दोहरीघाट / सूूरजपुर। घाघरा के जलस्तर में जैसे-जैसे घटाव हो रहा है। नदी उग्र होती जा रही है। इससे तटवर्ती इलाकों के दिलों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही है। भारतमाता मंदिर की सुरक्षा मेें लगाए गए बोल्डरों के खिसकने से ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे मे पड़ गया है। वहीं परिखापुर ग्राम सभा के ठीक सामने रसूलपुर आश्रम पर नदी में बैकरोलिंग होने से रसूलपुर आश्रम पर भीषण कटान शुरू हो गई। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विरेंद्र पासवान ने कटान स्थल का जायजा लिया। घाघरा का जलस्तर जैसे-जैसे घटाव हो रहा है कटान तेज होती जा रही है। नदी का दबाव शाही मस्जिद, भारतमाता मंदिर पर बढता जा रहा है। शाही मस्जिद के पास नदी की धारा में बोल्डर विलीन होते जा रहें है। जिससे सिंचाई विभाग के होश उड़ गये है। धीरे धीरे घाघरा की प्रलयकारी लहरों से मुक्तिधाम व भारत माता मंदिर पर नदी का दबाव बढ़ रहा है। नगर की ऐतिहासिक धरोहरों के आस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो घाघरा का जलस्तर 69.60 मीटर तक पहुंच गया। जबकि मंगलवार को मुक्तिधाम घाट पर 69.80 मीटर था। घाघरा के बढ़ने व घटने का क्रम कई बार देखने को मिला जिससे लोगो की धड़कने तेज होने लगी है। नदी के रुख से तटवर्ती इलाको के लोगो मे दहशत व्याप्त है।इसके साथ ही घाघरा के तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर नई बाजार, नवली, बहादुर, पतनई,सरया, ठाकुरगाव, बीवीपुर, ताहिरपुर, सरासो, पाऊस, गोधनी, कोरौली, ठिकरहिया, महुआबारी, रसूलपुर, सूरजपुर आदि गावो मे कटान का खतरा अभी भी बरकरार है। वहीं क्षेत्र के रसूलपुर न्याय पंचायत अंतर्गत परिखापुर ग्राम सभा के ठीक सामने रसूलपुर आश्रम के पास बैक रोलिंग होने के कारण रसूलपुर आश्रम पर भीषण कटान शुरू हो गया। जिसके कारण रसूलपुर आश्रम वासियों में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों की सूचना पर रसूलपुर आश्रम पर सरयू नदी में हों रहीं कटान का निरीक्षण करने पहुंचे सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विरेंद्र पासवान ने अपनी टीम के साथ जायजा लिया। कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग के जेई कमलेश यादव एवं एई धनंजय यादव को मजबूत स्टड ठोकर बनाने के लिए दिशानिर्देश दिए।आनन-फानन में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने रसूलपुर आश्रम पर सरयू नदी में हों रहीं कटान को रोकने के लिए मजबूत स्टड ठोकर बनाने का कार्य शुरू करा दिया। साथ नदी के किनारे पानी में जगह-जगह हों रहें बैकरोलिग को रोकने के लिए बड़े बड़े पेड़ों की टहनियां रस्सी से बांध कर नदी डालने का काम शुरू करा दिया।