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‘प्रशासन की कार्रवाई का डर नहीं’
mau
Updated Thu, 12 Jul 2018 12:21 AM IST
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कलेक्ट्रेट पर लेखपालों के धरना प्रदर्शन में माला पहनकर शामिल निलंबित लेखपाल।
- फोटो : mau
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उप्र लेखपाल संघ के तत्वावधान में लेखपालों ने विभिन्न मांगों को लेकर सातवें दिन भी कलेक्ट्रेट परिसर में धरना प्रदर्शन किया। प्रशासन की तरफ से निलंबित किए गए लेखपालों को फूलमाला पहनाकर सम्मानित किया। साथ ही आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया। उधर, हड़ताल के चलते तहसीलों में कामकाज ठप हो गया है।
जिलाध्यक्ष पारसनाथ पासी ने कहा कि जिला प्रशासन की तरफ से उपजिलाधिकारी पर दबाव बनाकर पदाधिकारियों को निलंबित कराया गया है। इससे लेखपाल डरने वाले नहीं हैं। जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक आंदोलन चलता रहेगा। राजेश सिंह ने कहा कि आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार के बार-बार आश्वासन के बाद भी वेतन उच्चीकरण, एसीपी विसंगति, पेंशन विसंगति आदि में कोई सुधार नहीं हुआ है।साथ ही ई गवर्नेंस, डिजिटल इंडिया को क्रियांवित करने के लिए लैपटॉप तथा स्मार्टफोन जैसी सुविधाओं का अभाव है जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। धरने को चंद्रभान यादव, जयप्रकाश यादव, मुन्ना लाल, बाबू राम मौर्य, महेंद्र गुप्ता आदि ने संबोधित किया।
उधर, हड़ताल के चलते तहसीलों में कामकाज बाधित हो गया है। इस समय स्कूलों कालेजों में प्रवेश और नौकरियों के आवेदन भरे जा रहे हैं। ऐसे में सभी को जाति और आय प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ रही है। छात्र और उनके अभिभावकों ने जनवाणी और जनसेवा केंद्रों पर आवेदन दिए हैं। लेकिन हड़ताल के चलते काम नहीं हो रहा। छात्र शुभम और छात्रा काजल ने बताया कि इन लोगों ने 30 जून को आवेदन कर दिए थे। इस उम्मीद में हैं कि लेखपालों की हड़ताल जल्द खत्म हो और उन्हें प्रमाण पत्र मिल सके। किसान अनिरुद्ध यादव, मुमताज अली और राजेश ने बताया कि लेखपालों की हड़ताल से विवादित जमीनों की पैमाईश और श्रावस्ती माडल के तहत समस्याओं के निस्तारण का कार्य पूरी तरह ठप है।
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जिलाध्यक्ष पारसनाथ पासी ने कहा कि जिला प्रशासन की तरफ से उपजिलाधिकारी पर दबाव बनाकर पदाधिकारियों को निलंबित कराया गया है। इससे लेखपाल डरने वाले नहीं हैं। जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक आंदोलन चलता रहेगा। राजेश सिंह ने कहा कि आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार के बार-बार आश्वासन के बाद भी वेतन उच्चीकरण, एसीपी विसंगति, पेंशन विसंगति आदि में कोई सुधार नहीं हुआ है।साथ ही ई गवर्नेंस, डिजिटल इंडिया को क्रियांवित करने के लिए लैपटॉप तथा स्मार्टफोन जैसी सुविधाओं का अभाव है जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है। धरने को चंद्रभान यादव, जयप्रकाश यादव, मुन्ना लाल, बाबू राम मौर्य, महेंद्र गुप्ता आदि ने संबोधित किया।
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उधर, हड़ताल के चलते तहसीलों में कामकाज बाधित हो गया है। इस समय स्कूलों कालेजों में प्रवेश और नौकरियों के आवेदन भरे जा रहे हैं। ऐसे में सभी को जाति और आय प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ रही है। छात्र और उनके अभिभावकों ने जनवाणी और जनसेवा केंद्रों पर आवेदन दिए हैं। लेकिन हड़ताल के चलते काम नहीं हो रहा। छात्र शुभम और छात्रा काजल ने बताया कि इन लोगों ने 30 जून को आवेदन कर दिए थे। इस उम्मीद में हैं कि लेखपालों की हड़ताल जल्द खत्म हो और उन्हें प्रमाण पत्र मिल सके। किसान अनिरुद्ध यादव, मुमताज अली और राजेश ने बताया कि लेखपालों की हड़ताल से विवादित जमीनों की पैमाईश और श्रावस्ती माडल के तहत समस्याओं के निस्तारण का कार्य पूरी तरह ठप है।
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