रतनपुरा। ब्लाक क्षेत्र के खालिसपुर गांव में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में कथा व्यास पं. राधा बल्लभ हितांशु जी महाराज ने कहा कि भागवत व मानस जैसे ग्रन्थों को साक्षात शिक्षा का संस्थान कहा जा सकता है। शिक्षा और संस्कार दोनों की जरूरत मनुष्य जीवन को होती है। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति शिक्षित तो है, लेकिन संस्कारी नहीं है। उसका कारण यही है कि हमने भागवत व मानस जैसे ग्रंथों को पढ़ना बंद कर दिया। पहले घर में राम और कृष्ण कथा गाई जाती थी, जिससे राम के संस्कार और कृष्ण की शिक्षा दोनों से ही जीवन चलाने की कला हमें प्राप्त होती थी, भागवत व रामायण में पढ़ने के साथ साथ जीवन में धारण करने की आवश्यकता है। कहा कि यदि संस्कार चाहिए तो हमें मिशनरियों की बजाय गुरुकुल पर, अध्यात्म पर तथा मानस, भागवत, गीता, वेद, पुराण, शास्त्र और स्मृतियां पढ़ने की ज्यादा जरूरत है। साथ- साथ माता पिता का भी कर्तव्य है कि अपने बच्चों को बड़ों का आदर करने की शिक्षा दें। जिससे हमारे समाज में शिक्षा व संस्कार की कमी न होने पाए। कथा में यजमान प्रमिला पांडेय, जिला पंचायत पूर्व अध्यक्ष राकेश् ासिंह, प्रधान प्रतिनिधि राघवेंद्र सिंह, प्रेम सागर तिवारी, धरनीधर, मुरली शर्मा, झारखंडेय ठाकुर आदि शामिल रहे।