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खतरे में नौनिहालों की जान
mau news
Updated Fri, 11 Aug 2017 12:11 AM IST
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कुछ इस तरह से टेंपो में भरकर बच्चों को लाते हैं चालक।
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मऊ। लापरवाह स्कूल संचालकों और वाहन चालकों के चलते मासूस बच्चों की जान खतरे में है। कहीं स्कूल प्रबंधन तो कहीं वाहन चालक इसके लिए जिम्मेदार हैं। जिले में पंजीकृत स्कूली वाहनों के नाम पर महज 150 वाहन ही हैं जबकि सैकड़ों बिना पंजीकृत वाहनों से बच्चों को भेजा जा रहा है। इन वाहनों में बच्चों को ठूंस-ठूंसकर भरा जाता है। बावजूद इसके लिए न तो अभिभावक जागरूक हैं और न ही प्रशासन इसके प्रति गंभीर है।
जिले में बड़े स्कूलों में स्कूली बस के साथ ही छोटी वैन से स्कूली बच्चे ढोये जा रहे हैं। इनमें कुछ पंजीकृत हैं तो कुछ अपंजीकृत ही बच्चों को ढोह रहे हैं। जो पंजीकृत हैं वह भी नियमों को ताक पर रखकर नौनिहालों के भविष्य को साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों के कान्वेंट स्कूलों में यह स्कूली वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। बावजूद इसके इन पर किसी की नजर नहीं है। यही नहीं अभिभावक भी अपने नौनिहालों की जान को लेकर फिक्रमंद नहीं है। वह भी कहीं बाइक पर चार से पांच बच्चों को बिठाकर स्कूल छोड़ने जा रहे हैं तो कहीं वाहनों में जगह न होने के बाद भी अपने नौनिहालों को उसी वाहन में ठूंसकर भेजे के लिए तैयार हो रहे हैं। इस संबंध में एआरटीओ श्यामलाल का कहना है कि विभाग में पंजीकृत स्कूली वाहन ही मानक के अनुसार बच्चों को ढोने के लिए वैध हैं। ऐसे स्कूली वाहन जिनका विभाग में पंजीकरण नहीं हैं वह अवैध हैं। ऐसे वाहनों के विरुद्ध समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है।
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जिले में बड़े स्कूलों में स्कूली बस के साथ ही छोटी वैन से स्कूली बच्चे ढोये जा रहे हैं। इनमें कुछ पंजीकृत हैं तो कुछ अपंजीकृत ही बच्चों को ढोह रहे हैं। जो पंजीकृत हैं वह भी नियमों को ताक पर रखकर नौनिहालों के भविष्य को साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों के कान्वेंट स्कूलों में यह स्कूली वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। बावजूद इसके इन पर किसी की नजर नहीं है। यही नहीं अभिभावक भी अपने नौनिहालों की जान को लेकर फिक्रमंद नहीं है। वह भी कहीं बाइक पर चार से पांच बच्चों को बिठाकर स्कूल छोड़ने जा रहे हैं तो कहीं वाहनों में जगह न होने के बाद भी अपने नौनिहालों को उसी वाहन में ठूंसकर भेजे के लिए तैयार हो रहे हैं। इस संबंध में एआरटीओ श्यामलाल का कहना है कि विभाग में पंजीकृत स्कूली वाहन ही मानक के अनुसार बच्चों को ढोने के लिए वैध हैं। ऐसे स्कूली वाहन जिनका विभाग में पंजीकरण नहीं हैं वह अवैध हैं। ऐसे वाहनों के विरुद्ध समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है।
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