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विलय नहीं, केवल गठबंधन
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Sun, 10 Jul 2016 12:53 AM IST
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अमित शाह की रैली
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भासपा के अति पिछड़ा एवं अति दलित महापंचायत में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सभी कयासों पर शनिवार को विराम लगा दिया। भाजपा में भासपा के विलय की बात को दरकिनार कर केवल गठबंधन की बात कही। हालांकि पूरे कार्यक्रम में किन-किन सीटों पर भासपा से गठबंधन होगा और कितनी सीटें भासपा को मिलेंगी इस पर कुछ साफ तौर पर नहीं कहा। कहा कि इस गठबंधन से भाजपा को प्रदेश में लाभ होगा।
बीते कई दिनों से भासपा के अति पिछड़ा और अति दलित महापंचायत के कार्यक्रम की तैयारी चल रही थी। इसके लिए तरह-तरह के कयास भी लगाए जा रहे थ़े, लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में सभी कयासों पर विराम लगाकर गठबंधन को स्वीकार कर लिया और विधानसभा का चुनाव भासपा के साथ मिलकर लड़ने की घोषणा भी कर दी। इस घोषणा से सपा और बसपा के लोग नफा-नुकसान का आकलन अभी करने में जुट गए हैं।
महज जिले की चार विधानसभा चुनावों पर ही नजर डालें तो हर विधानसभा क्षेत्र में राजभर मतदाताओं की संख्या 25 हजार से लेकर 40 हजार तक है। इसके पूर्व गृहमंत्री के अति पिछड़ा और अति दलित सम्मेलन में भी पिछड़ी जाति के लोगों में खासकर फागू चौहान, प्रभुनाथ चौहान सहित अन्य पिछड़ी जाति नेताओं के नेतृत्व में लोगों की भीड़ दिखाई दी थी।
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अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों सम्मेलन के बाद राजभर, चौहान, मौर्या सहित अन्य अति पिछड़ी एवं अति दलित जातियां मिलकर सपा-बसपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकती हैं। इससे सदर ,घोसी और मधुबन ही नहीं बल्कि अनुसुचित जाति के लिए सुरक्षित मुहम्मदाबाद गोहना सीट पर भी यह गठबंधन असर डाल सकता है। ऐसे में जो भी नुकसान होगा वह सपा, बसपा को ही होगा भाजपा के लिए यह सौदा फायदे का होने वाला है, 2012 के चुनाव में भासपा ने कौएद से गठबंधन किया था। इसका फायद कौएद को मिला भी था। भासपा को किसी सीट पर सफ लता नहीं मिली थी।
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बीते कई दिनों से भासपा के अति पिछड़ा और अति दलित महापंचायत के कार्यक्रम की तैयारी चल रही थी। इसके लिए तरह-तरह के कयास भी लगाए जा रहे थ़े, लेकिन भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में सभी कयासों पर विराम लगाकर गठबंधन को स्वीकार कर लिया और विधानसभा का चुनाव भासपा के साथ मिलकर लड़ने की घोषणा भी कर दी। इस घोषणा से सपा और बसपा के लोग नफा-नुकसान का आकलन अभी करने में जुट गए हैं।
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महज जिले की चार विधानसभा चुनावों पर ही नजर डालें तो हर विधानसभा क्षेत्र में राजभर मतदाताओं की संख्या 25 हजार से लेकर 40 हजार तक है। इसके पूर्व गृहमंत्री के अति पिछड़ा और अति दलित सम्मेलन में भी पिछड़ी जाति के लोगों में खासकर फागू चौहान, प्रभुनाथ चौहान सहित अन्य पिछड़ी जाति नेताओं के नेतृत्व में लोगों की भीड़ दिखाई दी थी।
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अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों सम्मेलन के बाद राजभर, चौहान, मौर्या सहित अन्य अति पिछड़ी एवं अति दलित जातियां मिलकर सपा-बसपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकती हैं। इससे सदर ,घोसी और मधुबन ही नहीं बल्कि अनुसुचित जाति के लिए सुरक्षित मुहम्मदाबाद गोहना सीट पर भी यह गठबंधन असर डाल सकता है। ऐसे में जो भी नुकसान होगा वह सपा, बसपा को ही होगा भाजपा के लिए यह सौदा फायदे का होने वाला है, 2012 के चुनाव में भासपा ने कौएद से गठबंधन किया था। इसका फायद कौएद को मिला भी था। भासपा को किसी सीट पर सफ लता नहीं मिली थी।