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Mau News: वार्ड में नहीं आते लैब सहायक, मरीज खुद दूसरे तल पर जाकर कराते हैं जांच
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जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर उपचार के लिए चिकित्सकों के साथ अन्य सहयोगियों की भी तैनाती की गई है। लेकिन सही मायनों में मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। अस्पताल में इन दिनों वायरल मरीजों की संख्या बढ़ी है। परामर्श वाले मरीजों के साथ अस्पताल में ऐसे मरीज भर्ती भी है, जिनकी खून की जांच जरूरी होती है। लैब सहायकों के इन वार्ड में नहीं जाने से इन मरीजों को जांच के लिए अस्पताल के लैब में खुद जांच कराने जाना पड़ रहा है।
नगर सहित जिले के दूर दराज मरीजों को उपचार के लिए मुख्यालय पर जिला अस्पताल की नींव पूर्व सांसद कल्पनाथ राय ने तीन दशक पहले रखी थी। अस्पताल की स्थापना से लेकर अभी तक यहां अनेक विभाग बनाए गए है, जिसका लाभ मरीजों को मिलता है। लेकिन पिछले कई साल से कर्मियों की लापरवाही से मरीजों काे परेशानी भी उठानी पड़ रही है।
जिला अस्पताल के दूसरे तल पर लैब बनाया गया है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को यही पर जाकर जांच करानी पड़ती है। यही हाल भर्ती होने वाले मरीजों का भी है, या तो मरीज को अस्पताल के दूसरे तल पर जाने के लिए कुल 21 सीढ़ी का सफर तय करना पड़ता है या गंरीर होने पर भर्ती मरीज का वार्ड ब्वाय या प्रशिक्षुओं द्वारा खून निकालकर मरीज के तीमारदार को दे दिया जाता है।
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लैब सहायकों के लिए नियम
मऊ। मरीजों का सही प्रकार से उपचार मिल इसके लिए लैब सहायक की नियुक्ति की गई है। वर्तमान में छह लैब सहायक शत्रुघ्न प्रसाद, लिबास राम, सुरेन्द्र पांडेय, सुरेश, उमाशंकर शुक्ल, विद्युत कुमार हैं। शासन से आदेश के अनुसार सभी को अस्पताल में भर्ती मरीजों की जांच के लिए मरीज के बेड तक जाकर ब्लड का कलेक्शन करना है। लेकिन काेई भी यह काम नहीं कर रहा है।
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अस्पताल में कुल कितने वार्ड और बेड
मऊ। जिला अस्पताल में मरीजों को उपचार के लिए 100 बेड के साथ पीआईसीयू में 10 और एनआरसी में 10 बेड लगाए गए है। यह सभी बेड अस्पताल के 20 वार्ड में लगे है। अभी मौैसम में बदलाव से अस्पताल के सभी वार्ड में मरीज भर्ती है। वायरल बढ़ने के कारण मरीजों की जांच भी हो रही है। चिकित्सक के परामर्श पर मरीज भी भर्ती हो रहे है।
क्या कहते हैं भर्ती मरीज
मऊ। जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती ब्रह्मस्थान निवासी रीता देवी, गाजीपुर के मदनपुर निवासी मंशा यादव, परदहां ब्लाक के पिपरीड़ीह निवासी सुमन यादव, नगर के कोल्हाड़ निवासी सुमन ने बताया कि बुखार होने के बाद चिकित्सक के परामर्श पर भर्ती होने की सलाह दी गई। भर्ती के दौरान चिकित्सक ने खून की जांच कराने के लिए कहा। जांच लैब तक जाकर ही कराना पड़ा। किसी भी लैब सहायक ने वार्ड में आकर ब्लड का सैंपल नहीं लिया।
कोट
अस्पताल के सभी कर्मियों को मरीज के उपचार के लिए काम करना है। इसकी जानकारी नहीं है, पूरे मामले की जांच होगी, जो भी कार्य में लापरवाही करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डा. एपी गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल
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नगर सहित जिले के दूर दराज मरीजों को उपचार के लिए मुख्यालय पर जिला अस्पताल की नींव पूर्व सांसद कल्पनाथ राय ने तीन दशक पहले रखी थी। अस्पताल की स्थापना से लेकर अभी तक यहां अनेक विभाग बनाए गए है, जिसका लाभ मरीजों को मिलता है। लेकिन पिछले कई साल से कर्मियों की लापरवाही से मरीजों काे परेशानी भी उठानी पड़ रही है।
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जिला अस्पताल के दूसरे तल पर लैब बनाया गया है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को यही पर जाकर जांच करानी पड़ती है। यही हाल भर्ती होने वाले मरीजों का भी है, या तो मरीज को अस्पताल के दूसरे तल पर जाने के लिए कुल 21 सीढ़ी का सफर तय करना पड़ता है या गंरीर होने पर भर्ती मरीज का वार्ड ब्वाय या प्रशिक्षुओं द्वारा खून निकालकर मरीज के तीमारदार को दे दिया जाता है।
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लैब सहायकों के लिए नियम
मऊ। मरीजों का सही प्रकार से उपचार मिल इसके लिए लैब सहायक की नियुक्ति की गई है। वर्तमान में छह लैब सहायक शत्रुघ्न प्रसाद, लिबास राम, सुरेन्द्र पांडेय, सुरेश, उमाशंकर शुक्ल, विद्युत कुमार हैं। शासन से आदेश के अनुसार सभी को अस्पताल में भर्ती मरीजों की जांच के लिए मरीज के बेड तक जाकर ब्लड का कलेक्शन करना है। लेकिन काेई भी यह काम नहीं कर रहा है।
अस्पताल में कुल कितने वार्ड और बेड
मऊ। जिला अस्पताल में मरीजों को उपचार के लिए 100 बेड के साथ पीआईसीयू में 10 और एनआरसी में 10 बेड लगाए गए है। यह सभी बेड अस्पताल के 20 वार्ड में लगे है। अभी मौैसम में बदलाव से अस्पताल के सभी वार्ड में मरीज भर्ती है। वायरल बढ़ने के कारण मरीजों की जांच भी हो रही है। चिकित्सक के परामर्श पर मरीज भी भर्ती हो रहे है।
क्या कहते हैं भर्ती मरीज
मऊ। जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती ब्रह्मस्थान निवासी रीता देवी, गाजीपुर के मदनपुर निवासी मंशा यादव, परदहां ब्लाक के पिपरीड़ीह निवासी सुमन यादव, नगर के कोल्हाड़ निवासी सुमन ने बताया कि बुखार होने के बाद चिकित्सक के परामर्श पर भर्ती होने की सलाह दी गई। भर्ती के दौरान चिकित्सक ने खून की जांच कराने के लिए कहा। जांच लैब तक जाकर ही कराना पड़ा। किसी भी लैब सहायक ने वार्ड में आकर ब्लड का सैंपल नहीं लिया।
कोट
अस्पताल के सभी कर्मियों को मरीज के उपचार के लिए काम करना है। इसकी जानकारी नहीं है, पूरे मामले की जांच होगी, जो भी कार्य में लापरवाही करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डा. एपी गुप्ता, सीएमएस जिला अस्पताल