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जगह-जगह खोही जा रही पोखरी

Sun, 17 Apr 2016 12:02 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मऊ
ब्यूरो/ अमर उजाला, मऊ Updated Sun, 17 Apr 2016 12:02 AM IST
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Losing places Pokhari
फतहपुर मंडाव ब्लाक के भठियां गांव में सूखा पड़ा पोखरा।
। पिछले तीन सालों से कम वर्षां के चलते सूूखे की मार से जूझ रहे जिले में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। शासन की योजना मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान के तहत सैकड़ों पोखरियां भी खोदी जा रही हैं, और उनमें वाटर रिचार्जिंग सिस्टम भी लगाया जा रहा है। हालांकि अभी उनमें पानी नहीं है लेकिन विभाग भी मानसून का इंतजार कर रहा है। विकट परिस्थितियों में उसे नहर के पानी से भरे जाने की योजना है। भूमि संरक्षण विभाग पोखरियों का जीर्णांद्धार करने में जुटा हुआ है। किसान भी विभाग को आवेदन देकर अपने खेत में पोखरी खुदवाने के लिए प्रयासरत्न हैं ताकि इस बार भी अगर कम वर्षा हो तो वह न सिर्फ अपने फसल की सिंचाई करा सकें बल्कि उसमें मछली पालन भी कर सकें। 
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जिले में पिछले तीन सालों से कम बरसात से जन जीवन संकट में पड़ गया है। जिले भर के ताल तलैयों में नाममात्र में ही पानी देखने को मिल सकता है। ऐसे में न सिर्फ भू गर्भ जल स्तर पर प्रभाव पड़ा है बल्कि पेयजल संकट की भी स्थिति उत्पन्न है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान के तहत 884 पोखरियों की खुदाई कराकर उसमें वाटर रिचार्जिंग का भी सिस्टम लगाया ताकि इस बार कम बरसात भी हो तो वर्षा के जल से धरती का कलेजा तर किया जा सके। भूमि संरक्षण विभाग भी 6 पोखरियों की खुदाई कर उनका जीर्णोद्धार करा चुका है जब कि 26 पोखरियों पर खुदाई मानसून के पहले ही कर देनी है। किसान भी विभाग को आवेदन देकर अपने खेत में पोखरे की खुदाई के लिए प्रयासरत्न है। कई आवेदन इसके लिए भूमि संरक्षण विभाग को इसके तहत मिल भी चुके हैं। किसान से लेकर जिला प्रशासन भी इस बार मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहा है ताकि पानी को धरती की कोख में समाया जा सके।
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पशु पक्षी से लेकर पेयजल संकट उत्पन्न होने पर सभी बेहाल हैं। डीएम वैभव श्रीवास्तव का कहना है कि जिले में मुख्यमंत्री जल बचाओ योजना के तहत पोखरो की खुदाई कर उसे वाटर रिचार्जिंग के लिए उपयुक्त बनाया गया है। मानसून के पानी को इस योजना के तहत वाटर रिचार्जिंग के लिए प्रयोग में लाना है। खाली पोखरों को पानी से भरने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। मानसून समय से नहीं आया तो उन्हें नहरों आदि में पानी चलाकर भरा भी जाएगा। 
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