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... तो अपना हो जाएगा आशियाना
ब्यूरो/अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 26 May 2016 02:02 AM IST
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मालिकाना हक
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प्रदेश सरकार पट्टे पर दी गई सरकारी जमीन या अवैध कब्जेदारों को जमीन का मालिकाना हक देने की तैयारी कर रही है। राजस्व परिषद की ओर से जल्द ही इसके लिए नियमावली लाई जाएगी। यदि ऐसा होता है तो जिला मुख्यालय पर मौजूद बुनकर और सिंधी कालोनी के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। ऐसी खबर से दोनों कालोनी के लोगों में मालिकाना हक की आस जगी है। बुनकर कालोनी में रहते हुए किशोर से बुजुर्ग हो गए तो कितने मर गए। कई सरकारें आईं और चली गईं लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका है। अब इनमें आस जगी है।
वर्ष 1963 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बुनकरों के लिए एक कालोनी बसाने का निर्णय लिया गया। हथकरघा विभाग की तरफ से उस समय पंजीकृत 100 बुनकरों को शहर से लगभग चार किमी दूर नरईबांध मौजे में हाइवे के किनारे बसाने की योजना बनी। 30 फुट चौडे़ और 60 फुट लंबेे भूखंड पर दो कमरा एक बरामदा तथा शौचालय व बाथरूम बनाकर 100 बुनकरों को आवंटित कर दिया गया। उस समय ऐसे चार आवासों के बीच पानी के लिए एक हैंडपंप लगाये गए। हालांकि अब तो यहां बिजली से लेकर वाटर सप्लाई तक की व्यवस्था है।
इंटरलाकिंग और पक्की नालियों से प्रत्येक आवास जुड़े हैं। दो बड़े बड़े खुले पार्क, कलेक्ट्रेट की ठीक सामने की खुली जगह पूूरे शहर में कहीं भी नहीं है लेकिन इन आवासों का कोई कानूनी मालिकाना हक नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप यहां रहने वाले बुनकर अभी भी अवैध की श्रेणी में है। इसी क्रम में नगर क्षेत्र का सिंधी कालोनी है, यहां रहने वाले अमित माधव ने बताया कि आजादी के बाद से यहां पर आकर हमारे पूर्वज बसे। शुरू-शुरू में नगर पालिका ने मालिकाना हक जताया, वहां किराया जामा किया गया लेकिन बाद में विवाद के बाद वह भी बंद हो गया।
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वर्ष 1963 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बुनकरों के लिए एक कालोनी बसाने का निर्णय लिया गया। हथकरघा विभाग की तरफ से उस समय पंजीकृत 100 बुनकरों को शहर से लगभग चार किमी दूर नरईबांध मौजे में हाइवे के किनारे बसाने की योजना बनी। 30 फुट चौडे़ और 60 फुट लंबेे भूखंड पर दो कमरा एक बरामदा तथा शौचालय व बाथरूम बनाकर 100 बुनकरों को आवंटित कर दिया गया। उस समय ऐसे चार आवासों के बीच पानी के लिए एक हैंडपंप लगाये गए। हालांकि अब तो यहां बिजली से लेकर वाटर सप्लाई तक की व्यवस्था है।
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इंटरलाकिंग और पक्की नालियों से प्रत्येक आवास जुड़े हैं। दो बड़े बड़े खुले पार्क, कलेक्ट्रेट की ठीक सामने की खुली जगह पूूरे शहर में कहीं भी नहीं है लेकिन इन आवासों का कोई कानूनी मालिकाना हक नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप यहां रहने वाले बुनकर अभी भी अवैध की श्रेणी में है। इसी क्रम में नगर क्षेत्र का सिंधी कालोनी है, यहां रहने वाले अमित माधव ने बताया कि आजादी के बाद से यहां पर आकर हमारे पूर्वज बसे। शुरू-शुरू में नगर पालिका ने मालिकाना हक जताया, वहां किराया जामा किया गया लेकिन बाद में विवाद के बाद वह भी बंद हो गया।
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