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Mau News: 70 हजार कर्ज लेकर भेजा दुबई, मौत के नौ महीने बाद आया शव
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नौ माह बाद चन्दन का शव पहुंचने पर विलाप करती महिलाएं
अपने घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने गए कोपागंज थाना क्षेत्र के बाबुपुर शाहपुर गांव निवासी चंदन कुमार राजभर का शव नौ महीने बाद उसके गांव सोमवार को पहुंचा।
युवक के पिता ने पहले बेटे को विदेश भेजने के लिए ब्याज पर 70 हजार का कर्ज लिया, वहीं नौ माह पहले बेटे को खोने के बाद उसके शव लाने में पिता ने 30 हजार से अधिक राशि खर्च कर दी।
उधर नौ माह बाद शव पहुंचने पर पूरे गांव में इस घटना को लेकर मर्माहत दिखा। मृतक के पिता मोतीलाल राजभर ने बताया कि उसका बेटा 7 मई 2025 को मुंबई के एक एजेंट के माध्यम से दुबई में स्टील फिक्सर का काम करने गया था।
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16 जून को बेटे से परिवार की बात हुई थी और उसके बाद उसका फोन बंद हो गया। 3 जुलाई को उस एजेंट द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि चन्दन की मौत हो गई है। बताया कि उसने अपने 70 हजार रुपये ब्याज पर लेकर बेटे को भेजा था।
जब उसकी मौत की सूचना मिली तो उसका शव लाने के लिए उसने सबसे पहले घोसी सपा सांसद राजीव राय से गुहार लगाई। इसके बाद वह अलग-अलग बार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, पूर्व विधायक विजय राजभर, भाजपा नेता शक्ती सिंह सहित जन प्रतिनिधियों से गुहार लगाई।
बताया कि करीब नौ माह बाद उसके बेटे का शव का प्लाइट से लखनऊ पहुंचने पर फिर वह दस हजार रुपये का कर्ज लेकर एबुलेंस से पहुंचा। जहां शव को लेकर अपने गांव आया उसके बाद वह उसका अंतिम संस्कार करने दोहरीघाट मुक्तीधाम पहुंचा।
पिता मोतीलाल द्वारा बार बार एक ही वाक्य के बीच कि उसने अपने बेटे को दुबई को क्यों भेजा लोगों को मर्माहत कर रहा था। शव आने पर ज्योति अपने पति चंदन के शव को देखकर बार बार बेहोश हो जा रही थी। उसके दोनों बेटे किशन और करण खुद को संभालते हुए अपनी मां को हिम्मत बंधाते दिखे।
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युवक के पिता ने पहले बेटे को विदेश भेजने के लिए ब्याज पर 70 हजार का कर्ज लिया, वहीं नौ माह पहले बेटे को खोने के बाद उसके शव लाने में पिता ने 30 हजार से अधिक राशि खर्च कर दी।
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उधर नौ माह बाद शव पहुंचने पर पूरे गांव में इस घटना को लेकर मर्माहत दिखा। मृतक के पिता मोतीलाल राजभर ने बताया कि उसका बेटा 7 मई 2025 को मुंबई के एक एजेंट के माध्यम से दुबई में स्टील फिक्सर का काम करने गया था।
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16 जून को बेटे से परिवार की बात हुई थी और उसके बाद उसका फोन बंद हो गया। 3 जुलाई को उस एजेंट द्वारा सूचना प्राप्त हुई कि चन्दन की मौत हो गई है। बताया कि उसने अपने 70 हजार रुपये ब्याज पर लेकर बेटे को भेजा था।
जब उसकी मौत की सूचना मिली तो उसका शव लाने के लिए उसने सबसे पहले घोसी सपा सांसद राजीव राय से गुहार लगाई। इसके बाद वह अलग-अलग बार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, पूर्व विधायक विजय राजभर, भाजपा नेता शक्ती सिंह सहित जन प्रतिनिधियों से गुहार लगाई।
बताया कि करीब नौ माह बाद उसके बेटे का शव का प्लाइट से लखनऊ पहुंचने पर फिर वह दस हजार रुपये का कर्ज लेकर एबुलेंस से पहुंचा। जहां शव को लेकर अपने गांव आया उसके बाद वह उसका अंतिम संस्कार करने दोहरीघाट मुक्तीधाम पहुंचा।
पिता मोतीलाल द्वारा बार बार एक ही वाक्य के बीच कि उसने अपने बेटे को दुबई को क्यों भेजा लोगों को मर्माहत कर रहा था। शव आने पर ज्योति अपने पति चंदन के शव को देखकर बार बार बेहोश हो जा रही थी। उसके दोनों बेटे किशन और करण खुद को संभालते हुए अपनी मां को हिम्मत बंधाते दिखे।