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निजी स्कूलों की बढ़ती फीस ने बढ़ाई मुसीबत
ब्यूरो/अमर उजाला,मऊ
Updated Fri, 07 Apr 2017 01:09 AM IST
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तेजी से बढ़ रही महंगाई के बीच निजी स्कूल संचालक अभिभावकों पर बोझ बढ़ाते ही जा रहे हैं। कई नामचीन विद्यालयों की फीस उच्च शिक्षण संस्थानों से भी ज्यादा है। अधिकांश सरकारी विद्यालयों में अव्यवस्था के चलते इन निजी स्कूलों को लाभ मिल रहा है। कभी कभार अभिभावक शिकायत करते भी हैं तो अधिकारी या प्रशासन अनसुनी कर देता है। वहीं स्कूल संचालक नाम मात्र फीस बढ़ाने की बात कह रहे हैं।
जिले में आईसीएसई, सीबीएसई, यूपी बोर्ड से संबद्ध सहित दो हजार से अधिक विद्यालय हैं।अधिकांश सरकारी विद्यालयों में दिन प्रतिदिन शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर गिरने से निजी स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराने की ओर लोगों की रुचि तेजी से बढ़ रही है। कई विद्यालयों में नर्सरी से बारहवीं तक की कक्षाओं में एडमिशन के लिए ली जाने वाली फीस उच्च शिक्षा संस्थानों की फीस से कई गुना ज्यादा है।
निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का वार्षिक बजट कम से कम 30 हजार से 50 हजार रुपये से भी ज्यादा तक पहुंच जाता है।
प्रबुद्ध वर्ग की मानें तो निजी स्कूलों में भारी भरकम बजट उच्च शिक्षा में प्रोफेशनल कोर्सेज की फीस से भी ज्यादा है। अधिकारी भी विद्यालयों में जांच कराए जाने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं।
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जिले में आईसीएसई, सीबीएसई, यूपी बोर्ड से संबद्ध सहित दो हजार से अधिक विद्यालय हैं।अधिकांश सरकारी विद्यालयों में दिन प्रतिदिन शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर गिरने से निजी स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराने की ओर लोगों की रुचि तेजी से बढ़ रही है। कई विद्यालयों में नर्सरी से बारहवीं तक की कक्षाओं में एडमिशन के लिए ली जाने वाली फीस उच्च शिक्षा संस्थानों की फीस से कई गुना ज्यादा है।
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निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का वार्षिक बजट कम से कम 30 हजार से 50 हजार रुपये से भी ज्यादा तक पहुंच जाता है।
प्रबुद्ध वर्ग की मानें तो निजी स्कूलों में भारी भरकम बजट उच्च शिक्षा में प्रोफेशनल कोर्सेज की फीस से भी ज्यादा है। अधिकारी भी विद्यालयों में जांच कराए जाने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं।
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