मऊ। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के तत्वाधान में नगर के शारदा नारायन हास्पिटल के सभागार में रविवार की देर शाम चिकित्सकीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें डायबिटीज पर चर्चा की करते हुए इसकी जटिलता पर इंसुलिन का प्रयोग करने की सलाह दी गई। सेमीनार में आईएमएस बीएचयू के प्रोफेेेसर डॉ. मधुकर राय ने टाइप 2 डायबिटीज में इंसुलिन के महत्व, परिणाम के बारे में चिकित्सकों को बताया कि आमतौर पर टाइप 2 डायबिटीज के प्रबंधन के लिए कई सालों तक ओरल मेडिकल, स्वस्थ खाने और व्यायाम पर जोर दिया जाता है। अगर डायबिटीज को फिर भी नियंत्रित करने में परेशानी आती है या फिर दवाएं समय के साथ उम्मीदों के मुताबिक अपना असर नहीं दिखा पातीं तो अगला कदम ओरल दवाओं का कॉमबिनेशन बनाना होता है, जो बेहतर ढंग से काम कर सकता है। बोले कि टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों को इंसुलिन थेरेपी की तब जरूरत पड़ती है जब ओरल मेडिकेल के साथ ही सही आहार और व्यायाम व्यक्ति के ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए काफी नहीं होते। लेकिन इंसुलिन को अब सिर्फ आखिरी कदम (उपाय) के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाता। संचालन आईएमए अध्यक्ष डॉ. संजय सिंह ने किया। समापन पर डॉ. संजय सिंह, डॉ. गंगा सागर सिंह, डॉ. जेडआई उस्मानी ने प्रोफेसर डा0 मधुकर राय को अंगवस्त्र तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर आईएमए सचिव डॉ. सीएस साहनी, डॉ.पवन गुप्ता, डॉ.जयनाथ सिंह, डॉ. आरके अग्रवाल,डॉ. आशीष वर्मा,डॉ. राहुल राय, डॉ.रितेश अग्रवाल,डॉ.राहुल कुमार,डॉ.आर ए राय आदि मौजूद रहे।