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Mau News: 30 साल में 2900 एकड़ जमीन नदी में समाई

Mon, 09 Jun 2025 12:05 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 09 Jun 2025 12:05 AM IST
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In 30 years, 2900 acres of land got submerged in the river
लगातार 31 सालों से हो रही कटान में 2900 एकड़ जमीन कटान में विलीन हो गई। नगर की भौगोलिक स्थिति बिगड़ गई है। सरयू नदी की प्रलयकारी लहरों में धरोहरें समाती गईं। पूर्व में घाट के नाम से विख्यात दोहरीघाट में अब एक ही रामघाट स्नान करने लायक नहीं रह गया है।
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वर्ष 1990 में सरयू की भयंकर कटान शुरू हुई और देखते ही देखते संत नागा बाबा की कुटी कुआं बड़े-बड़े वृक्ष नदी की धारा में समाते चले गए। सिंचाई विभाग की तरफ से कटान प्रोजेक्ट चल रहा है। लेकिन कटान पीड़ितों को राहत मिलेगी यह तो नदी में उफान आने पर ही पता चल सकेगा।
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सरयू नदी में प्रतिवर्ष बाढ़ आने से नई बाजार, नौली, धनौली रामपुर, हरधौली, चिऊंटीडांड़ बुढावर, बहादुरपुर, बीबीपुर, अमीरा, चौराडीह, बेलौली, कोरौली, रसूलपुर, सूरजपुर सहित मधुबन तहसील के लोग प्रतिवर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलने को विवश हैं। बाढ़ और कटान झेलना इनकी आदत बन चुकी है। सब कुछ भगवान भरोसे छोड़कर गांववासी अपने भाग्य को कोसते रहते हैं। सिंचाई विभाग ने कटान रोकने का प्रयास किया लेकिन मां सरयू के कहर कोई नहीं रोक पाया।
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वर्ष 1992 में गौरीशंकर घाट पर कटान शुरू हुआ और नगर की अनेक ऐतिहासिक धरोहरें गौरीशंकर घाट, गौरी शंकर मंदिर, राम जानकी मंदिर, शिवालय, डोमराज का मकान, श्मशान घाट, खड़ेसरी महाराज का मंदिर कटकर जहां सरयू की धारा में विलीन हो गए। संत खाकी बाबा की कुटी, झमरा, जानकी घाट कटकर धारा में विलीन हो गए। यह वही जानकी घाट है जहां पर माता सीता विश्राम के बाद स्नान की थीं। वर्तमान समय में वहां की सीढ़ियां टूट गई हैं।

प्रशासन की तरफ से यहां स्नान करना मना है का चेतावनी बोर्ड लगा दिया गया है। एक-एक करके सभी घाट नदी की धारा में विलीन हो गए।
हजारों एकड़ कृषि उपयोगी जमीन नदी में विलीन हो चुकी हैं। इस संबंध में मुक्ति धाम सेवा संस्थान के प्रबंधक गुलाब चंद गुप्त, अशोक साहू, मनोज जायसवाल ने घाटों के निर्माण के साथ-साथ जनता की समस्याओं का निराकरण हो सके।
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