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इंदारा-दोहरीघाट रेलामार्ग का शिलान्यास के पांच वर्ष बाद भी अधूरा

Mon, 05 Jul 2021 10:45 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 05 Jul 2021 10:45 PM IST
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Indara-Dohrighat railway line is incomplete even after five years of foundation
मऊ। कोरोना संक्रमण काल की विषम परिस्थिति में कई विकास कार्यों को पूरा करने का दावा करने वाले रेलवे प्रशासन का जिले में विकास कार्यों को पूरा कराने को लेकर रुचि नहीं दिख रही है। यहां वर्ष 2016 में स्वीकृत इंदारा-दोहरीघाट आमान परिवर्तन का काम शिलान्यास के पांच साल बीतने के बाद भी अधूरा पड़ा है। इसे वर्ष 2018 में पूरा किया जाना था लेकिन समय पर काम पूरा नहीं होने के चलते एक फिर मियाद बढ़कर वर्ष 2019 कर दी गई। इसके बाद भी काम अधूरा है। अब इसे पूरा करने का लक्ष्य 2022 कर दिया है।
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वर्ष 2014 के बाद रेल बजट में इंदारा-दोहरीघाट तक छोटी रेल लाइन को बदलकर बड़ी लाइन में बदलने के लिए आमान परिवर्तन की स्वीकृति मिली। 35 किमी लंबे रेलमार्ग के लिए 165 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ। लोगों की उम्मीदों को उस समय पंख लगा, जब 20 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने इंदारा जंक्शन पर आमान परिवर्तन की आधारशिला रखी।
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इस दौरान मौजूद पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजीव मिश्रा ने आमान परिवर्तन का यह कार्य वर्ष 2018 में पूरा होने की बात कही थी। लेकिन इसके बाद भी शिलान्यास होने के करीब दो वर्ष बाद इस पर कार्य शुरू किया गया। बीते एक फरवरी 2018 को केंद्र सरकार द्वारा पेश बजट में आमान परिवर्तन के लिए 100 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की गई थी।
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साथ ही रेलवे को यह कार्य इंदारा-दोहरीघाट अमान परिवर्तन कार्य वर्ष 2019 में पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था। पांच वर्ष बीतने के बाद अब तक 60 फीसदी ही काम पूरा हो पाया है। अधूरे पड़े कार्यों को पूरा कराने के लिए कई बार जिले के अलग अलग संगठनों द्वारा रेलवे के अधिकारियों को पत्रक देने के साथ धरना प्रदर्शन कर चुके है। निर्माण योजना के पूरा होने को लेकर आमान परिवर्तन के एईएन अनिल कुमार सिंह ने बताया कि लगभग 70 फीसदी कार्य पूरा चुका है। दोहरीघाट-अमिला के बीच पुल का निर्माण करने के बाद मार्च-अप्रैल 2022 तक कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
बजट का अभाव, लेटलतीफी भी एक वजह
मऊ। आमान परिवर्तन का कार्य ऐसे तो वर्ष 2019 तक पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन कभी बजट का अभाव तो कभी जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते यह लंबा खिंचता दिख रहा है। जहां बजट न होने से शिलान्यास करने के दो वर्ष से अधिक समय बाद कार्य शुरू किया गया। जब कार्य शुरू किया गया तो एक वर्ष के भीतर इसे पूूरा करने का लक्ष्य भले ही निर्धारित किया गया लेकिन बीच बीच में बजट की कमी के चलते कई-कई माह तक कार्य बंद होता रहा।
रेल बस बंद होने से यात्रियों को परेशानी
कोपागंज (मऊ)। रेलवे द्वारा एक फरवरी 2018 को इस रेलमार्ग पर संचालित होने वाले रेलबस का संचालन बंद कर आमान परिवर्तन का कार्य नवंबर 2018 में शुरू किया गया। इंदारा से दोहरीघाट के बीच चलने वाली यह रेल बस प्रतिदिन दिन में चार चक्कर लगाती थी। इस दौरान इसमें कोपागंज, घोसी, दोहरीघाट ब्लाक के 100 गांवों से प्रतिदिन 200 से ज्यादा लोग यात्रा करते थे। मामूली टिकट दस रुपया होने के चलते इस रूट के लोगों की रेल बस पहली पंसद हुआ करती थी। रेल बस का संचालन बंद होने से लोगों में काफी नाराजगी थी, इसको लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन भी हुआ। बस का संचालन बंद होने से अब इन ब्लाकों के लोगों को आवागमन के लिए बस, निजी वाहन पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
शीघ्र पूरा किया जाए आमान परिवर्तन प्रोजेक्ट
इंदारा दोहरीघाट रेल मार्ग का आमान परिवर्तन समय सीमा बीत जाने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा न होने से क्षेत्र के विकास की गति धीमी हो गई है। रेल मंत्री को पत्र भेजकर प्रोजेक्ट को अविलंब पूरा करने की गुहार लगाई है।
इस संबंध में अजीत पांडेय का कहना है कि कार्यदायी संस्था द्वारा कराया जा रहा काम गति काफी धीमी होने के कारण विलंब हो रहा है। लापरवाही बरतने वाले कार्यदायी संस्था के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं के आकाश पांडेय का कहना था कि प्रोजेक्ट का कार्य दो वर्ष पूर्व होना था, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इससे विकास की गति धीमी हो गई है।इसके चलते लोगों को काफी कठिनाई हो रही है।

बबलू का कहना है कि जब कार्य तेजी के साथ प्रारंभ हुआ तो हम लोगों को यह भरोसा हो गया था कि अब जल्द ही क्षेत्र के दिन बहुरेंगे लेकिन जिस रफ़्तार के साथ निर्माण कार्य हो रहा है। जितेंद्र गोयल का कहना था कि रेल बस का भाड़ा टैक्सी से कम होता है। ट्रेन के नहीं चलने से हम गरीब मजदूर बुनकर लोगो को अधिक किराया देकर आना जाना पड़ रहा है।
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