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बदहाली के आंसू रो रहा घोसी का औद्योगिक आस्थान
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घोसी (मऊ)। केंद्र तथा प्रदेश सरकार की तरफ से लघु उद्योग को बढ़ावा देने की तमाम कोशिशें विभागीय उदासीनता से फ्लाप साबित हो रही है। कस्बे के किसान सहकारी चीनी मिल के समीप लगभग चार एकड़ में फैला औद्योगिक आस्थान बदहाल पड़ा है। कहने को औद्योगिक आस्थान में 14 प्लॉट हैं। विभाग की तरफ से सात शेड बनाए गए थे। इनमें पांच यूनिटें लगी। लेकिन अब मात्र एक यूनिट ही संचालित हो रही है। सभी बंद चल रही है। विभाग की तरफ से देखरेख न होने से औद्योगिक आस्थान अतिक्रमण की जद में हैं। यहां सुबह से शाम तक छुट्टा पशुओं का जमघट लगा रहता है। सब कुछ जानते हुए आला अधिकारी मौन हैं।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना के तहत वर्ष 1965 में चार एकड़ में औद्योगिक आस्थान की स्थापना की गई। यहां 14 प्लाट हैं। विभाग की तरफ से यहां सात औद्योगिक शेड बनाए गए, जिसमें से पांच शेड में यूनिटें लगी। लेकिन 36 वर्ष पूर्व चार यूनिटें बंद हो गई। मात्र एक यूनिट ही संचालित हो रही है। यहां सुविधाओं का अभाव है। बिजली के तार व पोल जर्जर हो गए हैं। यहां प्रकाश की व्यवस्था तक नहीं की जा सकी है। शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है। अंधेरा होते ही अराजकतत्वों का जमघट लग जाता है। विभाग की तरफ से बनाए गए शेड जर्जर हाल में है। शेड की खिड़कियां सहित कीमती सामानों को अराजकतत्व उखाड़ ले गए। बाउंड्री क्षतिग्रस्त हो गई है।
प्लाट पर यूनिटों को लगाने का काम कागज पर ही चल रहा है। नियम के तहत दो वर्ष तक यूनिटें बंद होने की स्थिति में प्लाट निरस्त कर देने का प्रावधान है। बारिश होने पर कैंपस में पानी भर जाता है। साफ सफाई नियमित न होने से कूड़े का अंबार लगा रहता है। इस बाबत सहायक उपायुक्त उद्योग सगीर अहमद का कहना है कि यूनिटों को चालू कराने की प्रक्रिया चल रही है। बाउंड्री मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत हो गया है। जल्द ही सभी को दुरुस्त कर लिया जाएगा।
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यूनिटें चलाने के लिए नहीं है विभाग गंभीर
घोसी। कस्बा स्थित औद्योगिक आस्थान बदहाल होने से युवाओं में आक्रोश है। इस संबंध में नगर के युवा उद्यमी राजकिशन कहते हैं कि घोसी नगर से सटे औद्योगिक आस्थान विभाग की उपेक्षा से खत्म होने के कगार पर है। यहां अधिकारी के न बैठने से युवा उद्यमियों के लिए बेकार हो कर रह गया है।
करीमुद्दीनपुर निवासी युवा आशिकूंन नबी ने बताया कि चुने गए जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से यह सफेद हाथी बन कर रह गया है। यह सही हालत में रहता तो हम नौजवान यहां उद्योग लगाकर कर लोकल फार वोकल को सार्थक करते।
उद्यमी संजय सिंह परमार का कहना था कि चार एकड़ में स्थापित औद्योगिक आस्थान अधिकारियों की उदासीनता से दम तोड़ रहा है। जो यूनिट पहले से लगी थी उसमें से अधिकांश बंद हो गई है। लालफीताशाही के चलते यहां कोई उद्योग,धंधा लगाने से डर रहा है।
पूर्व प्रमुख सुजीत सिंह का कहना था कि अफसरों के साथ स्पष्ट औद्योगिक नीति के अभाव में यह समाप्त होने के कगार पर है। यह ठीक रहता तो क्षेत्र के युवा यह उद्योग लगा कर रोजगार पाने के साथ अन्य को रोजगार देते। इसको लेकर विभाग कभी गंभीर नहीं रहा।
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द्वितीय पंचवर्षीय योजना के तहत वर्ष 1965 में चार एकड़ में औद्योगिक आस्थान की स्थापना की गई। यहां 14 प्लाट हैं। विभाग की तरफ से यहां सात औद्योगिक शेड बनाए गए, जिसमें से पांच शेड में यूनिटें लगी। लेकिन 36 वर्ष पूर्व चार यूनिटें बंद हो गई। मात्र एक यूनिट ही संचालित हो रही है। यहां सुविधाओं का अभाव है। बिजली के तार व पोल जर्जर हो गए हैं। यहां प्रकाश की व्यवस्था तक नहीं की जा सकी है। शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है। अंधेरा होते ही अराजकतत्वों का जमघट लग जाता है। विभाग की तरफ से बनाए गए शेड जर्जर हाल में है। शेड की खिड़कियां सहित कीमती सामानों को अराजकतत्व उखाड़ ले गए। बाउंड्री क्षतिग्रस्त हो गई है।
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प्लाट पर यूनिटों को लगाने का काम कागज पर ही चल रहा है। नियम के तहत दो वर्ष तक यूनिटें बंद होने की स्थिति में प्लाट निरस्त कर देने का प्रावधान है। बारिश होने पर कैंपस में पानी भर जाता है। साफ सफाई नियमित न होने से कूड़े का अंबार लगा रहता है। इस बाबत सहायक उपायुक्त उद्योग सगीर अहमद का कहना है कि यूनिटों को चालू कराने की प्रक्रिया चल रही है। बाउंड्री मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत हो गया है। जल्द ही सभी को दुरुस्त कर लिया जाएगा।
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यूनिटें चलाने के लिए नहीं है विभाग गंभीर
घोसी। कस्बा स्थित औद्योगिक आस्थान बदहाल होने से युवाओं में आक्रोश है। इस संबंध में नगर के युवा उद्यमी राजकिशन कहते हैं कि घोसी नगर से सटे औद्योगिक आस्थान विभाग की उपेक्षा से खत्म होने के कगार पर है। यहां अधिकारी के न बैठने से युवा उद्यमियों के लिए बेकार हो कर रह गया है।
करीमुद्दीनपुर निवासी युवा आशिकूंन नबी ने बताया कि चुने गए जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से यह सफेद हाथी बन कर रह गया है। यह सही हालत में रहता तो हम नौजवान यहां उद्योग लगाकर कर लोकल फार वोकल को सार्थक करते।
उद्यमी संजय सिंह परमार का कहना था कि चार एकड़ में स्थापित औद्योगिक आस्थान अधिकारियों की उदासीनता से दम तोड़ रहा है। जो यूनिट पहले से लगी थी उसमें से अधिकांश बंद हो गई है। लालफीताशाही के चलते यहां कोई उद्योग,धंधा लगाने से डर रहा है।
पूर्व प्रमुख सुजीत सिंह का कहना था कि अफसरों के साथ स्पष्ट औद्योगिक नीति के अभाव में यह समाप्त होने के कगार पर है। यह ठीक रहता तो क्षेत्र के युवा यह उद्योग लगा कर रोजगार पाने के साथ अन्य को रोजगार देते। इसको लेकर विभाग कभी गंभीर नहीं रहा।