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लाकडाउन काल में जनसुनवाई पोर्टल पर आए कम मामले
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मऊ। लॉकडाउन के दौरान जन सुनवाई पोर्टल पर सामान्य दिनों की तुलना में लॉकडाउन के दौरान पोर्टल पर कम मामले दर्ज किए गए।
अब मामले बढ़ने लगे हैं। हालांकि जनसुनवाई पोर्टल पर कई मामले का मनमाने तरीके से निस्तारण कर अधिकारी व कर्मचारी आंकड़ों को दुरुस्त करने का खेल कर रहे हैं। पीड़ित समस्याओं को लेकर भटक रहे हैं। सामान्य दिनों में पोर्टल पर हर माह 1500 से 1600 मामले दर्ज होते थे। कोरोना काल में 300 से 500 मामले आए।
सरकार की तरफ से जन समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए जन सुनवाई पोर्टल शुरू किया गया है। कोरोना काल में जनसुनवाई न होने से कम मामले दर्ज किए गए। अधिकारियों की मानें तो लॉकडाउन के दौरान अप्रैल से जून तक हर माह करीब 300 से 500 मामले आए। जबकि सामान्य दिनों में 1500से 1600 मामले दर्ज किए जा रहे थे।
लेकिन जुलाई से शिकायतों की संख्या में इजाफा हुआ है। अधिकारियों की मानें तो लोग कोरोना संक्रमण को लेकर कार्यालयों में आने से बच रहे हैं। ऐसे में शिकायतकर्ता ऑनलाइन शिकायतों पर जोर दे रहे हैं। हालांकि जन सुनवाई पोर्टल पर कई विभागों में आंकड़े का खेल किया जा रहा है और बिना मौके पर ही गए मामले का निस्तारण कर दिया जाता है।आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो पोर्टल पर 50 हजार 601 मामले दर्ज किए गए।जिसमें 49 हजार 503 मामले का निस्ताण कर दिया गया। 1071 मामले पेंडिंग में है। निस्तारित मामले में 21736 जिलाधिकारी कार्यालय से रहे। ज्यादा मामले राजस्व, ग्राम विकास, खाद्य आपूर्ति के रहे। कई विभागों में समस्याओं के निस्तारण में अनियमितता बरती जा रही है। इस संबंध में ताजोपुर निवासी शंभू पांडेय का कहना था कि फोर लेन में अधिक भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है, लेकिन कम मुआवजा मिला है। पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराया गया, लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हो सका। जबकि नसीरपुर निवासी प्रमोद यादव का कहना था कि गांव में विकास कार्य में बरती गई अनियमितता की शिकायत पोर्टल पर दर्ज कराया गया। लेकिन मामले के निस्तारण में खानापूर्ति कर दी गई।इस बाबत अपर जिलाधिकारी के हरि सिंह का कहना था कि पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का गुणवत्तापरक तरीके से निस्तारण करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है।
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अब मामले बढ़ने लगे हैं। हालांकि जनसुनवाई पोर्टल पर कई मामले का मनमाने तरीके से निस्तारण कर अधिकारी व कर्मचारी आंकड़ों को दुरुस्त करने का खेल कर रहे हैं। पीड़ित समस्याओं को लेकर भटक रहे हैं। सामान्य दिनों में पोर्टल पर हर माह 1500 से 1600 मामले दर्ज होते थे। कोरोना काल में 300 से 500 मामले आए।
सरकार की तरफ से जन समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए जन सुनवाई पोर्टल शुरू किया गया है। कोरोना काल में जनसुनवाई न होने से कम मामले दर्ज किए गए। अधिकारियों की मानें तो लॉकडाउन के दौरान अप्रैल से जून तक हर माह करीब 300 से 500 मामले आए। जबकि सामान्य दिनों में 1500से 1600 मामले दर्ज किए जा रहे थे।
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लेकिन जुलाई से शिकायतों की संख्या में इजाफा हुआ है। अधिकारियों की मानें तो लोग कोरोना संक्रमण को लेकर कार्यालयों में आने से बच रहे हैं। ऐसे में शिकायतकर्ता ऑनलाइन शिकायतों पर जोर दे रहे हैं। हालांकि जन सुनवाई पोर्टल पर कई विभागों में आंकड़े का खेल किया जा रहा है और बिना मौके पर ही गए मामले का निस्तारण कर दिया जाता है।आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो पोर्टल पर 50 हजार 601 मामले दर्ज किए गए।जिसमें 49 हजार 503 मामले का निस्ताण कर दिया गया। 1071 मामले पेंडिंग में है। निस्तारित मामले में 21736 जिलाधिकारी कार्यालय से रहे। ज्यादा मामले राजस्व, ग्राम विकास, खाद्य आपूर्ति के रहे। कई विभागों में समस्याओं के निस्तारण में अनियमितता बरती जा रही है। इस संबंध में ताजोपुर निवासी शंभू पांडेय का कहना था कि फोर लेन में अधिक भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है, लेकिन कम मुआवजा मिला है। पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराया गया, लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हो सका। जबकि नसीरपुर निवासी प्रमोद यादव का कहना था कि गांव में विकास कार्य में बरती गई अनियमितता की शिकायत पोर्टल पर दर्ज कराया गया। लेकिन मामले के निस्तारण में खानापूर्ति कर दी गई।इस बाबत अपर जिलाधिकारी के हरि सिंह का कहना था कि पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का गुणवत्तापरक तरीके से निस्तारण करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है।
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