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फुटकर होते तो शायद बच जाता मासूम
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
Updated Thu, 10 Nov 2016 11:40 PM IST
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पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट मेडिकल स्टोर वाले के न लेने से दवा के अभाव में गुरुवार को आठ माह के मासूम राज की मौत हो गई। अस्पताल वालों ने भी बिल के पेमेंट में हजार और पांच सौ के नोट न लेते हुए बच्चे के शव को रोक लिया।
इसके बाद बच्चे का पिता पहले तो एक हजार और पांच सौ के नोट को लेकर इधर-उधर भटकता रहा फिर जेवरात एक दूकान पर गिरवी रखकर कुछ रुपये जुटाए। इसी दौरान घरवालों के हंगामा करने पर जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप पर अस्पताल से मासूम के शव को घरवालों को सुपुर्द कराया। उधर अस्पताल प्रशासन ने दवा के अभाव में मौत की बात को गलत बताया है।
हलधरपुर थाना क्षेत्र के सिंधवल निवासी शिवहरि गिरी की पुत्री के आठ माह के पुत्र को आठ नवंबर को निमोनिया हो गया।
घरवालों ने उसे नगर के चांदमारी इमिलिया स्थित फातिमा अस्पताल में भर्ती कराया। बच्चे को भर्ती कराने के बाद रात में जैसे ही पांच सौ और एक हजार रुपये नोट पर पाबंदी की खबर आई घर के लोग परेशान हो उठे। शिवहरि का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बड़े नोटों को लेने से इंकार कर दिया।
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काफी प्रयास के बाद कुछ दवाएं तो मिली, लेकिन मासूम के इलाज में फुटकर पैसे को लेकर लगातार दबाव बनाया जाता रहा। ऐसे में वह लोग पैसे की जुगाड़ में लग गए। रिश्तेदारी से लेकर हर जगह कहीं से भी फुटकर पैसों की मदद नहीं मिली। गुरुवार को आखिरकार बैंक के खुलने से पहले ही मासूम की मौत हो गई।
दूसरी ओर अस्पताल ने भुगतान न होने तक मासूम के शव को रोक लिया। पीड़ित ने थक हारकर घर के जेवरात गिरवी रखकर एक व्यक्ति के यहां से कुछ पैसे का इंतजाम किया। इधर शव को लेकर घरवालों का धैर्य जवाब देने लगा तो उन्होंने हंगामा कर दिया। सूचना पर मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट अमरनाथ राय के साथ सीओ नगर पंकज सिंह पहुंचे। सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाई और मासूम के शव को घरवालों के सुपुर्द कराया।
दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन का कहना था कि रुपये के कारण इलाज न करने का आरोप निराधार हैं। इलाज में पैसे की कमी आड़े नहीं आई और दवा दी जाती रही। पैसे के इंतजाम के लिए बोला गया था।
इसके बाद बच्चे का पिता पहले तो एक हजार और पांच सौ के नोट को लेकर इधर-उधर भटकता रहा फिर जेवरात एक दूकान पर गिरवी रखकर कुछ रुपये जुटाए। इसी दौरान घरवालों के हंगामा करने पर जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप पर अस्पताल से मासूम के शव को घरवालों को सुपुर्द कराया। उधर अस्पताल प्रशासन ने दवा के अभाव में मौत की बात को गलत बताया है।
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हलधरपुर थाना क्षेत्र के सिंधवल निवासी शिवहरि गिरी की पुत्री के आठ माह के पुत्र को आठ नवंबर को निमोनिया हो गया।
घरवालों ने उसे नगर के चांदमारी इमिलिया स्थित फातिमा अस्पताल में भर्ती कराया। बच्चे को भर्ती कराने के बाद रात में जैसे ही पांच सौ और एक हजार रुपये नोट पर पाबंदी की खबर आई घर के लोग परेशान हो उठे। शिवहरि का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बड़े नोटों को लेने से इंकार कर दिया।
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काफी प्रयास के बाद कुछ दवाएं तो मिली, लेकिन मासूम के इलाज में फुटकर पैसे को लेकर लगातार दबाव बनाया जाता रहा। ऐसे में वह लोग पैसे की जुगाड़ में लग गए। रिश्तेदारी से लेकर हर जगह कहीं से भी फुटकर पैसों की मदद नहीं मिली। गुरुवार को आखिरकार बैंक के खुलने से पहले ही मासूम की मौत हो गई।
दूसरी ओर अस्पताल ने भुगतान न होने तक मासूम के शव को रोक लिया। पीड़ित ने थक हारकर घर के जेवरात गिरवी रखकर एक व्यक्ति के यहां से कुछ पैसे का इंतजाम किया। इधर शव को लेकर घरवालों का धैर्य जवाब देने लगा तो उन्होंने हंगामा कर दिया। सूचना पर मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट अमरनाथ राय के साथ सीओ नगर पंकज सिंह पहुंचे। सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल प्रशासन को फटकार लगाई और मासूम के शव को घरवालों के सुपुर्द कराया।
दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन का कहना था कि रुपये के कारण इलाज न करने का आरोप निराधार हैं। इलाज में पैसे की कमी आड़े नहीं आई और दवा दी जाती रही। पैसे के इंतजाम के लिए बोला गया था।