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सच्ची भक्ति भाव रखने वाले पर होती है परमात्मा की कृपा
कोपागंज नगर पंचायत के सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित भागवत कथा के अंतिम दिन प्रवचन करते स्वामी रव?
- फोटो : MAU
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मुहम्मदाबाद गोहना। भगवान की कथा सुनने से जीव की व्यथा दूर होती है। पूरे मनोयोग और अंत: करण से भगवान को याद कर और उनका ध्यान लगाने वाले मानव को जीवन में कभी भी निराश नहीं होना पड़ता है। सच्ची भक्ति पर परमात्मा की कृपा होती हे। उक्त प्रसंग की कथा अयोध्या से आए कथावाचक राम शरण दास ने भदीड़ गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि शिव कल्याणकारी देवता है। वह हमेशा अपने भक्तों के कल्याण और सुख की सोच रखते हैं। शिव और सती कथा की चर्चा करते हुए कहा कि एक बार भगवान राम की कथा का श्रवण करने के लिए शंकर पत्नी सती के साथ मृत्युलोक के दक्षिण भारत में कुंभज ऋषि के आश्रम पर पहुंचे। ऽएक बार त्रेता युग माही, शंभू गए कुंभज ऋषि पाही। संग शक्ति जग जननी भवानी, पूजा ऋषि अखिलेश्वर जानीऽ ।प्रकरण की चर्चा करते हुए कहा कि कुंभज ऋषि भगवान राम की कथा का प्रसंग सुना रहे थे। कथा का भगवान शिव ने पूरे मनोयोग और ध्यान लगाकर श्रवण किया लेकिन सती पार्वती का कथा में ध्यान नहीं लगा और वह सो गई। उन्हें राम के भगवान होने पर संशय उत्पन्न हुआ। अहम और घमंड के चलते कथा का श्रवण नहीं कर सकी जिससे आगे चलकर उन्हें तमाम प्रकार के दुखों और विपरीत परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। रामशरण दास जी महाराज ने कथा से लोगों को भाव विभोर कर दिया। इस अवसर पर प्रवीण चतुर्वेदी संतोष विनोद सिंह आदि उपस्थित रहे। कोपागंज : सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में चल रहे साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बुधवार की देर शाम मुंबई के आचार्य स्वामी रविंद्र ने कृष्ण सुदामा प्रसंग सुनाया। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और राधा का प्रेम आदर्श प्रेम है। भारी संख्या में श्रद्धालु राम-कृष्ण धुनों पर झूमते रहे। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण की लीलाओं को साधारण भाव से नहीं समझा जा सकता है। मनुष्य जितना ज्यादा भगवान कृष्ण के भक्ति के प्रति अनुरागी होगा उतना ही उसका मन उज्जवल होता जाएगा। कहा कि सच्चे प्रेम में ऊंच और नीच नहीं होती और न ही अमीरी-गरीबी होती है। वहीं, खुखुंदवा में संगीतमय भागवत कथा में आचार्य गंगाचार्य महाराज ने राधा व रुक्मिणी के समर्पण व दोनों की भावनाओं को फर्क को बड़ी ही बारीकी व रोचक तरीके से प्रस्तुत किया। कहा कि प्रेम का मतलब सिर्फ हासिल करना नहीं है, प्रेम दुनिया की सबसे पवित्र वस्तु है।
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