर उसके पट्टीदार उसकी जमीन पर कब्जा करके उस पर मकान निर्माण करा लिए।
उसी भूमि की रक्षा की खातिर रंभा तहसील से कलेक्ट्रेट पहुंची । प्रार्थनापत्रों पर कोई कार्रवाई न होती देेख उसने विधवा मां के साथ कलेक्ट्रेट पर धरना देने का निर्णय लिया। 18 नवंबर से रंभा अपनी वृद्धा मां के साथ धरना शुरू किया।
बकौल रंभा किसी भी अधिकारी ने उसकी समस्या सुलझाने में रुचि नहीं ली, उल्टे उसे धरना समाप्त करने का दबाव बनाया गया। जब धरने पर प्रशासन ने उसकी उपेक्षा जारी रखी तो वह छह दिसंबर से आमरण अनशन के लिए विवश हुई।
दोपहर बाद महिला थानाध्यक्ष रामस्वरूप वर्मा महिला सिपाहियों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके साथ आई महिला सिपाहियों ने उसके पोस्टर बैनर फाड़ डाले और उनके विस्तर आदि फेंक दिया और मां-बेटी को घसीटते हुए पुलिस जीप में लाद लिया। थाने ले जाकर उनके विरुद्घ मुकदमा दर्ज पुलिस ने दोनों का चालान कर दिया । जहां से दोनों को जेल भेज गया गया।
कलेक्ट्रेट पर पुलिस द्वारा जबरन उठाये जाने के दौरान रंभा ने रोते हुए बताया कि चूंकि उसके पट्टीदार दबंग हैं और सत्ता पक्ष से जुड़े हैं , इसलिए प्र्रशासनिक अधिकारी दबंगों के प्रभाव में हैं और उनकी ही सह पर मेरा उत्पीड़न किया जा रहा है।
उसने दृढ़ संकल्प दोहराया कि चाहे प्रशासन उसके साथ जितनी भी मनमानी कर ले लेकिन अपने हक के लिए अंतिम सांस तक लड़ती रहेगी।