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घर-घर में पूजे गए लक्ष्मी और गणेश
mau news
Updated Thu, 19 Oct 2017 06:52 PM IST
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नगर क्षेत्र के राजगद्दी के मैदान पर स्थापित मां लक्ष्मी की प्रतिमा।
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संपन्नता और खुशहाली का प्रतीक प्रकाश पर्व दीपावली गुरुवार को बड़े ही धूमधाम के साथ मनाई गई। इस अवसर पर एक तरफ जहां पटाखों की गूंज और दीपकों तथा रंग बिरंगे लाइटों की चकाचौंध से समूचा वातावरण जगमगा उठा। वहीं व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और बाजारों में त्यौहारों की जबरदस्त चहल पहल नजर आ रही थी। इस दौरान जगह-जगह सजें माता लक्ष्मी और काली की प्रतिमाओं की पंडालों में हुई भव्य सजावट त्योहारों की रौनक में चार चांद लगाने का काम कर रही थी। मिठाइयों की बिक्री व पटाखों की धूम इस त्यौहारों का मुख्य आकर्षण थी।
दीपावली पर्व के अवसर पर सुबह से ही बाजारों में गहमा गहमी का इजाफा देखा गया। लोगों ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों को फूलों की माला औरे रंग बिरंगी लाइटों से सजाया। तत्पश्चात लोग आवश्यक सामानों की खरीदारी में लग गए। दूकानदार भी अपने दूकानों पर डंटे रहे। व्यवसायिक रूप से खास महत्व रखने वाले इस त्यौहार के मद्देनजर दूकानों पर लोगों को अपना लेनदेन चुकता करते देखा गया। दीपावली पर्व के अवसर पर शाम को लक्ष्मी और गणेश की पूजा हुई। लोगों ने हवन पूजन किया। इस दौरान मिठाइयों और पटाखों के तरफ बच्चों का खासा उत्साह देखा गया। शाम से शुरू हुई आतिशबाजी देर रात तक जारी रही। खासकर पूजा पंडालों पर भव्य सजावट के बीच जमकर आतिशबाजी हुई।
उल्लेखनीय है कि इस त्यौहार को मनाने के पीछे सबसे प्रचलित मान्यता यह है कि भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी को राजा बलि के शिकंजे से छुड़ाया था। दूसरी कथा यह है कि इस दिन आकाश गंगा में से देवी लक्ष्मी का अभ्युदय हुआ था। जबकि तीसरी प्रचलित कथा यह है कि राम के वनवास से लौटने के बाद इसी दिन अयोध्यावासियों ने दीपोत्सव मनाया था। दीपावली मनाने के पीछे एक मान्यता यह भी है कि नरक के राजा बलि मृत्युदेव यम ही है। इसीलिए चारो ओर दीप जलाए जाते हैं। ताकि खानदान के पूर्वज प्रकाश देखकर यम से छुटकारा पा सकें। पर्व की इन्हीं सारी मान्यताओं को देखते हुए दीपावली के मौके पर दीए जलाए गए। साथ ही परंपरा के मुताबिक लक्ष्मी और गणेश की पूजा हुई। मझवारा संवाददाता के अनुसार स्थानीय बाजार सहित क्षेत्र के पवनी, सेमरीजमालपुर, इंदारा, ललितपुर लुदुही सहित विभिन्न इलाकों में दीपावली पर्व धूमधाम से मनाया गया।अवसर पर लोगों ने गणेश और लक्ष्मी की पूजा कर परंपरागत रूप से अपने-अपने घरों में तरह-तरह के पकवान बनवाए और एक दूसरे को खिलाते हुए आतिशबाजी किया। दीपावली के अवसर पर क्षेत्र में भारी चहल पहल देखी गई।मधुबन संवाददाता के अनुसार दीपावली के अवसर पर मधुबन बाजार के अलावा इलाके के नंदौर, दुबारी, मर्यादपुर, सिपाह इब्राहिमाबाद आदि क्षेत्रों में आतिशबाजी के बीच प्रकाश पर्व दीपावली धूमधाम से मनाया गया। क्षेत्र में भारी चहल पहल देखी गई।अमिला संवाददाता के अनुसार कस्बे में दीपावली के अवसर पर पूजा पंडालों में रखी लक्ष्मी प्रतिमाओं के दर्शन पूजन के लिए लोगों का तांता लगा रहा। इसके अलावा क्षेत्र के बसावनपुर, रामपुर में पर्व की रौनक नजर आई।बढुआगोदाम/ पिपरीडीह संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के बढ़ुआगोदाम, कोटवां, रैकवारडीह, कहिनौर, उस्मानपुर, सुअराबोझ सहित विभिन्न इलाकों में दीपावली पर्व का त्यौहार उत्साहपूर्वक मनाया गया। लक्ष्मी पूजा पंडालों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्राण प्रतिष्ठा की गई। देर रात तक पूजन अर्चन करने का क्रम चलता रहा। पंडालों में हमेशा भक्तिगीतों के बजते रहने से वातावरण भक्तिमय नजर आया।
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इनसेट
युवाओं ने आधुनिक संसाधनों से दी बधाई
मऊ। दीपावली के दिन वैसे तो तमाम घरों में पारंपरिक रूप से गणेश लक्ष्मी की पूजा की गई, लेकिन युवाओं के अंदाज सुबह से ही बदले हुए थे। युवाओं ने पूरे दिन दीवाली का जश्न मनाया। मोबाइल, फेसबुक, वाट्सएप आदि आधुनिक संसाधनों से दीवाली की बधाई दी। किसी ने दोस्तों को दीपक और किसी ने पटाखे भेजे। कुछ लोगों ने देवी की आराधना वाले मंत्र ही लिख भेजे।
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दीपावली पर्व के अवसर पर सुबह से ही बाजारों में गहमा गहमी का इजाफा देखा गया। लोगों ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों को फूलों की माला औरे रंग बिरंगी लाइटों से सजाया। तत्पश्चात लोग आवश्यक सामानों की खरीदारी में लग गए। दूकानदार भी अपने दूकानों पर डंटे रहे। व्यवसायिक रूप से खास महत्व रखने वाले इस त्यौहार के मद्देनजर दूकानों पर लोगों को अपना लेनदेन चुकता करते देखा गया। दीपावली पर्व के अवसर पर शाम को लक्ष्मी और गणेश की पूजा हुई। लोगों ने हवन पूजन किया। इस दौरान मिठाइयों और पटाखों के तरफ बच्चों का खासा उत्साह देखा गया। शाम से शुरू हुई आतिशबाजी देर रात तक जारी रही। खासकर पूजा पंडालों पर भव्य सजावट के बीच जमकर आतिशबाजी हुई।
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उल्लेखनीय है कि इस त्यौहार को मनाने के पीछे सबसे प्रचलित मान्यता यह है कि भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी को राजा बलि के शिकंजे से छुड़ाया था। दूसरी कथा यह है कि इस दिन आकाश गंगा में से देवी लक्ष्मी का अभ्युदय हुआ था। जबकि तीसरी प्रचलित कथा यह है कि राम के वनवास से लौटने के बाद इसी दिन अयोध्यावासियों ने दीपोत्सव मनाया था। दीपावली मनाने के पीछे एक मान्यता यह भी है कि नरक के राजा बलि मृत्युदेव यम ही है। इसीलिए चारो ओर दीप जलाए जाते हैं। ताकि खानदान के पूर्वज प्रकाश देखकर यम से छुटकारा पा सकें। पर्व की इन्हीं सारी मान्यताओं को देखते हुए दीपावली के मौके पर दीए जलाए गए। साथ ही परंपरा के मुताबिक लक्ष्मी और गणेश की पूजा हुई। मझवारा संवाददाता के अनुसार स्थानीय बाजार सहित क्षेत्र के पवनी, सेमरीजमालपुर, इंदारा, ललितपुर लुदुही सहित विभिन्न इलाकों में दीपावली पर्व धूमधाम से मनाया गया।अवसर पर लोगों ने गणेश और लक्ष्मी की पूजा कर परंपरागत रूप से अपने-अपने घरों में तरह-तरह के पकवान बनवाए और एक दूसरे को खिलाते हुए आतिशबाजी किया। दीपावली के अवसर पर क्षेत्र में भारी चहल पहल देखी गई।मधुबन संवाददाता के अनुसार दीपावली के अवसर पर मधुबन बाजार के अलावा इलाके के नंदौर, दुबारी, मर्यादपुर, सिपाह इब्राहिमाबाद आदि क्षेत्रों में आतिशबाजी के बीच प्रकाश पर्व दीपावली धूमधाम से मनाया गया। क्षेत्र में भारी चहल पहल देखी गई।अमिला संवाददाता के अनुसार कस्बे में दीपावली के अवसर पर पूजा पंडालों में रखी लक्ष्मी प्रतिमाओं के दर्शन पूजन के लिए लोगों का तांता लगा रहा। इसके अलावा क्षेत्र के बसावनपुर, रामपुर में पर्व की रौनक नजर आई।बढुआगोदाम/ पिपरीडीह संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के बढ़ुआगोदाम, कोटवां, रैकवारडीह, कहिनौर, उस्मानपुर, सुअराबोझ सहित विभिन्न इलाकों में दीपावली पर्व का त्यौहार उत्साहपूर्वक मनाया गया। लक्ष्मी पूजा पंडालों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्राण प्रतिष्ठा की गई। देर रात तक पूजन अर्चन करने का क्रम चलता रहा। पंडालों में हमेशा भक्तिगीतों के बजते रहने से वातावरण भक्तिमय नजर आया।
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युवाओं ने आधुनिक संसाधनों से दी बधाई
मऊ। दीपावली के दिन वैसे तो तमाम घरों में पारंपरिक रूप से गणेश लक्ष्मी की पूजा की गई, लेकिन युवाओं के अंदाज सुबह से ही बदले हुए थे। युवाओं ने पूरे दिन दीवाली का जश्न मनाया। मोबाइल, फेसबुक, वाट्सएप आदि आधुनिक संसाधनों से दीवाली की बधाई दी। किसी ने दोस्तों को दीपक और किसी ने पटाखे भेजे। कुछ लोगों ने देवी की आराधना वाले मंत्र ही लिख भेजे।