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Mau News: जिला प्रशासन ने पहली बार ड्रोन से कराया डूबी फसल का सर्वे
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मधुबन तहसील के बाढ़ वाले ग्रामीण इलाकों का ड्रोन सर्वे करते मधुबन तहसील प्रशासन
जिले में बाढ़ की विभीषिका से कराह रहे किसानों के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ी और आधुनिक राहत भरी पहल की है। प्रशासनिक टीम ने इतिहास में पहली बार ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर बाढ़ के पानी में डूबी 1500 हेक्टेयर फसल का हवाई सर्वे कराया है। इस डिजिटल सर्वे की मदद से अब बिना किसी मानवीय पक्षपात के नुकसान का सटीक आकलन किया जा सकेगा, जिससे पीड़ित किसानों को जल्द से जल्द और सीधे उनके बैंक खातों में मुआवजा राशि भेजी जा सकेगी। जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने प्रभावित इलाकों में ड्रोन उड़ाकर फसलों की मौजूदा स्थिति का बारीकी से डेटा जुटाया है।
जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने बताया कि सरयू नदी का जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है, इससे नदी खतरे बिंदु से नीचे आ चुकी है। उधर पानी कम होने के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक का सहारा लिया गया है ।बताया कि इस मुहिम को धरातल पर उतारने में एसडीएम मधुबन दीपक सिंह के नेतृत्व में राजस्व टीम ने विशुनपुरा, चक्कीमूसाडोही, मूसाडोही सहित आसपास के कई अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों में ड्रोन उड़ाकर फसलों की मौजूदा स्थिति का बारीकी से डेटा जुटाया है। प्रशासन की इस डिजिटल पहल से बाढ़ के पानी में डूबी 1500 हेक्टेयर फसल का डिजिटल सर्वे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
डीएम ने बताया कि इस हवाई सर्वे का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब बिना किसी मानवीय पक्षपात या त्रुटि के नुकसान का बिल्कुल सटीक और पारदर्शी आकलन किया जा सकेगा। सर्वे का डेटा तैयार होने के बाद पीड़ित किसानों को जल्द मुआवजा राशि भेजने की कवायद शुरू की जाएगी। बताया कि इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित फसल गन्ना, धान है।
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बाढ़ पीड़ितों को दी जा रही राशन किट
मधुबन। एसडीएम दीपक सिंह ने बताया कि बीते दिनों 18 बाढ़ पीड़ितों को कैबिनेट मंत्री एके शर्मा के नेतृत्व में राशन किट वितरित की गई है। बताया कि अभी 500 बाढ़ पीड़ितों को चिह्नित किया गया है, जिन्हें अगले दो-तीन चरणों में राशन किट दी जाएगी। बताया कि बाढ़ को लेकर डीएम आनंद वर्धन के निर्देश पर दो बार मॉनिटरिंग की जा रही है।
तेरह बाढ़ पीड़ितों को दूसरे जगह किया गया विस्थापित
मधुबन। मधुबन एसडीएम ने बताया कि इस बार भले ही सरयू नदी ने दो बार खतरे बिंदु को पार किया, लेकिन असर ज्यादा देखने को नहीं मिला। देवरिया जिले की जद में आने वाले परसिया गांव की ओर से कटान की समस्या बनी है। बताया कि धूंस का पुरवा में सरकारी जमीन पर तेरह बाढ़ पीड़ितों को बसाया गया है। यहां जलस्तर बढ़ने पर इन लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। बताया कि जलस्तर कम होने के बाद प्रभावित मार्ग चिह्नित किए जा रहे हैं। ताकि मरम्मत कराई जा सके।
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जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने बताया कि सरयू नदी का जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है, इससे नदी खतरे बिंदु से नीचे आ चुकी है। उधर पानी कम होने के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक का सहारा लिया गया है ।बताया कि इस मुहिम को धरातल पर उतारने में एसडीएम मधुबन दीपक सिंह के नेतृत्व में राजस्व टीम ने विशुनपुरा, चक्कीमूसाडोही, मूसाडोही सहित आसपास के कई अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों में ड्रोन उड़ाकर फसलों की मौजूदा स्थिति का बारीकी से डेटा जुटाया है। प्रशासन की इस डिजिटल पहल से बाढ़ के पानी में डूबी 1500 हेक्टेयर फसल का डिजिटल सर्वे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
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डीएम ने बताया कि इस हवाई सर्वे का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब बिना किसी मानवीय पक्षपात या त्रुटि के नुकसान का बिल्कुल सटीक और पारदर्शी आकलन किया जा सकेगा। सर्वे का डेटा तैयार होने के बाद पीड़ित किसानों को जल्द मुआवजा राशि भेजने की कवायद शुरू की जाएगी। बताया कि इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित फसल गन्ना, धान है।
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बाढ़ पीड़ितों को दी जा रही राशन किट
मधुबन। एसडीएम दीपक सिंह ने बताया कि बीते दिनों 18 बाढ़ पीड़ितों को कैबिनेट मंत्री एके शर्मा के नेतृत्व में राशन किट वितरित की गई है। बताया कि अभी 500 बाढ़ पीड़ितों को चिह्नित किया गया है, जिन्हें अगले दो-तीन चरणों में राशन किट दी जाएगी। बताया कि बाढ़ को लेकर डीएम आनंद वर्धन के निर्देश पर दो बार मॉनिटरिंग की जा रही है।
तेरह बाढ़ पीड़ितों को दूसरे जगह किया गया विस्थापित
मधुबन। मधुबन एसडीएम ने बताया कि इस बार भले ही सरयू नदी ने दो बार खतरे बिंदु को पार किया, लेकिन असर ज्यादा देखने को नहीं मिला। देवरिया जिले की जद में आने वाले परसिया गांव की ओर से कटान की समस्या बनी है। बताया कि धूंस का पुरवा में सरकारी जमीन पर तेरह बाढ़ पीड़ितों को बसाया गया है। यहां जलस्तर बढ़ने पर इन लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। बताया कि जलस्तर कम होने के बाद प्रभावित मार्ग चिह्नित किए जा रहे हैं। ताकि मरम्मत कराई जा सके।