{"_id":"645698f823022b69c5019964","slug":"it-is-the-responsibility-of-the-advocates-to-maintain-the-dignity-of-the-courts-mau-news-c-20-1-190758-2023-05-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mau News: अदालतों की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी अधिवक्ताओं की- न्यायमूर्ति गौतम चौधरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mau News: अदालतों की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी अधिवक्ताओं की- न्यायमूर्ति गौतम चौधरी
विज्ञापन
मऊ। सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के पुस्तकालय भवन में शनिवार को कार्यक्रम का आयोजन कर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति व जिले के प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति गौतम चौधरी का अधिवक्ताओं ने स्वागत किया। इस दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शमसुल हसन और महामंत्री हरिद्वार राय ने उन्हें स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।
अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने कहा कि देश में न्यायपालिका पर लोगों का बहुत भरोसा है। अदालत की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी अधिवक्ताओं की है। उन्होंने कहा कि पेशबंदी करके अदालतों में तारीख लगवाकर मुकदमे को न खींचे, मुकदमों के त्वरित निस्तारण का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि लोगों को जब कहीं न्याय नहीं मिलता तो वह अदालत की तरफ रूख करता है। उन्होंने कहा कि किसी चीज की भी सीमा होती है। मुकदमे को टरकाने से न्यायिक व्यवस्था चरमरा जाती है। मुकदमों का निस्तारण कभी वादी के पक्ष में तो कभी प्रतिवादी के पक्ष में होगा, इससे पीड़ा होगी। लेकिन न्याय व्यवस्था सुदृढ़, स्वतंत्र और अच्छी चले इसके लिए तीन बातें ध्यान रखनी चाहिए। विद्वान अधिवक्ता है तो बचत, वाणी और कर्तव्य में यह दिखना चाहिए कि आप अधिवक्ता हैं। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन में ऐसे बहुत अधिवक्ता हैं जो काली कोट में दूसरा व्यवसाय करते हैं। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार करें, जो अधिवक्ता के व्यवसाय को गंदा करते हैं।
अधिवक्ताओं से कहा कि वह सकारात्मक सोच रखें, विपरीत परिस्थितियों में अधिवक्ता कार्य करते हैं। 70 प्रतिशत अधिवक्ता टीन शेड में बैठकर कार्य करता है। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारी न्यायिक दृष्टिकोण से मुकदमे के सामाजिक स्थिति और हालात का मूल्यांकन करता है। कहा कि जब तक इंसान है और अकलमंद है, तब तक वकालत ऐसी चीज है कभी खत्म नहीं होगी। कहा कि जितना त्वरित न्याय होगा, तो लोगों के अंदर न्याय के प्रति आस्था बढ़ेगी।
विज्ञापन
जिला जज रामेश्वर ने बार एसोसिएशन में प्रशासनिक न्यायमूर्ति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बार की ओर से जो भी समस्याएं पानी, बाथरूम, न्यायिक अधिकारियों के बारे में बताई गई है। प्रशासनिक न्यायमूर्ति और उच्च न्यायालय के निर्देशन में कार्य चल रहा है। जितनी भी समस्याएं हैं, उसका निदान खोजने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान वाहन दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी अनिल कुमार वशिष्ठ, एडीजे अशोक कुमार, विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एडीजे अभिनय कुमार मिश्रा, सीजेएम श्वेता चौधरी, सहित काफी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। संचालन बार के महामंत्री हरिद्वार राय ने किया।
विज्ञापन
अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने कहा कि देश में न्यायपालिका पर लोगों का बहुत भरोसा है। अदालत की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी अधिवक्ताओं की है। उन्होंने कहा कि पेशबंदी करके अदालतों में तारीख लगवाकर मुकदमे को न खींचे, मुकदमों के त्वरित निस्तारण का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि लोगों को जब कहीं न्याय नहीं मिलता तो वह अदालत की तरफ रूख करता है। उन्होंने कहा कि किसी चीज की भी सीमा होती है। मुकदमे को टरकाने से न्यायिक व्यवस्था चरमरा जाती है। मुकदमों का निस्तारण कभी वादी के पक्ष में तो कभी प्रतिवादी के पक्ष में होगा, इससे पीड़ा होगी। लेकिन न्याय व्यवस्था सुदृढ़, स्वतंत्र और अच्छी चले इसके लिए तीन बातें ध्यान रखनी चाहिए। विद्वान अधिवक्ता है तो बचत, वाणी और कर्तव्य में यह दिखना चाहिए कि आप अधिवक्ता हैं। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन में ऐसे बहुत अधिवक्ता हैं जो काली कोट में दूसरा व्यवसाय करते हैं। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार करें, जो अधिवक्ता के व्यवसाय को गंदा करते हैं।
विज्ञापन
अधिवक्ताओं से कहा कि वह सकारात्मक सोच रखें, विपरीत परिस्थितियों में अधिवक्ता कार्य करते हैं। 70 प्रतिशत अधिवक्ता टीन शेड में बैठकर कार्य करता है। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारी न्यायिक दृष्टिकोण से मुकदमे के सामाजिक स्थिति और हालात का मूल्यांकन करता है। कहा कि जब तक इंसान है और अकलमंद है, तब तक वकालत ऐसी चीज है कभी खत्म नहीं होगी। कहा कि जितना त्वरित न्याय होगा, तो लोगों के अंदर न्याय के प्रति आस्था बढ़ेगी।
विज्ञापन
जिला जज रामेश्वर ने बार एसोसिएशन में प्रशासनिक न्यायमूर्ति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बार की ओर से जो भी समस्याएं पानी, बाथरूम, न्यायिक अधिकारियों के बारे में बताई गई है। प्रशासनिक न्यायमूर्ति और उच्च न्यायालय के निर्देशन में कार्य चल रहा है। जितनी भी समस्याएं हैं, उसका निदान खोजने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान वाहन दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी अनिल कुमार वशिष्ठ, एडीजे अशोक कुमार, विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एडीजे अभिनय कुमार मिश्रा, सीजेएम श्वेता चौधरी, सहित काफी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। संचालन बार के महामंत्री हरिद्वार राय ने किया।