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तीन को सात वर्ष का सश्रम कारावास
ब्यूरो,अमर उजाला,मऊ
Updated Wed, 23 Nov 2016 10:23 PM IST
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर दो बीरनायक सिंह ने हत्या के प्रयास के मामले में नामजद छह आरोपियों में तीन को दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष का सश्रम कारावास की सजा के साथ ही दस-दस हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित किया। वही एक आरोपी को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया।
एक आरोपी मदन सिंह की मौत हो जाने के चलते उसके विरु द्ध मुकदमें की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। एक आरोपी धनंजय के नाबालिक होने के चलते उसकी पत्रावली अलग कर किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र के डुमरांव गांव का है। वादी मुकदमा जयकिशुन सिंह पुत्र मंगला सिंह की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई।
इसमें गांव के ही सुशीला सिंह पत्नी राजकशोर सिंह, राजकिशोर सिंह पुत्र रामा, धनंजय सिंह पुत्र राजकिशोर, मदन सिंह पुत्र विजयबहादुर सिंह, मंडलेश सिंह पुत्र मदन सिंह व सुशील सिंह पुत्र मदन सिंह को आरोपी बनाया गया। वादी का आरोप था कि 17 अक्तूबर 2005 को जमीन की रंजिश को लेकर आरोपीगण ने सुशीला के ललकारने पर तमंचे से अजय को गोली मार दिया। जिससे वह घायल हो गया।
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उसे बचाने मां शारदा देवी व रेखा गई तो आरोपीगण उन्हें भी मार पीटकर घायल कर दिए। इस आधार पर पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैैरवी करते हुए एडीजीसी नंदलाल राम ने कुल सात गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से दो गवाह डा. एसपी चौधरी व पंचानंद सिंह को पेश कर अपना पक्ष रखा कि उन्हे झूठा फंसाया गया है।
एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि मौखिक साक्ष्य व लिखित साक्ष्य को बढ़ाचढ़ा कर सुशीला सिंह को घटना में शामिल होना दर्शाया गया है। ऐसे में सुशीला सिंह को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया। साथ ही राजकिशोर सिंह, मंडलेश सिंह व सुशील सिंह को दोषी पाया।
दोषी पाए जाने के बाद तीनों को हत्या के प्रयास में सात वर्ष का कठोर कारावास की सजा के साथ ही दस-दस हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। वही मारपीट के मामले में छह माह की सजा, गाली देने में छह माह, धमकी देने में व बल्वा करने में एक-एक वर्ष का कठोर कारावास की सजा का निर्णय सुनाया। अर्थदंड न देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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एक आरोपी मदन सिंह की मौत हो जाने के चलते उसके विरु द्ध मुकदमें की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। एक आरोपी धनंजय के नाबालिक होने के चलते उसकी पत्रावली अलग कर किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र के डुमरांव गांव का है। वादी मुकदमा जयकिशुन सिंह पुत्र मंगला सिंह की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई।
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इसमें गांव के ही सुशीला सिंह पत्नी राजकशोर सिंह, राजकिशोर सिंह पुत्र रामा, धनंजय सिंह पुत्र राजकिशोर, मदन सिंह पुत्र विजयबहादुर सिंह, मंडलेश सिंह पुत्र मदन सिंह व सुशील सिंह पुत्र मदन सिंह को आरोपी बनाया गया। वादी का आरोप था कि 17 अक्तूबर 2005 को जमीन की रंजिश को लेकर आरोपीगण ने सुशीला के ललकारने पर तमंचे से अजय को गोली मार दिया। जिससे वह घायल हो गया।
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उसे बचाने मां शारदा देवी व रेखा गई तो आरोपीगण उन्हें भी मार पीटकर घायल कर दिए। इस आधार पर पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैैरवी करते हुए एडीजीसी नंदलाल राम ने कुल सात गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से दो गवाह डा. एसपी चौधरी व पंचानंद सिंह को पेश कर अपना पक्ष रखा कि उन्हे झूठा फंसाया गया है।
एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि मौखिक साक्ष्य व लिखित साक्ष्य को बढ़ाचढ़ा कर सुशीला सिंह को घटना में शामिल होना दर्शाया गया है। ऐसे में सुशीला सिंह को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया। साथ ही राजकिशोर सिंह, मंडलेश सिंह व सुशील सिंह को दोषी पाया।
दोषी पाए जाने के बाद तीनों को हत्या के प्रयास में सात वर्ष का कठोर कारावास की सजा के साथ ही दस-दस हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। वही मारपीट के मामले में छह माह की सजा, गाली देने में छह माह, धमकी देने में व बल्वा करने में एक-एक वर्ष का कठोर कारावास की सजा का निर्णय सुनाया। अर्थदंड न देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।