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Mau News: नीट में मऊ की रोशी की 132वीं रैंक, बिना मोबाइल के 2 साल तक की तैयारी
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वाराणसी। नीट में बनारस के 22 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों में से 200 से ज्यादा को सफलता मिली है। देश भर के मेडिकल कॉलेजों में अब काशी के होनहारों की दस्तक होगी और एमबीबीएस कर डॉक्टर बनेंगे। बनारस में ही रह कर मेडिकल की पढ़ाई कर ऑल इंडिया 132वीं रैंक हासिल करने वाली रोशी शमीम अब दिल्ली एम्स में एमबीबीएस करेंगी। रोशी ने कहा कि अब काउंसिलिंग पर निर्भर करेगा, लेकिन उनका सपना एम्स के रूप में पूरा हो रहा है।
मूलरूप से मऊ की रोशी बनारस के नवाबगंज में किराए के मकान में रहती हैं। रोशी को पढ़ाने वाले दुकानदार पिता शमीम अख्तर और मां शमीमा खातून ने कहा कि बच्ची ने बिना मोबाइल के 24 महीने तक पढ़ाई की। सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। कोचिंग आने-जाने के बाद ये सिर्फ पढ़ाई में ही रहती थी। घर में पढ़ाई और शेड्यूल तय करने की जिम्मेदारी मां की थी और कोचिंग से लेकर किताब-कॉपी की जिम्मेदारी पिता की।
सगे भाई की जेईई एडवांस्ड में 40वीं रैंक
रोशी के मां-बाप की परवरिश ऐसी है कि उनके घर से वह चौथी टॉपर हैं। भाई यूके में इंजीनियर और एक भाई-बहन लखनऊ केजीएमयू में डॉक्टर हैं। रोशी के सगे भाई की जेईई एडवांस्ड में 40वीं रैंक थी। आईआईटी दिल्ली से बीटेक करने के बाद यूके में अच्छे पैकेज पर नौकरी कर रहा। एक बहन केजीएमयू में गायनकोलॉजिस्ट सीनियर रेजीडेंट और दूसरा भाई वहीं से एमबीबीएस कर रहा है।
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मूलरूप से मऊ की रोशी बनारस के नवाबगंज में किराए के मकान में रहती हैं। रोशी को पढ़ाने वाले दुकानदार पिता शमीम अख्तर और मां शमीमा खातून ने कहा कि बच्ची ने बिना मोबाइल के 24 महीने तक पढ़ाई की। सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। कोचिंग आने-जाने के बाद ये सिर्फ पढ़ाई में ही रहती थी। घर में पढ़ाई और शेड्यूल तय करने की जिम्मेदारी मां की थी और कोचिंग से लेकर किताब-कॉपी की जिम्मेदारी पिता की।
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सगे भाई की जेईई एडवांस्ड में 40वीं रैंक
रोशी के मां-बाप की परवरिश ऐसी है कि उनके घर से वह चौथी टॉपर हैं। भाई यूके में इंजीनियर और एक भाई-बहन लखनऊ केजीएमयू में डॉक्टर हैं। रोशी के सगे भाई की जेईई एडवांस्ड में 40वीं रैंक थी। आईआईटी दिल्ली से बीटेक करने के बाद यूके में अच्छे पैकेज पर नौकरी कर रहा। एक बहन केजीएमयू में गायनकोलॉजिस्ट सीनियर रेजीडेंट और दूसरा भाई वहीं से एमबीबीएस कर रहा है।
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