{"_id":"641f3f0bfa118464450b5b32","slug":"goddess-kushmanda-worshiped-in-durga-temples-mau-news-c-20-1-121228-2023-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुर्गा मंदिरों में हुई देवी कुष्मांडा की आराधना:","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुर्गा मंदिरों में हुई देवी कुष्मांडा की आराधना:
विज्ञापन
मऊ। नवरात्र के चौथे दिन शनिवार को दुर्गा मंदिरों में मां दुर्गा केेेेेे चौथे स्वरूप देवी कुष्मांडा की आराधना की गई। नगर सहित जिले के प्रमुख देवी मंदिरों श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
नवरात्र के चौथे दिन नगर के शीतला माता मंदिर, रोडवेज स्थित मां दुर्गा मंदिर, फातिमा तिराहा स्थित दुर्गा मंदिर, वनदेवी धाम, निधियांव गांव का अष्टभुजी मंदिर, मांदी सिपाह स्थित मां कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों मेें मां दुर्गा के चौथे स्वरूप चतुर्थ कुष्मांडा की आराधना की गई। शीतला माता मंदिर, वनदेवी मंदिर तथा मां कोयल मर्याद भवानी मंदिर में मां का दर्शन पाने के लिए तड़के से ही लंबी लाइन लगी रही।
मान्यता है कि नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा चतुर्थ कुष्मांडा के रूप में मंदिरों में विराजमान होती हैं। बोझी बाजार: नवरात्र के चौथे दिन क्षेत्र के मांदी सिपाह स्थित कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर में सुबह से ही भीड़ रही। रतनपुरा: बाजार सहित क्षेत्र के पहसा, चकरा, हलधरपुर, बिलौझा, ठैचा सहित विभिन्न इलाकों में स्थित मंदिरों में लोगों ने व्रत रखकर पारंपरिक तौर से देवी की पूजा की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
नवरात्र के चौथे दिन नगर के शीतला माता मंदिर, रोडवेज स्थित मां दुर्गा मंदिर, फातिमा तिराहा स्थित दुर्गा मंदिर, वनदेवी धाम, निधियांव गांव का अष्टभुजी मंदिर, मांदी सिपाह स्थित मां कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर सहित विभिन्न देवी मंदिरों मेें मां दुर्गा के चौथे स्वरूप चतुर्थ कुष्मांडा की आराधना की गई। शीतला माता मंदिर, वनदेवी मंदिर तथा मां कोयल मर्याद भवानी मंदिर में मां का दर्शन पाने के लिए तड़के से ही लंबी लाइन लगी रही।
विज्ञापन
मान्यता है कि नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा चतुर्थ कुष्मांडा के रूप में मंदिरों में विराजमान होती हैं। बोझी बाजार: नवरात्र के चौथे दिन क्षेत्र के मांदी सिपाह स्थित कोयल मर्याद भवानी माई मंदिर में सुबह से ही भीड़ रही। रतनपुरा: बाजार सहित क्षेत्र के पहसा, चकरा, हलधरपुर, बिलौझा, ठैचा सहित विभिन्न इलाकों में स्थित मंदिरों में लोगों ने व्रत रखकर पारंपरिक तौर से देवी की पूजा की गई।
विज्ञापन