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तमसा नदी में फेंका जा रहा कूड़ा
mau
Updated Tue, 12 Jun 2018 12:35 AM IST
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बंधा रोड पर तमसा नदी की तलहटी में फेंका गया कूड़ा।
- फोटो : mau
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नगर पालिका ने पौराणिक नदी तमसा को कचराघर बना दिया है। रोजाना सैकड़ों टन कचरा गिराए जाने से जहां प्रदूषण फैल रहा है तो वहीं नदी नाले के रूप में बदलती जा रही है। घरों से निकलने वाला कचरा यहां डंप किए जाने से उठ रही भीषण दुर्गंध लोगों के जीवन के लिए खतरा भी बन रही है। वहीं, नगर पालिका द्वारा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की पहल भी साकार नहीं हो सकी है। जबकि नदी को प्रदूषण से बचाने की समाजसेवियों की गुहार का प्रशासन पर कोई असर नहीं हो रहा। नगर पालिका परिक्षेत्र 42 वार्डो मेें बंटने के साथ करीब साढ़े तीन लाख की आबादी को समेट है। जिनको पालिका प्रशासन पेयजल समेत अन्य सुविधाएं प्रदान करती है। ऐसे में नगर क्षेत्र में बने मकानों से रोजाना हजारों लीटर गंदा पानी निकलता है।
जिसके लिए पालिका ने दर्जन भर से अधिक नालों एवं नालियों का निर्माण करा रखा है। घरों से निकल रहे गंदे पानी को नालियों के सहारे नालों में पहुंचाया जाता है। इसके बाद नालों के सहारे गंदे पानी को पौराणिक नदी तमसा में गिराया जा रहा है। ऐसे में गंदे पानी से तमसा नदी प्रदूषित हो रही है। इतना ही नहीं नगर से रोजाना प्रतिदिन 110 से 115 टन कचरा संग्रहित करने के बाद उसे नदी किनारे डंप किया जा रहा है।
तमसा सेवा मिशन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी छोटेलाल गांधी का कहना है कि नगरपालिका प्रशासन की तरफ से कचरा डंप किए जाने से तमसा नदी का भौगोलिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अतिक्रमण तेजी से हो रहा है। विभागीय उदासीनता जारी रही तो नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। पूर्व सभासद मनोज कुमार निगम कहते हैं कि नगरपालिका प्रशासन की तरफ से कूड़ा निस्तारण न किए जाने और नदी किनारीे इन्हें डंप किया जाना नगरवासियों के सेहत से खिलवाड़ है। रामपुर चकिया स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के परिसर में भी कूड़ा फेंका जा रहा है। शिकायत के बाद भी अधिकारी मौन हैं। इस बाबत नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी संजय मिश्र का कहना है कि नदी किनारे कचरा डंप नहीं किया जा रहा है। सीवरेज प्लांट के लिए जमीन चिह्नित करने की कवायद चल रही है।
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जिसके लिए पालिका ने दर्जन भर से अधिक नालों एवं नालियों का निर्माण करा रखा है। घरों से निकल रहे गंदे पानी को नालियों के सहारे नालों में पहुंचाया जाता है। इसके बाद नालों के सहारे गंदे पानी को पौराणिक नदी तमसा में गिराया जा रहा है। ऐसे में गंदे पानी से तमसा नदी प्रदूषित हो रही है। इतना ही नहीं नगर से रोजाना प्रतिदिन 110 से 115 टन कचरा संग्रहित करने के बाद उसे नदी किनारे डंप किया जा रहा है।
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तमसा सेवा मिशन समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी छोटेलाल गांधी का कहना है कि नगरपालिका प्रशासन की तरफ से कचरा डंप किए जाने से तमसा नदी का भौगोलिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अतिक्रमण तेजी से हो रहा है। विभागीय उदासीनता जारी रही तो नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। पूर्व सभासद मनोज कुमार निगम कहते हैं कि नगरपालिका प्रशासन की तरफ से कूड़ा निस्तारण न किए जाने और नदी किनारीे इन्हें डंप किया जाना नगरवासियों के सेहत से खिलवाड़ है। रामपुर चकिया स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय के परिसर में भी कूड़ा फेंका जा रहा है। शिकायत के बाद भी अधिकारी मौन हैं। इस बाबत नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी संजय मिश्र का कहना है कि नदी किनारे कचरा डंप नहीं किया जा रहा है। सीवरेज प्लांट के लिए जमीन चिह्नित करने की कवायद चल रही है।
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