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मऊः हर दिन घाघरा में विलीन हो रही पांच बीघा उपजाऊ जमीन, किसान चिंतित

Sun, 27 Jun 2021 09:06 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jun 2021 09:06 PM IST
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Mau: Five bighas of fertile land merging in Ghaghra every day, farmers worried
मऊ। घाघरा का जलस्तर घटने के बाद भी कटान जारी रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हर दिन उपजाऊ भूमि घाघरा मेें विलीन हो रही है। बावजूद कटान रोकने के लिए सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। हालांकि नदी अब खतरा निशान से एक मीटर नीचे चली गई है।
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मधुबन तहसील क्षेत्र के बिंदटोलिया के पास कटान जारी है। लोग नदी में पेड़ की डाल, खरपतवार डालकर कटान रोकनेे का प्रयास तो कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। दुबारी संवाददाता के अनुसार, बिंटोलिया गांव सहित आसपास के इलाकों में कटान जारी है। पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। बिंदटोलिया गांव के ग्रामीणों का कहना है कि दक्षिण और पूरब के कोने में प्रतिदिन पांच बीघा उपजाऊ जमीन कटकर नदी में विलीन हो रही है। ग्रामीण नदी में खरपतवार और पेड़ की डालियां डाल कर कटान रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
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किसानों को सता रही अन्न व भूमि की चिंता
दोहरीघाट: घाघरा के जलस्तर में घटाव के बाद भी नवली तथा नई बाजार के देवारा क्षेत्रों में कटान से लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। किसानों को अन्न और भूमि की चिंता सता रही है। अब तक तटवर्ती इलाकों की हजारों एकड़ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है। घाघरा के जलस्तर में 45 सेमी की कमी आने से जलस्तर अब खतरा निशान से एक मीटर नीचे चला गया है। रविवार को नदी का जलस्तर 68.90 मीटर रहा। कटान पीड़ितों का कहना है कि बरसात शुरू हो गई है। पहाड़ों पर बरसात होने तथा नेपाल से पानी छोड़े जाने से नदी के जलस्तर में वृद्धि की प्रबल संभावना है। इसके बावजूद प्रशासन की तरफ से कटान रोकने के उपाय नहीं किए गए हैं।
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कटान प्रोजेक्ट का कार्य 15 दिनों से बंद
कटान समस्या के समाधान के लिए शासन की तरफ से 12.34 करोड़ की लागत से नदी की धारा मोड़ने के लिए डायवर्जन चैनलाइजेशन कार्य लगभग 15 दिनों से बंद चल रहा है। कटान प्रोजेक्ट का कार्य रुक जाने से लोग दहशत में जी रहे हैं। सूरजपुर संवाददाता के अनुसार, क्षेत्र के सूरजपुर अंतर्गत घाघरा नदी के तट पर स्थित राम-जानकी मंदिर से 70 मीटर पूर्व की तरफ कटान जारी है। बचाव के लिए सिंचाई विभाग की तरफ से प्लास्टिक के बैग में बालू भरकर नदी के पानी में डाला जा रहा है।
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