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मिशन शक्ति ः द्रोपदी ने संधर्ष कर बेटो बनाया सर्जन व अध्यापक

Sat, 24 Oct 2020 11:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Oct 2020 11:21 PM IST
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Mission Shakti: Draupadi made a beto, made surgeon and teacher
कोपागंज (मऊ)। कहते हैं कि हौसलों में अगर जान हो तो मुश्किलें घुटने टेक देती है। जी हां, इस कहावत को क्षेत्र की मूंगमास गांव निवासी महिला द्रोपदी राय ने सच कर दिखाया है। ट्रेन हादसे में पति के निधन होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न रहते हुए भी दोनों पुत्रों की पढ़ाई में आने वाली समस्याओं और लोकलाज छोड़कर उन्होंने अपनी देखरेख में खेती गृहस्थी का जिम्मा संभाला। दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ती रहीं और पुत्रों को कामयाब बनाया।
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क्षेत्र के मूंगमास निवासी द्रोपदी राय के पति का निधन 10 वर्ष पूर्व एक रेल हादसे में हो गया। पति की मृत्यु के समय दोनो पुत्र में से एक नितिश नारायण राय एमबीए प्रथम वर्ष तो दूसरे पुत्र जितेश नारायण राय बीडीएस प्रथम वर्ष में दाखिला ले चुके थे। लेकिन पति की मौत के बाद उनकी पढ़ाई आगे जारी रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया। समाज की लोकलाज व परिवार की परेशानियों को दरकिनार करते हुए अपने दो बच्चों के साथ उन्होनें आगे बढ़ने की ठानी और लाख परेशानी के बावजूद उन्होंने ने अपना हौसला बुलंद रखा।
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पति के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण दोनों बच्चों की पढ़ाई में जब अड़चनें सामने आने लगी तो उन्होंने अपनी देखरेख में खेती गृहस्थी का जिम्मा संभाला और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ती रहीं। कुछ समय बीत जाने के बाद खेती से महीने की आमदनी 18 से 20 हजार महीने की होंने लगी जिससे बच्चों की पढाई में काफी सहायता मिलने लगी। छह साल की कड़ी मेहनत के बाद द्रोपदी राय के बडे बेटे नितिश नारायण राय का चयन शिक्षा विभाग में हुआ।
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छोटे पुत्र जितेश नारायण राय का बीडीएस कोर्स पूरा होने के बाद लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की तैयारी के लिए कानपुर और दिल्ली जाना पड़ा। दो साल की कड़ी मेहनत के बाद वर्ष 2019 में उनका चयन लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित डेंटल सर्जन की परीक्षा में चयन हो चुका था। सामान्य वर्ग में प्रदेश में 66वें पायदान पर चयनित होकर जितेश नारायण राय ने क्षेत्र का भी मान बढ़ाया था। दोनों बेटों को सरकारी सेवा में नौकरी दिलाने के बाद द्रोपदी राय का संघर्ष अनवरत जारी है और पूर्व की भांति ही वह अब भी अपने कार्य में लगी हुई हैं।
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